बहुमंजिला कमर्शियल बिल्डिंगें निगम की कार्रवाई के राडार पर

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Monday, September 25, 2017-11:56 AM

पठानकोट (शारदा): नियमों को छीकें पर टांगकर व निर्धारित मापदंडों की उल्लंघना करके नगर में पिछले 3-4 वर्षों से अस्तित्व में आई कमर्शियल इमारतें इन दिनों कॉर्पोरेशन के राडार पर हैं। इसकी जद में आने वाले भवन निर्माताओं की जान सांसत में है वहीं दूसरी ओर निगम हर रोज इन इमारतों के मालिकों को धड़ाधड़ ‘डिमॉलेशन नोटिस’ भेज रहा है। 

जानकारी अनुसार नियमों व मापदंडों के विरुद्ध जाकर बनाई गई करीब 139 कमॢशयल इमारतें प्रशासन की ओर से आगामी समय में की जाने वाली कार्रवाई की जद में हैं। इनमें कई नामवर होटल, शोरूम, मॉल व अन्य व्यापारिक केन्द्र भी शामिल हैं जिन पर किसी भी समय प्रशासन की गाज गिर सकती है। ऐसे में इन भवन निर्माताओं में अफरी-तफरी का माहौल है। 

वर्णनीय है कि उपरोक्त मामला जहां माननीय न्यायालय में विचाराधीन है वहीं नई सरकार बनने के बाद भी क्षेत्र में अब तक करीब 2 दर्जन नई कमॢशयल बिल्डिंगें अस्तित्व में आ चुकी हैं। ये इमारतें भी प्रशासन के रॉडार पर हैं। ऐसे में नवनिर्मित इमारतों के मालिकों के सिर पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। जब इन बिल्डिंगों का रियल्टी चैक की गई तो पाया गया कि अधिकांश भवन निर्माताओं ने पड़ोसियों से एन.ओ.सी. नहीं ली हुई तथा न ही निर्धारित रकबा खाली छोड़ा गया है। ऐसे में स्पष्ट है कि निर्धारित मापदंडों की अवहेलना करके ही ये इमारतें अस्तित्व में आई हैं।

क्या है मामला
वर्णनीय है नगर के ढांगू रोड पर स्थित बहुमंजिला इमारत को लेकर माननीय हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी जिसमें उक्त बहुमंजिला इमारत को नियमों के विरुद्ध निर्मित किए जाने की बात याचिका में कही गई थी। इसके बाद ‘रंझू निझावन बनाम नरेश कुमार’ मामले की सुनवाई दौरान हाईकोर्ट ने स्थानीय नगर निगम को आदेश दिए थे कि वर्ष 2013 के बाद में अस्तित्व में आई नगर की बिल्डिंगें, जो नियमों के विरुद्ध बनी हैं या निर्धारित मापदंड पूरे नहीं करती हैं, के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

हाईकोर्ट से 31 अगस्त को कॉर्पोरेशन को आदेश मिलने के बाद कॉर्पोरेशन ने करीब 139 कमर्शियल  बिल्डिंगों के विरुद्ध प्रारम्भिक कार्रवाई करते हुए ‘डिमॉलेशन नोटिस’ भेजने की कवायद शुरू कर दी, जो अब तेजी पकड़ चुकी है तथा नोटिस भेजने का काम अंतिम चरण में है। कॉर्पोरेशन को यह कवायद 26 सितम्बर तक पूरी करनी है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितम्बर को है। इसके बाद माननीय उच्च न्यायालय अगली कार्रवाई का क्या आदेश देता है, इस पर कॉर्पोरेशन का रुख निर्भर करेगा अन्यथा इन इमारतों पर देर-सबेर गाज गिरनी तय है।

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