Edited By Vatika,Updated: 02 Apr, 2025 11:42 AM

इन क्षेत्रों के बारे में हर 15 दिन बाद रिपोर्ट स्वास्थ्य निदेशालय भेजी जाए इसके अलावा
लुधियाना (सहगल): गर्मी के मौसम के आगमन के साथ-साथ पीने के पानी से होने वाली बीमारियों के खतरे के आसार भी बढ़ गए हैं, इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग में सभी जिलों के सिविल सर्जनों को सचेत करते हुए आवश्यक प्रबंध करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष में राज्य के विभिन्न जिलों में पीने के पानी के दूषित होने के कारण 17 जगह पर मारामारी के हालात पैदा हुए जिनमें से 8 जगहों पर हालत काफी गंभीर दिखे 6 जगह पर हैजा तथा तीन जगह पर हैपेटाइटिस ए के मरीज सामने आए।
हाई रिस्क एरिया की निशानदेही करने को कहा
स्वास्थ्य विभाग में सिविल सर्जनों को आगाह करते हुए कहा है कि उनके जिलों में जहां पहले पीने के पानी से होने वाली बीमारियों के मरीज सामने आ चुके हैं, उन इलाकों की सूची बनाई जाए। इसके अलावा जिन इलाकों के पानी के सैंपल फेल हुए हैं, उन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के बारे में हर 15 दिन बाद रिपोर्ट स्वास्थ्य निदेशालय भेजी जाए इसके अलावा इन इलाकों की निरंतर निगरानी रखी जाए।
पानी के सैंपल लेने के निर्देश
स्वास्थ्य निदेशक ने निर्देश देते हुए कहा कि हाई रिस्क क्षेत्रों से विभिन्न स्रोतों से पानी के सैंपल लिए जाएं, पानी के सैंपलों को स्टेट पब्लिक हेल्थ लैबोरेटरी खरड़ में जांच के लिए भेजा जाए। उन्होंने कहा कि इन पानी को कीटाणु मुक्त कांच की बोतलों में भर जाए और निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत ही लैब में भेजा जाए। इन सैंपलों की रिपोर्ट को स्टेट हैडक्वार्टर भेजा जाना यकीन ही बनाया जाए। इसके अलावा अधिकारियों को चाहे कि वह सरकारी और निजी अस्पतालों से संपर्क कायम रखें, अगर वहां पर कोई पेयजल जनित रोग से ग्रस्त मरीज आते हैं तो वह तुरंत स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट करें। अस्पतालों में क्लोरीन की गोलियां, ओ.आर.एस., इंट्रावेनस फ्लुडस तथा अन्य आवश्यक दवाइयों का स्टॉक रखा जाए। इसके अलावा आई.डी.एस.पी. लैब को को भेजो तथा अन्य पेयजल जनित रोगों की जांच के लिए तैयार रखा जाए।
स्थानीय विभागों से रखे तालमेल
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया की दिशा-निर्देशों में स्थानीय विभागों में नगर निगम तथा वाटर सप्लाई तथा सैनीटेशन विभाग शामिल है। तालमेल रखना कहीं पर आऊटब्रेक होने पर पानी का वैकल्पिक प्रबंध तथा अगर दूषित पेयजल सप्लाई का कारण पानी की पाइपलाइन के टूटे होने का पता चलता है तो उसे रिपेयर कराया जाए ताकि बीमारी और अधिक न फैले इसमें संबंधित विभागों का सहयोग लिया जा सकता है।