Edited By Urmila,Updated: 09 Oct, 2026 03:27 PM

पंजाब के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के महंगाई भत्ते (DA/DR) के बकाये का मामला एक बार फिर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचा।
चंडीगढ़: पंजाब के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के महंगाई भत्ते (DA/DR) के बकाये का मामला एक बार फिर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचा। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव केएपी सिन्हा अदालत में पेश हुए। अदालत ने अवमानना मामले को संबंधित रोस्टर बेंच के पास भेज दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि न्यायालय की गरिमा बनाए रखना जरूरी है। अब इस मामले पर सोमवार को अगली सुनवाई होगी।
सुनवाई में पंजाब सरकार की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा कि मुख्य सचिव की मंशा अदालत को गुमराह करने की नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर सरकार बिना शर्त माफी मांगने के लिए तैयार है।
कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में देरी का मुद्दा उठाया
कर्मचारियों के पक्ष में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कौशल ने सवाल उठाया कि DA बकाये के मामले में हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली पंजाब सरकार की अपील अभी तक सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध क्यों नहीं हुई। उन्होंने ED से संबंधित मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि उस मामले में अपील पर सुनवाई की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी, जबकि कर्मचारियों के बकाये के मामले में देरी हो रही है।
सरकार ने पुराने कार्यकाल का बताया मामला
पंजाब सरकार के वकील ने अदालत में दलील दी कि DA का बकाया मौजूदा सरकार के समय का नहीं, बल्कि पिछली सरकारों के कार्यकाल से जुड़ा है। हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा कि संबंधित फैसला देने से पहले रिकॉर्ड की जांच की जा चुकी है। अदालत ने यह भी साफ किया कि सरकार फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकती है, लेकिन न्यायालय के सामने गलत जानकारी रखने के मामले को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अपील की खामियों पर अदालत ने मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील की कमियां अब तक दूर नहीं किए जाने का मुद्दा भी उठा। इसी विवाद के सिलसिले में आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया गया था। हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई संबंधित रोस्टर बेंच के अधिकार क्षेत्र में आती है, इसलिए इसे उसी पीठ के पास भेजा गया है।
हाई कोर्ट पहले दे चुका है बकाया चुकाने का आदेश
DA/DR विवाद में 3 अगस्त 2026 को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार और PSPCL की अपीलें खारिज कर दी थीं। अदालत ने कर्मचारियों और पेंशनर्स की लंबित किस्तों का भुगतान केंद्रीय सरकार के पैटर्न के अनुरूप करने का निर्देश दिया था। अदालत ने भुगतान के लिए 15 दिन की समयसीमा तय की थी। तय समय में रकम जारी नहीं होने पर बकाये पर 6 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज देने का निर्देश भी दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने रखी वित्तीय दलील
हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची पंजाब सरकार ने दलील दी कि इतनी बड़ी राशि को कम समय में जारी करना वित्तीय और संवैधानिक दृष्टि से संभव नहीं है। सरकार का यह भी कहना है कि पंजाब के 2021 के पे रूल्स में DA तय करने के लिए केंद्र सरकार की दरों या फॉर्मूले को अनिवार्य नहीं किया गया और राज्य को अपनी दर निर्धारित करने का अधिकार है।
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