Edited By Subhash Kapoor,Updated: 08 Oct, 2026 07:49 PM

भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुघ ने पंजाब के 50 नगर निकाय वार्डों के चुनाव रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने पंजाब में AAP...
चंडीगढ़ : भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुघ ने पंजाब के 50 नगर निकाय वार्डों के चुनाव रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने पंजाब में AAP सरकार के शासन में लोकतांत्रिक व्यवस्था की गंभीर स्थिति को उजागर कर दिया है।
चुघ ने कहा कि जिस आम आदमी पार्टी ने स्वराज, पारदर्शिता और व्यवस्था बदलने के नाम पर राजनीति शुरू की थी, आज उसी के शासन में विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने, नामांकन पत्र छीनने, फाड़ने और नष्ट करने तथा उम्मीदवारों को धमकाने, हिरासत में लेने और उनके साथ मारपीट करने जैसे गंभीर तथ्य सुप्रीम कोर्ट के सामने आए हैं।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पटियाला के 28 और मोगा के 22, कुल 50 वार्डों के चुनाव निरस्त कर दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस निर्मलजीत कौर की अध्यक्षता वाले फैक्ट फाइंडिंग कमीशन ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों की जांच की और गंभीर अनियमितताओं को सामने रखा, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार किया।
चुघ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में नामांकन प्रक्रिया में व्यापक बाधा डालने की बात सामने आई है। नामांकन पत्र छीने, फाड़े और नष्ट किए गए, उम्मीदवारों को धमकाया गया और हिरासत में लिया गया। पटियाला के 13 वार्डों में विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने के कारण चुनाव निरस्त किए गए, जबकि बाघापुराना के सभी 15 वार्डों में विपक्षी उम्मीदवारों को व्यवस्थित रूप से नामांकन दाखिल करने से रोकने की बात सामने आई। उन्होंने कहा, “भगवंत मान जी, यह सब आपकी सरकार के राज में हुआ है। अब पंजाब की जनता को जवाब दीजिए कि लोकतंत्र के इस अपमान की जिम्मेदारी कौन लेगा?”
तरुण चुघ ने कहा कि मामला इतना गंभीर है कि सुप्रीम कोर्ट को दोबारा चुनाव के लिए असाधारण निगरानी व्यवस्था करनी पड़ी। सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में मॉनिटरिंग कमेटी, बाहरी पर्यवेक्षक और चुनाव प्रक्रिया की वीडियोग्राफी जैसे निर्देश दिए गए हैं। यह अपने आप में बताता है कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर कितने गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि जिस राज्य सरकार की जिम्मेदारी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने तथा कानून व्यवस्था बनाए रखने की थी, उसी सरकार के कार्यकाल में अब सुप्रीम कोर्ट को यह सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था बनानी पड़ रही है कि उम्मीदवार अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें। यह भगवंत मान सरकार के लिए शर्मिंदगी और जवाबदेही का विषय है।
तरुण चुघ ने कहा कि आम आदमी पार्टी देशभर में लोकतंत्र और संविधान की दुहाई देती है, लेकिन पंजाब में अपनी सरकार के दौरान सामने आए इन गंभीर सवालों पर अरविंद केजरीवाल की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। अरविंद केजरीवाल जी, पंजाब में लोकतंत्र की इस स्थिति पर आपकी आवाज क्यों बंद है? आपकी अपनी पार्टी की सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का इतना गंभीर आदेश आया है, फिर आप चुप क्यों हैं?
उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल और AAP को दूसरों को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने से पहले पंजाब में अपनी सरकार का हिसाब देना चाहिए। अगर विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका जाता है, तो यह लोकतंत्र की मूल भावना पर सीधा प्रहार है।
तरुण चुघ ने कहा कि भाजपा की स्पष्ट मांग है कि चुनाव प्रक्रिया में कानून का उल्लंघन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान कर निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही भगवंत मान को इस पूरे प्रकरण की नैतिक और राजनीतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद पर बने रहने का अधिकार खो दिया है।
उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता को जवाब चाहिए, बहाने नहीं। भगवंत मान सरकार को बताना होगा कि लोकतंत्र के इस कथित अपमान के लिए कौन जिम्मेदार है और दोषियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है।