विज्ञापन नियम तोड़ने वालों पर शिकंजे की तैयारी, निगम कमिश्नर ने Jalandhar CP को लिखा पत्र

Edited By Kamini,Updated: 08 Oct, 2026 10:42 AM

illegal flex from unipoles installed in the city

शहर के 100 से ज्यादा यूनिपोल्स पर लगे अवैध राजनीतिक और धार्मिक फ्लैक्स अब जालंधर नगर निगम के लिए बड़ा आर्थिक और कानूनी मुद्दा बनते जा रहे हैं।

जालंधर (खुराना): शहर के 100 से ज्यादा यूनिपोल्स पर लगे अवैध राजनीतिक और धार्मिक फ्लैक्स अब जालंधर नगर निगम के लिए बड़ा आर्थिक और कानूनी मुद्दा बनते जा रहे हैं। नगर निगम की विज्ञापन शाखा की रिपोर्ट के आधार पर निगम कमिश्नर सुरिंदर सिंह ने अब जालंधर के पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर यूनिपोल्स पर लगे अवैध फ्लेक्स और विज्ञापनों को हटाने के लिए विज्ञापन ठेका लेने वाली कंपनी को पुलिस सहायता उपलब्ध करवाने की मांग की है। साथ ही अवैध रूप से फ्लेक्स लगाने वालों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई करने को भी कहा गया है।

यह मामला उस समय गंभीर हुआ था जब शहर के यूनिपोल्स पर बड़ी संख्या में राजनीतिक और धार्मिक फ्लैक्स लगाए जाने के कारण विज्ञापन ठेका लेने वाली कंपनी क्रिएटिव के क्लाइंट्स के विज्ञापन हटाए या ढक दिए गए। कंपनी ने निगम को स्पष्ट किया था कि यदि उसे यूनिपोल्स पर अपने क्लाइंट्स के विज्ञापन लगाने की जगह नहीं मिलती तो उसके लिए निगम को हर महीने किए जाने वाले करीब 1.40 करोड़ रुपए के भुगतान को जारी रखना मुश्किल होगा।

गौरतलब है कि क्रिएटिव कंपनी ने शहर के विज्ञापन ठेके का कॉन्ट्रैक्ट करीब 13.71 करोड़ रुपए में हासिल किया था और इंफ्रास्ट्रक्चर पर करीब 15 करोड़ खर्च किए थे । इसके तहत कंपनी द्वारा निगम को टैक्स सहित हर महीने करीब 1.40 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाना है। कंपनी का कहना था कि जब यूनिपोल्स पर अवैध फ्लेक्स लगे रहेंगे और उसके क्लाइंट्स के विज्ञापन नहीं लग पाएंगे तो उसके लिए तय मासिक भुगतान करना आर्थिक रूप से मुश्किल होगा।

इसी मामले में कंपनी ने गत माह निगम को तीन दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि यदि यूनिपोल्स से अवैध फ्लैक्स हटाकर उसे विज्ञापन लगाने की जगह उपलब्ध नहीं करवाई गई तो वह निगम को मासिक भुगतान करने में असमर्थ हो सकती है। कंपनी ने इस मामले को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का रुख करने की बात भी कही थी। कंपनी के अल्टीमेटम की अवधि 24 सितम्बर को समाप्त हो गई थी। इसके बाद निगम प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विज्ञापन शाखा से रिपोर्ट मांगी। अब विज्ञापन शाखा की रिपोर्ट के आधार पर निगम कमिश्नर की ओर से पुलिस कमिश्नर को पत्र भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि यूनिपोल्स पर नियमों के विपरीत लगाए गए फ्लैक्स और विज्ञापनों को हटाने के लिए विज्ञापन ठेका लेने वाली कंपनी को पुलिस की सहायता दी जाए, ताकि अधिकृत विज्ञापन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाया जा सके।

अब निगम प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ यूनिपोल्स से अवैध फ्लेक्स हटाकर विज्ञापन ठेका लेने वाली कंपनी को उसके अधिकार क्षेत्र में विज्ञापन लगाने की जगह उपलब्ध करवाना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ कंपनी की ओर से मासिक करीब 1.40 करोड़ रुपए के भुगतान को लेकर उठाए गए सवाल और हाईकोर्ट जाने के अल्टीमेटम के कारण निगम पर आर्थिक और कानूनी दबाव भी बना हुआ है। पुलिस को भेजे गए पत्र के बाद अब देखना होगा कि यूनिपोल्स पर लगे अवैध फ्लैक्स हटाने के लिए पुलिस और निगम की ओर से संयुक्त रूप से क्या कार्रवाई की जाती है। यदि अवैध फ्लैक्स नहीं हटे और कंपनी अपने विज्ञापन लगाने में असमर्थ रही तो निगम के राजस्व पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है।

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