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आसमानी बिजली की चपेट में आने से मजदूर की मौत

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Monday, February 12, 2018-2:45 PM

होशियारपुर  (अमरेन्द्र मिश्रा): शहर के फगवाड़ा रोड के साथ लगते गांव साहरी में सोमवार सुबह 8.30 बजे के करीब आसमानी बिजली की चपेट में आने से 42 वर्षीय मजदूर चंद्रवीर कश्यप की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के समय मृतक चंद्रवीर कश्यप पुत्र पंचमलाल मूल निवासी गांवसंगतारा थाना वजीरगंज जिला बदायूं(यू.पी.) अपनी पत्नी, भाभी व बेटियों के साथ साहरी गांव के बाहर पशु के लिए खेत में चारा काट रहा था। परिजनों ने तत्काल ही हादसे की सूचना गांव के लोगों व थाना मेहटियाना पुलिस को दे दी। सूचना मिलते ही ए.ए,आई.बलविन्द्र सिंह पुलिस पार्टी के साथ मौके पर पहुंच शव का पंचनामा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल पहुंचा दिया।

 

कैसे आया आसमानी बिजली की चपेट में
मृतक चंद्रवीर कश्यप की पत्नी ओमवती, दोनों ही बेटियां रेखा व छोटी के साथ बड़े भाई जयपाल कश्यप ने बताया कि सुबह आसमान में बादल छाए रहने के बीच रुक रुक कर बारिश हो रही थी। तेज गरज और चमक के साथ बारिश होने के दौरान हमलोग खेत में चारा काट रहे थे। चंद्रवीर अपनी मोबाइल पर किसी से बात कर रहा था कि इसी दौरान साढ़े 8 बजे आसमानी बिजली कहर बनकर चंद्रवीर को अपनी चपेट में ले लिया। परिजनों के अनुसार बिजली कडक़ने की जोरदार आबाज के साथ ही चंद्रवीर को चकराते हुए जमीन पर गिरते देख समझ गए कि वह आसमानी बिजली की चपेट में आ गया है।

 

क्या कहते हैं जांच अधिकारी
सिविल अस्पताल के शवघर के बाहर मामले की जांच कर रहे ए.एस.आई.बलविन्द्र सिंह ने बताया कि मृतक चंद्रवीर की पत्नी ओमवती के बयान के आधार पर पुलिस शव का पोस्टमार्टम करने के पश्चात पुलिस धारा 174 के अधीन कार्रवाई कर शव परिजनों को सौंप दिया गया।

 
आसमान में बिजली कड़कते ही हो जाएं सावधान
बारिश या मानसून में बिजली कड़कना या गिरना आम बात है। इससे बचने के लिए स्वयं की सावधानी ही जान बचा सकती है। हालांकि आपदा विभाग द्वारा लोगों को जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष प्रचार-प्रसार कराया जाता है। लेकिन लोग बारिश के दौरान पेड़ के नीचे छुप जाते हैं। जिससे आकाशीय बिजली के चपेट में वे आ जाते हैं। आसमानी बिजली गिरने की घटना को लोग प्राकृतिक घटना मानकर इस पर ज्यादा कुछ कहने में खुद से समझौता कर लेते हैं। कोई भी बिजली गिरना या कडक़ना तो नहीं रोक सकता हैं, लेकिन कुछ सावधानियां बरत कर कम से कम इससे होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम जरूर कर सकता है।

 

क्यों गिरती है आकाशीय बिजली
जानकार बताते हैं कि आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आसमान में किसी तरह का कंडक्टर न होने से बिजली धरती पर कंडक्टर की तलाश में पहुंच जाती है, जिससे नुकसान पहुंचता है। धरती पर पहुंचने के बाद बिजली को कंडक्टर की जरूरत पड़ती है। लोहे के खंभों के अगल-बगल से जब आकाशीय बिजली गुजरती है तो वह कंडक्टर का काम करता है। उस समय कोई व्यक्ति यदि उसके संपर्क में आता है तो उसकी जान तक जा सकती है। बिजली चमकने के 10 सैंकेंड के बाद उसकी आवाज हमें सुनाई देती है।

 

खराब हो जाते हैं टिशूज, शरीर पर पड़ता है प्रभाव
आसमान से गिरने वाली बिजली का असर मानव शरीर पर कई गुना होता है। गंभीर बर्न होने से टिशूज खराब हो जाते हैं। उन्हें आसानी से ठीक नहीं किया जा सकता है। बिजली का असर नर्वस सिस्टम पर पड़ता है और हार्ट अटैक होने से मौत हो जाती है। इसके असर से शारीरिक अपंगता का खतरा होता है। बिजली गिरने के दौरान सीधे संपर्क में आने वाले अधिकतर लोगों की मौत हो जाती है।

 

इस तरह से बरतें सावधानी
आंधी तूफान आते ही घर में रखे टीवी, रेडियो, कम्प्यूटर सहित सभी का मोडम और विद्युत प्लग निकाल देना चाहिए। अगर बादल गरज रहे हों, और आपके रोंगटे खड़े हो रहे हैं तो ये इस बात का संकेत है कि बिजली गिर सकती है। ऐसे में नीचे दुबक कर पैरों के बल बैठ जाएं व अपने हाथ घुटने पर रख लें और सर दोनों घुटनों के बीच। इस मुद्रा के कारण आपका जमीन से कम से कम संपर्क होगा। लोहे की डंडे वाली छतरी या मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करे क्योंकि धातु के जरिए बिजली आपके शरीर में घुस सकती है। 
 

 

 

 

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