Edited By Kamini,Updated: 08 Oct, 2026 05:39 PM
लुधियाना (मेहरा): कंप्यूटर एवं लैपटॉप चोरी मामले में कोर्ट ने बीमा कंपनी ने बड़ा झटका दिया है। जानकारी के मुताबिक, कोचर मार्केट स्थित कंप्यूटर एवं लैपटॉप डीलर की दुकान से 13 लैपटॉप चोरी होने के करीब 7 वर्ष पुराने मामले में स्थायी लोक अदालत (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज), लुधियाना ने बीमा कंपनी को बड़ा झटका देते हुए 4,35,335 रुपये का बीमा दावा मंजूर करने के साथ 10,000 रुपये मानसिक परेशानी और 5,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च अदा करने के आदेश दिए हैं।
इस प्रकार नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को याचिकाकर्ता को कुल 4,50,335 रुपये का भुगतान करना होगा। पीठ ने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान नहीं करने पर बीमा कंपनी को 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी अदा करना होगा। फैसला 16 सितंबर 2026 को सुनाया गया। चेयरमैन प्रीति सहनी तथा सदस्य जसवंत सिंह और राकेश सतीजा की पीठ ने यह आदेश एम/एस माइक्रो आईटी सॉल्यूशंस के प्रोपराइटर नितिन वर्मा द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए पारित किया।
दुकान से चोरी हुए थे 13 लैपटॉप
मामले के अनुसार, नितिन वर्मा कोचर मार्केट में कंप्यूटर एवं लैपटॉप का कारोबार करते हैं। उन्होंने अपनी दुकान में रखे सामान की चोरी के जोखिम को कवर करने के लिए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से बीमा पॉलिसी ली हुई थी। 15 और 16 अक्टूबर 2019 की मध्यरात्रि को अज्ञात चोर उनकी दुकान में घुस गए और वहां रखे 13 लैपटॉप चोरी कर लिए। घटना की सूचना पुलिस को दी गई, जिसके बाद थाना डिवीजन नंबर-5 में आईपीसी की धारा 457 और 380 के तहत मामला दर्ज किया गया। याचिकाकर्ता ने चोरी हुए लैपटॉपों की खरीद से संबंधित बिल रिकॉर्ड पर पेश किए। इन बिलों के अनुसार चोरी हुए 13 लैपटॉपों की कुल कीमत 4,35,335 रुपये थी।
बीमा कंपनी ने नियुक्त किए सर्वेयर और इन्वेस्टिगेटर
चोरी की सूचना मिलने के बाद बीमा कंपनी ने मामले की जांच के लिए इन्वेस्टिगेटर तथा सर्वेयर नियुक्त किया। इन्वेस्टिगेटर की रिपोर्ट में करीब पांच-छह लैपटॉप चोरी होने की बात कही गई तथा नुकसान का अनुमान लगभग 1.50 लाख से 1.80 लाख रुपये के बीच लगाया गया। इसके बाद सर्वेयर ने नुकसान की राशि घटाकर मात्र 1,27,265 रुपये निर्धारित कर दी। बीमा कंपनी ने सर्वेयर द्वारा निर्धारित राशि को ही पूर्ण एवं अंतिम भुगतान के रूप में स्वीकार करने का प्रस्ताव दिया। हालांकि, नितिन वर्मा ने यह कहते हुए राशि स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि वास्तव में 13 लैपटॉप चोरी हुए हैं और उनके पास उनकी कीमत दर्शाने वाले खरीद बिल तथा स्टॉक से संबंधित रिकॉर्ड मौजूद हैं।
कंपनी ने दुकान के आकार पर उठाए सवाल
बीमा कंपनी ने लोक अदालत के समक्ष याचिका का विरोध करते हुए कई दलीलें दीं। कंपनी का कहना था कि दुकान का आकार केवल 10×15 फीट था और वहां मौजूद छोटा काउंटर चार-पांच लैपटॉप से अधिक रखने के लिए पर्याप्त नहीं था। इसलिए 13 लैपटॉप चोरी होने का दावा संदेहास्पद है। कंपनी ने यह भी दलील दी कि याचिकाकर्ता ने निर्धारित समय के भीतर अनट्रेस्ड रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की थी। इसी आधार पर बीमा कंपनी ने दावा ‘नो क्लेम’ के रूप में बंद किए जाने को उचित बताया।
लोक अदालत ने बीमा कंपनी की दलीलें खारिज कीं
लोक अदालत ने दोनों पक्षों के रिकॉर्ड और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद बीमा कंपनी की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। पीठ ने कहा कि 10×15 फीट की दुकान को इतना छोटा नहीं माना जा सकता कि उसमें 13 लैपटॉप रखे ही न जा सकें। लैपटॉप अपेक्षाकृत छोटे आकार के होते हैं और उन्हें दुकान के काउंटर के अलावा अलमारियों अथवा अन्य स्थानों पर भी सुरक्षित रखा जा सकता है।अदालत ने यह भी पाया कि इन्वेस्टिगेटर की रिपोर्ट में एक महिला का उल्लेख किया गया था, जिसके बारे में कहा गया कि उसने कथित तौर पर चोर को देखा था। हालांकि, उक्त महिला की पहचान स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं की गई और न ही उसके कथित बयान को साबित करने वाला कोई ठोस साक्ष्य रिकॉर्ड पर प्रस्तुत किया गया। इसलिए इस आधार पर याचिकाकर्ता के दावे को संदेह की नजर से नहीं देखा जा सकता।
खरीद बिल और स्टॉक रिकॉर्ड ने दावे को दिया आधार
लोक अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने चोरी हुए लैपटॉपों की कीमत दर्शाने वाले खरीद बिल रिकॉर्ड पर पेश किए हैं। इसके अलावा दुकान के बिक्री रिकॉर्ड और स्टॉक सर्टिफिकेट से भी उसके दावे को समर्थन मिलता है। पीठ ने माना कि बीमा कंपनी यह स्पष्ट करने में असफल रही कि सर्वेयर द्वारा निर्धारित 1,27,265 रुपये की राशि ही वास्तविक नुकसान क्यों मानी जाए, जबकि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में चोरी हुए सामान की कुल कीमत 4,35,335 रुपये दर्शाई गई है। अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि केवल सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर बीमाधारक द्वारा प्रस्तुत अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, विशेषकर तब जब बीमा कंपनी दावे की कम राशि निर्धारित करने के लिए कोई ठोस और विश्वसनीय आधार प्रस्तुत करने में विफल रही हो।
दो महीने में भुगतान के आदेश
सभी तथ्यों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद स्थायी लोक अदालत ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को 4,35,335 रुपये बीमा राशि, 10,000 रुपये मानसिक परेशानी तथा 5,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में अदा करे। पीठ ने कुल 4,50,335 रुपये की राशि का भुगतान आदेश की तारीख से दो महीने के भीतर करने का निर्देश दिया है। यदि बीमा कंपनी निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करती है तो उसे आवेदन दायर करने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इस आदेश के साथ लोक अदालत ने स्पष्ट किया कि बीमा दावे में सर्वेयर द्वारा निर्धारित राशि को मात्र इसलिए अंतिम नहीं माना जा सकता कि वह सर्वेयर की रिपोर्ट में दर्ज है; यदि बीमाधारक अपने वास्तविक नुकसान के समर्थन में विश्वसनीय दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करता है, तो उन साक्ष्यों का भी समुचित मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है।
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