Edited By Kalash,Updated: 05 Oct, 2026 12:07 PM

देशभर की यूनिवर्सिटीज में दाखिले के लिए होने वाली सी.यू.ई.टी.-यूजी (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रैंस टैस्ट-अंडरग्रैजुएट) में शामिल होने वाले 15 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को वर्ष 2027 से राहत मिलने जा रही है।
लुधियाना (विक्की): देशभर की यूनिवर्सिटीज में दाखिले के लिए होने वाली सी.यू.ई.टी.-यूजी (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रैंस टैस्ट-अंडरग्रैजुएट) में शामिल होने वाले 15 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को वर्ष 2027 से राहत मिलने जा रही है। अब विद्यार्थियों को परीक्षा देने के लिए अलग-अलग सैंटरों पर बार-बार नहीं जाना पड़ेगा। सूत्रों के मुताबिक अब एक विद्यार्थी की सी.यू.ई.टी.-यू.जी. की पूरी परीक्षा एक ही दिन में समाप्त हो जाएगी। परीक्षा के लिए निर्धारित 12 से 15 दिनों की विंडो में से प्रत्येक विद्यार्थी को सिर्फ एक ही दिन परीक्षा केंद्र आना होगा।यूनिवर्सिटी एंट्रैंस परीक्षा के पैटर्न में बदलाव के रोडमैप पर विशेषज्ञों की सहमति बन गई है और जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। अभी तक विद्यार्थियों को 2 से 3 बार अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर जाना पड़ता था जिससे उनका समय और पैसा खर्च होता था। नए नियम से दोनों की बचत होगी। वर्ष 2026 की परीक्षा में 15,68,866 विद्यार्थियों ने आवेदन किया था। बदलावों को लागू करने के लिए फाइनल गाइडलाइन्स तैयार की जा रही हैं।
विषयों की संख्या और समय घटाने की तैयारी
वर्तमान में एक विद्यार्थी अधिकतम 5 विषयों की परीक्षा दे सकता है और हर विषय के लिए 60 मिनट मिलते हैं। नए फॉर्मूले के तहत हर विषय की परीक्षा का समय घटाकर 40 से 45 मिनट किया जाएगा। यदि कोई विद्यार्थी 5 विषयों की परीक्षा देता है, तो उसकी कुल परीक्षा अधिकतम 200 मिनट (3 घंटे 20 मिनट) में पूरी हो जाएगी। शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में यू.जी.सी. (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन), एन.टी.ए. (नैशनल टैस्टिंग एजैंसी) और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में इस बात पर भी विचार किया गया कि क्या 5 के बदले अधिकतम 4 विषयों का विकल्प दिया जा सकता है। अगर विद्यार्थी 4 विषय चुनता है, तो वह 160 मिनट में परीक्षा पूरी कर सकेगा।
सवालों की संख्या 35 से 40 तक करने पर विचार
सी.यू.ई.टी.-यू.जी. में 37 विषयों की परीक्षा होती है जिनमें 13 लैंग्वेज, एक जनरल एप्टीट्यूड टैस्ट और 23 डोमेन सब्जैक्ट शामिल हैं। मौजूदा पैटर्न में 60 मिनट में 50 सवालों के जवाब देने होते हैं। समय कम होने के साथ सवालों की संख्या भी घटाकर 35 से 40 की जा सकती है। इसके साथ ही यूनिवर्सिटीज के एडमिशन क्राइटेरिया के अंतर को खत्म करने की योजना है। उदाहरण के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी (डी.यू.) में जनरल टैस्ट मान्य नहीं है, जबकि उत्तर प्रदेश की यूनिवर्सिटीज में यह जरूरी है। यू.जी.सी. को निर्देश दिया गया है कि सभी यूनिवर्सिटीज के दाखिला नियमों में एकरूपता लाई जाए ताकि 4 विषयों का विकल्प सही तरीके से लागू हो सके।
कम आवेदन वाले पी.जी. कोर्सों में नहीं होगी परीक्षा
सी.यू.ई.टी.-पी.जी. में भी 2027 से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सूत्रों के अनुसार जिन विषयों में तय सीटों से कम आवेदन आते हैं, उनमें एन.टी.ए. परीक्षा नहीं कराएगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी कोर्स में 500 सीटें हैं और आवेदन इससे कम आते हैं तो सीधे मैरिट के आधार पर दाखिला दिया जाएगा। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों के मुताबिक, 30 से अधिक ऐसे विषय चिन्हित किए गए हैं जिनमें सीटों के मुकाबले आवेदन कम आते हैं।
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