सरकारी अस्पतालों की हालत खराब, निजी अस्पतालों पर आश्रित

Edited By Updated: 03 Dec, 2016 01:32 PM

swine flu

स्वाइन फ्लू की भावी आशंका को देखते हुए पंजाब सरकार ने गाइडलाइन जारी करके सभी अस्पतालों को सतर्क रहने को कहा है।

लुधियाना(सहगल): स्वाइन फ्लू की भावी आशंका को देखते हुए पंजाब सरकार ने गाइडलाइन जारी करके सभी अस्पतालों को सतर्क रहने को कहा है। इनमें सरकारी व निजी अस्पतालों को आइसोलेशन वार्ड बनाने तथा वैंटीलेटरों की व्यवस्था करने को कहा गया है परंतु दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों वैंटीलेटरों की व्यवस्था की हालत काफी खराब है। सूत्रों की मानें तो अधिकांश सरकारी अस्पतालों में वैंटीलेटरों की समुचित व्यवस्था नहीं है। वहीं अधिकांश वैंटीलेटर या तो खराब हैं या उन्हें चलाने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ नहीं हैं। इसके अलावा सरकारी अस्पताल डाक्टरों तथा स्टाफ की कमी से भी जूझ रहे हैं। 

 

सिर्फ सी कैटागरी मरीजों की होगी जांच, मिलेगी दवा : स्वाइन फ्लू के गम्भीर मरीजों को ही दवा देने व जांच करने के लिए कहा गया है। यानी जब मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगे, छाती में दर्द शुरू हो जाए, ब्लड प्रैशर कम हो जाए, थूक में खून आने लगे, नाखूनों का रंग नीला पडऩे लगे तभी उसे अस्पताल में भर्ती करने तथा टैस्ट व दवा देने को कहा गया है। यानी बुखार, खांसी, गला खराब, शरीर दर्द, डायरिया तथा सिरदर्द होने पर साधारण दवाइयों से उपचार किया जाए, ऐसे मरीजों को स्वाइन फ्लू की आशंका होने पर डाक्टर की देखरेख में घर पर रखा जाए तथा उसे अन्य पारिवारिक सदस्यों से दूरी बनाकर रखने को कहा जाए। ऐसे मरीजों की स्वाइन फ्लू की जांच न कराने को कहा गया है। इसी तरह कैटागरी बी (1) तथा बी (2) के मरीजों जिनके बच्चे, गर्भवती महिलाएं, 65 वर्ष से ऊपर मरीज, छाती, फेफड़ों, हार्ट, लिवर, किडनी, मधुमेह तथा ब्लड डिसऑर्डर के मरीजों को भी स्वाइन फ्लू के लक्षण होने पर दवा व टैस्ट से महरूम रखने को कहा गया है यानी स्वाइन फ्लू की दवा खाने के लिए मरीज का गम्भीर होना जरूरी है।
 

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