SYL चैप्टर क्लोज अब न तो जमीन का मसला रहा, न पानी का: सुखबीर

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Thursday, November 17, 2016-2:05 AM

चंडीगढ़ (अश्वनी): पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के बाद बुधवार को उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए सतलुज-यमुना लिंक नहर पर अंतिम निर्णय सुना दिया है। पंजाब कैबिनेट ने मंगलवार को एस.वाई.एल. की नहर डी-नोटिफाई कर ट्रांसफर कर दी है। अब विधानसभा ने एस.वाई.एल. का चैप्टर ही क्लोज कर दिया है। इस दौरान उन्होंने कई सवालों के खुलकर जवाब दिए।

 

सवाल- अगर विधानसभा ने चैप्टर क्लोज कर दिया है तो पंजाब कैबिनेट राष्ट्रपति से मिलने का समय क्यों मांग रही है? 

जवाब- हमारी कोशिश विधानसभा के निर्णय के बारे में राष्ट्रपति को अवगत करवाना है और यह बताना है कि राष्ट्रपति की तरफ से सुप्रीम कोर्ट से जिन 4 पहलुओं पर राय मांगी गई थी, सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में उन पहलुओं को तवज्जो नहीं दी इसलिए हम राष्ट्रपति को कहना चाहते हैं कि पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से सहमत नहीं है। 

 

सवाल- राष्ट्रपति से कब मुलाकात तय हुई है? 
जवाब- हमने समय मांगा है, जब भी मिलेगा हम उनके पास पहुंच जाएंगे। 

 

सवाल- पंजाब की तर्ज पर हिमाचल भी रॉयल्टी मांगने लगेगा तो 
क्या होगा?

जवाब- पंजाब रिपेरियन राज्य है, जहां नदियां प्राकृतिक बहाव में बहती हैं। इस बहाव को कोई नहीं रोक सकता है। अगर हिमाचल प्राकृतिक बहाव को रोकता है तो वह डूबने की कगार पर पहुंच जाएगा। भारत सरकार की पॉलिसी के मुताबिक प्राकृतिक स्रोत यानी जिस राज्य के पास खनिज भंडार हैं वहां अगर उनका दोहन होता है तो उसका बनता हिस्सा उस राज्य को मिलता है। पंजाब के पास पानी प्राकृतिक संपदा है।

 

सवाल- क्या एस.वाई.एल. पर प्रस्ताव की बजाय बिल लाना ज्यादा कारगर होता? 

जवाब- यह प्रस्ताव नहीं है बल्कि विधानसभा की तरफ से जारी निर्देश व हिदायत है। ये निर्देश बिल से कहीं ज्यादा शक्तिशाली हैं। यह ज्यादा कारगर हथियार है जिसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता। अगर कोई उल्लंघन करता है तो इसे विधानसभा के निर्देश का उल्लंघन माना जाएगा। इन निर्देशों का कानूनी पहलू यह है कि अवहेलना करने वाले सलाखों के पीछे होंगे।

 

सवाल- यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के यथास्थिति बनाए रखने के आदेशों की अवहेलना माना जाएगा? 
जवाब- सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई निपटा दी है इसलिए यथास्थिति का तो सवाल ही 
नहीं रहा। 

 

सवाल- अगर सुप्रीम कोर्ट विधानसभा के निर्देशों पर भी चीफ सैक्रेटरी को यथास्थिति बहाल रखने के आदेश जारी कर देता है तो पंजाब का क्या स्टैंड होगा?

जवाब- सरकार ने तो अब एस.वाई.एल. नहर के अधिगृहीत हिस्से को ही डी-नोटिफाई कर दिया है। पहले सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही थी लेकिन अब तो सुनवाई खत्म हो चुकी है इसलिए सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का सवाल ही नहीं उठता। मौजूदा समय में कोई यथास्थिति जैसी हालत नहीं है। सरकार ने जमीन को डी-नोटिफाई कर दिया है, लैंड ट्रांसफर का नोटीफिकेशन जारी हो चुका है। अब न जमीन का मसला है, न पानी का। 

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