10 लाख की हेल्थ स्कीम पर उठे सवाल, Sukhpal Khaira ने CM भगवंत मान को पत्र लिख मांगा जवाब

Edited By Kamini,Updated: 20 Feb, 2026 11:36 AM

sukhpal khaira wrote a letter to cm bhagwant mann

पंजाब सरकार की बहुचर्चित 10 लाख रुपए स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर सियासत तेज हो गई है।

पंजाब डेस्क : पंजाब सरकार की बहुचर्चित 10 लाख रुपए स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक सुखपाल खैहरा ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को पत्र लिखकर योजना के दायरे और लागू करने की प्रक्रिया पर स्पष्टता मांगी है। इस पत्र की प्रति स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बलबीर सिंह को भी भेजी गई है।

खैरा ने इस स्कीम के असल दायरे और कवरेज को लेकर गंभीर चिंता जताई है और सरकार से तुरंत क्लैरिटी मांगी है। खैहरा ने पत्र में कहा कि इस स्कीम को पंजाब के लोगों, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोगों के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर पेश किया गया है। लेकिन, इसके असल दायरे और कवरेज को लेकर आम जनता, हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स और मरीजों के बीच गंभीर चिंताएं और कन्फ्यूजन पैदा हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि 2,356 बीमारियों के लिए अलग-अलग पैकेज रेट तय हैं, तो इलाज की वास्तविक लागत अधिक होने पर क्या मरीजों को अतिरिक्त राशि खुद चुकानी पड़ेगी? सुखपाल खैहरा ने सवाल उठाया कि अगर किसी बीमारी के इलाज का खर्च इस तय लिमिट से ज़्यादा हो जाता है, तो क्या मरीज को बाकी पैसे अपनी जेब से देने होंगे? उनके मुताबिक, अगर मरीज को पैसे देने पड़े, तो इससे 10 लाख रुपये तक के कैशलेस हेल्थ कवरेज का असली मकसद ही खत्म हो जाएगा।

क्या हैं मुख्य सवाल?

विधायक ने अपने पत्र में सरकार से 5 अहम बिंदुओं पर जवाब मांगा है:

  • क्या 10 लाख रुपए की राशि सालाना पारिवारिक सीमा है या फिर हर बीमारी के लिए अलग पैकेज कैप लागू होगा?
  • यदि अस्पताल का बिल तय पैकेज रेट से अधिक आता है, तो क्या मरीज को जेब से भुगतान करना होगा?
  • 2,356 उपचारों के लिए तय पैकेज रेट किस आधार पर निर्धारित किए गए हैं, खासकर गंभीर बीमारियों के मामले में?
  • निजी अस्पतालों द्वारा अतिरिक्त भुगतान मांगने या इलाज से इंकार करने से कैसे रोका जाएगा?
  • क्या पंजाब के सरकारी और निजी अस्पताल इस योजना को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं?

प्रचार पर भी उठाए सवाल

खैहरा ने यह भी कहा कि योजना का देशभर में विज्ञापनों के जरिए व्यापक प्रचार किया जा रहा है, जिससे यह एक राष्ट्रीय पहल होने का आभास होता है। उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए पारदर्शिता और प्रभावी क्रियान्वयन को प्राथमिकता देने की बात कही। विधायक ने सरकार से अपील की है कि योजना के सभी प्रावधान सार्वजनिक किए जाएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी मरीज को अतिरिक्त खर्च का बोझ न उठाना पड़े। अब इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है, क्योंकि स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर जनता के बीच स्पष्टता और भरोसा बेहद जरूरी माना जा रहा है।

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