जेबों में नोट फिर भी मरीज नहीं करवा पा रहे इलाज

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Monday, November 14, 2016-1:00 PM

फगवाड़ा (जलोटा): नोटबंदी के कारण फगवाड़ा में रविवार को छुट्टी वाले दिन भी खुले रहे बैंकों के बाहर लोगों की लम्बी कतारें लगी रहीं। यही हालात ए.टी.एम्स. कक्षों का रहा, कुछ मशीनें बैंक खुलने के कुछ समय बाद कैशलैस हो गईं। फगवाड़ा में लोगों का सब्र टूटने लगा है। 

लोगों ने कहा कि अब उनके घरों व जेबों में नकदी नहीं बची है। इस कारण वे बाजार से जरूरी खाद्य वस्तुएं नहीं खरीद पा रहे हैं। इसी तर्ज पर महिलाओं काजोल, सोनाली, रूपसी, विद्या, गीतांजलि, महिमा व कामिनी आदि ने कहा कि इस बात को वे चाहकर भी कभी भूल नहीं सकतीं। मोदी सरकार ने डिक्टेटर बनकर उनकी वर्षों की जमा पूंजी को एक मायने में साफ कर डाला है।
इस दौरान फगवाड़ा में सबसे ज्यादा दु:खी वे लोग दिखे, जिनके परिजन निजी अस्पतालों में उपचाराधीन चल रहे हैं।

लोगों ने कहा कि उनके पास 500-1000 के नोट हैं, लेकिन वे अपने परिजनों का उपचार नहीं करवा पा रहे हैं? विवाह की तिथि तय है, जेब में 500-1000 रुपए के नोट हैं, लेकिन वे मायूस हैं क्योंकि ये बाजार में स्वीकार नहीं हो रहे हैं। छोटे दुकानदार व व्यापारी अपनी मजबूरी का हवाला दे रहे हैं। वहीं विदेशों से फगवाड़ा पहुंचे हुए अनेक आप्रवासी भारतीय भी बेहद परेशान पाए गए। इन्होंने तर्क दिया कि उनकी जेब में करंसी तो है, लेकिन नई भारतीय करंसी नहीं है। उनको कुछ शातिर लोग ओने-पौने दामों पर नई करंसी दिलाने की बातें कर रहे हैं, लेकिन यह तरीका गलत है। 

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