Edited By Kamini,Updated: 26 Sep, 2026 11:10 AM
पंजाबी गायक गुलाब सिद्धू के बरनाला स्थित पैतृक घर के बाहर हुई फायरिंग के मामले में बरनाला पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिवंगत पंजाबी गायक शुभदीप सिंह सिद्धू उर्फ सिद्धू मूसेवाला के पूर्व मैनेजर शगनप्रीत सिंह के पिता सौदागर सिंह को खन्ना से...
खन्ना/दोराहा/पायल (विनायक): पंजाबी गायक गुलाब सिद्धू के बरनाला स्थित पैतृक घर के बाहर हुई फायरिंग के मामले में बरनाला पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिवंगत पंजाबी गायक शुभदीप सिंह सिद्धू उर्फ सिद्धू मूसेवाला के पूर्व मैनेजर शगनप्रीत सिंह के पिता सौदागर सिंह को खन्ना से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार सौदागर सिंह को उस समय हिरासत में लिया गया, जब वह खन्ना के प्रेम वैष्णो ढाबा फायरिंग मामले में अदालत में पेशी के लिए पहुंचे थे। बरनाला पुलिस की टीम उन्हें अपने साथ ले गई और गुलाब सिद्धू के घर के बाहर हुई फायरिंग के संबंध में पूछताछ शुरू की गई है।
जानकारी के अनुसार, बरनाला पुलिस ने खन्ना सिटी थाना पुलिस को सौदागर सिंह को हिरासत में लिए जाने की सूचना दी, जिसके बाद थाना स्तर पर डीडीआर दर्ज की गई। इसके बाद बरनाला पुलिस की टीम उन्हें अपने साथ ले गई। पुलिस जांच में अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गुलाब सिद्धू के घर पर हुई फायरिंग की वारदात में सौदागर सिंह की कथित भूमिका क्या रही है और क्या उनका इस मामले में नामजद या गिरफ्तार किए जा चुके अन्य आरोपियों से कोई संबंध रहा है। हालांकि, उनकी भूमिका को लेकर अंतिम स्थिति पुलिस जांच और अदालत की कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगी।
12-13 सितंबर की रात गुलाब सिद्धू के घर पर हुई थी फायरिंग
बरनाला जिले के गांव फरवाही स्थित गुलाब सिद्धू के पैतृक घर पर 12 और 13 सितंबर की दरमियानी रात करीब 1.30 से 2 बजे के बीच फायरिंग की घटना हुई थी। पुलिस के अनुसार मोटरसाइकिल पर सवार तीन युवकों ने घर के मुख्य गेट के सामने पहुंचकर गोलियां चलाईं और मौके से फरार हो गए। घटना के समय गुलाब सिद्धू घर पर मौजूद नहीं थे और विदेश में थे, जबकि उनके परिवार के सदस्य घर के अंदर मौजूद थे। फायरिंग में किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं थी, जबकि गोलियां घर के गेट को लगी थीं।
घटना के बाद सामने आए सी.सी.टी.वी. फुटेज में कथित तौर पर मोटरसाइकिल पर सवार 3 युवक दिखाई दिए थे। पुलिस ने फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान और उनकी गतिविधियों का पता लगाने के लिए जांच शुरू की थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने आसपास के सी.सी.टी.वी. कैमरों की फुटेज तथा मोबाइल टावर डंप डेटा की भी जांच की थी।
फायरिंग के मामले में पुलिस पहले ही कई आरोपियों को कर चुकी गिरफ्तार
बरनाला पुलिस ने बाद में इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार जांच के दौरान कुछ संदिग्धों को पकड़ने के बाद उनसे पूछताछ की गई और कथित तौर पर सामने आए सुरागों के आधार पर अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की गई। 22 सितंबर को पुलिस ने मामले से जुड़े संदिग्धों को पकड़ने की कार्रवाई के दौरान मुठभेड़ की जानकारी भी दी, जिसमें एक व्यक्ति के पैर में गोली लगने तथा दूसरे के घायल होने की बात सामने आई।
पुलिस के अनुसार इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों से हथियार और अन्य सामान की बरामदगी भी की गई है तथा कथित तौर पर विदेश में बैठे आपराधिक तत्वों से उनके संपर्कों की जांच की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों और आरोपियों की भूमिका का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होना है।
पहले भी मिलती रही थीं गुलाब सिद्धू को धमकियां
पुलिस के अनुसार गुलाब सिद्धू को इससे पहले भी धमकियां मिल चुकी थीं। इन्हीं धमकियों को देखते हुए उनकी सुरक्षा के लिए दो पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। फायरिंग की घटना के समय भी उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर पुलिस ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई थी। इससे पहले जनवरी 2026 में भी गुलाब सिद्धू को कथित तौर पर निशाना बनाने की साजिश के मामले में पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस जांच में उस मामले में गांव कोटदूना के सरपंच बलजिंदर सिंह उर्फ किंदा समेत कुछ अन्य लोगों की भूमिका सामने आने का दावा किया गया था। पुलिस के अनुसार गुलाब सिद्धू के एक गीत को लेकर कथित विवाद के बाद उन्हें धमकियां दी गई थीं और एक कार्यक्रम के दौरान हमला करने की योजना बनाए जाने का आरोप था।
सौदागर सिंह का नाम खन्ना के मामलों में भी आया था
सौदागर सिंह इससे पहले खन्ना क्षेत्र में दर्ज फायरिंग और कथित फिरौती से जुड़े मामलों में भी पुलिस कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। मई 2026 में खन्ना के प्रेम वैष्णो ढाबे पर हुई फायरिंग और कथित रंगदारी मांग के मामले में पुलिस ने सौदागर सिंह और उनकी पत्नी दलजीत कौर को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उस समय दावा किया था कि जांच के दौरान दोनों के विदेश में रह रहे उनके बेटे शगनप्रीत सिंह तथा कथित वारदात से जुड़े लोगों के साथ संपर्क सामने आए थे। हालांकि, इन मामलों में पुलिस के आरोपों को न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता। संबंधित मामलों में अदालतों में हुई कार्यवाही और जमानत आदेशों के अनुसार आरोपों का अंतिम निर्धारण अभी न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।
हाईकोर्ट ने हाल ही में 3 FIR की जांच की निगरानी डी.आई.जी. स्तर के अधिकारी को सौंपी
गौरतलब है कि शगनप्रीत सिंह के माता-पिता दलजीत कौर और सौदागर सिंह ने खन्ना क्षेत्र में दर्ज विभिन्न FIR और पुलिस कार्रवाई को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट ने हाल ही में FIR नंबर 67, 90 और 101 की जांच की निगरानी के लिए डी.आई.जी. या उससे ऊपर के रैंक के ऐसे वरिष्ठ आई.पी.एस. अधिकारी की नियुक्ति के निर्देश दिए थे, जो इन मामलों की प्रत्यक्ष जांच से जुड़ा न हो। अदालत ने जांच को सी.बी.आई. को सौंपने या अलग एस.आई.टी. गठित करने की मांग फिलहाल स्वीकार नहीं की थी, लेकिन जांच की निष्पक्षता, वस्तुनिष्ठता और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी का आदेश दिया था। अदालत ने डी.वी.आर., एफ.एस.एल. रिपोर्ट, सी.सी.टी.वी. फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा उनकी विधि के अनुसार जांच करने के निर्देश भी दिए थे।
पुलिस जांच में शगनप्रीत के परिवार तक पहुंची कार्रवाई
सौदागर सिंह की मौजूदा गिरफ्तारी के बाद गुलाब सिद्धू फायरिंग मामले की जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू शगनप्रीत सिंह के परिवार से जुड़ गया है। हालांकि, पुलिस ने सौदागर सिंह की इस मामले में सटीक भूमिका के संबंध में जांच पूरी होने से पहले कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार उनसे फायरिंग की घटना को लेकर पूछताछ की जा रही है और उनकी भूमिका जांच के बाद स्पष्ट होने की बात कही गई है। मामले में पुलिस द्वारा पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों, कथित हथियारों, सी.सी.टी.वी. फुटेज, मोबाइल तकनीकी साक्ष्यों तथा अन्य कड़ियों को जोड़कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस का प्रयास है कि फायरिंग की पूरी साजिश, हमलावरों तक पहुंचने वाली कड़ियों और वारदात के पीछे कथित मकसद का पता लगाया जा सके।
गिरफ्तारी का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं
कानूनी रूप से सौदागर सिंह की गिरफ्तारी को उनके खिलाफ आरोपों का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। पुलिस पूछताछ और जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई होगी। इसके बाद अदालत के समक्ष पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर ही न्यायिक स्तर पर आरोपों की पुष्टि या अस्वीकृति का निर्धारण होगा।