Edited By Subhash Kapoor,Updated: 08 Oct, 2026 11:13 PM

जिला गुरदासपुर में धान की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कृषि विभाग और जिला प्रशासन की ओर से लगातार किए जा रहे प्रयासों के बावजूद, अब प्रशासन ने खेतों में आग लगाने वाले किसानों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।
गुरदासपुर (विनोद):जिला गुरदासपुर में धान की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कृषि विभाग और जिला प्रशासन की ओर से लगातार किए जा रहे प्रयासों के बावजूद, अब प्रशासन ने खेतों में आग लगाने वाले किसानों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। लगातार जागरूकता बढ़ाने, ट्रेनिंग देने और पराली प्रबंधन के लिए सबसिडी पर आधुनिक कृष मशीनरी देने के बावजूद अगर कोई किसान खेतों में आग लगाता है, तो उसके खिलाफ संबंधित धाराओं और नियमों के तहत एफ.आई.आर. दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डिप्टी कमिश्नर आदित्य उप्पल के नेतृत्व में जिला प्रशासन पिछले दो महीनों से पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए एक विशेष अभियान चला रहा है। कृषि और किसान कल्याण विभाग सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों की टीमें बनाकर उन्हें ट्रेनिंग दी गई है ताकि वे खेत में किसानों से संपर्क कर उन्हें पराली प्रबंधन के बारे में जागरूक कर सकें। इसके साथ ही, जिले के अलग-अलग गांवों में कैंप लगाकर किसानों को पराली न जलाने और उसके सही मैनेजमेंट के बारे में जानकारी दी जा रही है।
पराली मैनेजमेंट के लिए सरकार ने किसानों को सबसिडी पर मॉडर्न खेती की मशीनें भी दी हैं। बताया गया है कि जिले में करीब 10 हजार मशीनें 80 प्रतिशत सबसिडी पर दी गई हैं। इन मशीनों की मदद से किसान न सिर्फ खेतों में पराली का मैनेजमेंट कर रहे हैं, बल्कि उसे इकटट्ठा करके गांठें भी बना रहे हैं। कई किसान अपने खेतों के साथ-साथ दूसरे किसानों के खेतों से भी पराली इकट्ठा करके कमाई कर रहे हैं।
सुपर सीडर जैसी मशीनों के इस्तेमाल से पराली को खेत में ही मिलाकर गेहूं की बुआई की जा सकती है। इस तरह, एक तरफ तो पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ती, वहीं दूसरी तरफ फसल के बचे हुए हिस्से खेत की मिट्टी में मिल जाने से मिट्टी की क्वालिटी और बनावट को भी बेहतर बनाने में मदद मिलती है। इससे खेती की लागत कम होने के साथ-साथ खाद और खेती के दूसरे खर्चों में भी बचत हो सकती है।
प्रशासन ने ज़मीनी स्तर पर पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिले के लगभग हर गाँव में नोडल अफ़सर भी तैनात किए हैं। ये अफ़सर किसानों से संपर्क करके उन्हें पराली न जलाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, साथ ही उपलब्ध मशीनरी और पराली प्रबंधन के अलग-अलग तरीकों के बारे में जानकारी भी दे रहे हैं। इसके बावजूद अगर कोई किसान खेत में आग लगाता है, तो अब उसके खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं।