Edited By Urmila,Updated: 20 Feb, 2026 06:12 PM

कांग्रेसी विधायक और पंजाब के पूर्व एजुकेशन मिनिस्टर परगट सिंह ने 8वीं क्लास की परीक्षा के दौरान प्रश्न पत्रों में हुई बड़ी लापरवाही के लिए पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड को फटकार लगाई है।
चंडीगढ़ : कांग्रेसी विधायक और पंजाब के पूर्व एजुकेशन मिनिस्टर परगट सिंह ने 8वीं क्लास की परीक्षा के दौरान प्रश्न पत्रों में हुई बड़ी लापरवाही के लिए पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड को फटकार लगाई है। उन्होंने इसे बहुत गंभीर प्रबंधकीय और तकनीकी नाकामी बताया है।
पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक परगट सिंह ने पंजाब सरकार की शिक्षा क्रांति के दावों की हवा निकाल गई है। एक तरफ खुद शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस मान चुके हैं कि जिन सरकारी स्कूलों को मॉडर्न बता रहे हैं, उन स्कूलों के टीचरों को पढ़ाना तक नहीं आता है। यह सरकार की नाकामी है। वहीं अब पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड को बहुत गंभीर प्रशासनिक और तकनीकी विफलता का सामना करना पड़ा है। बोर्ड की परीक्षा में पंजाबी भाषा के साथ लापरवाही की गई है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले में जिम्मेदारी तय की जाए और पंजाबी भाषा के साथ इस लापरवाही को तुरंत बंद किया जाना चाहिए।
परगट सिंह ने कहा कि 8वीं क्लास के साइंस के प्रश्न पत्रों में पंजाबी (गुरुमुखी) वर्जन से 15 मार्क्स के 3 सवाल गायब थे, जबकि हिंदी और इंग्लिश वर्जन में पूरे 30 सवाल छपे थे। यह कोई छोटी गलती नहीं है, बल्कि प्रबंधकीय लापरवाही और क्षेत्रीय भाषा के साथ भेदभाव का साफ मामला है। इस गलती की वजह से 3 लाख से ज़्यादा पंजाबी मीडियम के स्टूडेंट्स को करीब 19% मार्क्स का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और पंजाबी भाषा की इस अनदेखी को तुरंत रोका जाना चाहिए।
इस गलती की वजह से 3 लाख से ज्यादा पंजाबी मीडियम के छात्रों को लगभग 19% मार्क्स का नुकसान हुआ है। बच्चों की भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गलती को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।
परगट सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की शिक्षा क्रांति का हवाला देते हुए पंजाब में लोगों को मूर्ख बनाकर सरकार बनाई थी। पिछेल चार साल से पंजाब में शिक्षा क्रांति लाने के बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि यह दावे सिर्फ कागजी हैं। इनमें कोई सच्चाई नहीं है। शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने स्कूल चैक किए तो उनको पता चला कि स्कूल अध्यापकों को पढ़ाना ही नहीं आता है। जब इन टीचरों को पढ़ाना ही नहीं आता है तो आप चार साल से किस शिक्षा क्रांति की बात कर रहे थे। शिक्षा की दुर्दशा के लिए टीचरों की जिम्मेदार ठहरा कर शिक्षा मंत्री अपनी और पंजाब सरकार की नालायकी छिप नहीं सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने तो सरकारी स्कूलों को अपनी पार्टी के झंडे के रंग में रंग दिया है। स्कूलों का राजनीतिकरण किया जा रहा है। इन सब तरीकों से शिक्षा में सुधार नहीं हो सकता है। वह पहले ही कह चुके हैं कि जब तक पंजाब के हजारों सरकारी स्कूलों में खाली पड़े प्रिंसीपल, हैड मास्टर्स और अन्य अध्यापकों के पदों को भरना चाहिए। स्कूलों की इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाए। खंडहर हो चुकी सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग को नए सिरे से बनवाया जाए। सच्चाई तो यह भी है कि बहुत सारे स्कूलों में अभी तक लड़के-लड़कियों के लिए अलग-अलग टायलेट तक की सुविधा नहीं है।
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