गांवों की छोटी सड़कों पर भारी ट्रकों की आवाजाही का विरोध, प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी

Edited By Kalash,Updated: 05 Sep, 2026 01:59 PM

heavy trucks on village roads

जम्मू-कश्मीर से रेत-बजरी से भरे भारी वाहनों के बमियाल इलाके के गांवों को जोड़ने वाले छोटे रास्तों के जरिए पंजाब में दाखिल होने के मामले को लेकर इलाका वासियों में रोष भड़क उठा।

बमियाल (हरजिंदर सिंह गोराया): जम्मू-कश्मीर से रेत-बजरी से भरे भारी वाहनों के बमियाल इलाके के गांवों को जोड़ने वाले छोटे रास्तों के जरिए पंजाब में दाखिल होने के मामले को लेकर इलाका वासियों में रोष भड़क उठा। बीती रात लोगों ने बड़ी संख्या में रेत और बजरी से लदे ट्रकों को रोक दिया। इस दौरान मगवाल मोड़ से रमकालमा गांव तक करीब 100 ट्रक खड़े रहने की बात सामने आई है।

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पंजाब सरकार, पुलिस प्रशासन और कथित माइनिंग माफिया के खिलाफ नारे लगाकर भारी वाहनों की आवाजाही का विरोध जताया। लोगों ने कहा कि अगर जम्मू-कश्मीर से आने वाली ये गाड़ियां नियमों के मुताबिक चल रही हैं और उनके पास रेत और बजरी के ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े जरूरी कागज हैं, तो उन्हें मेन रोड से पंजाब में एंट्री करनी चाहिए। लोगों ने सवाल उठाया कि इन भारी गाड़ियों को रात में छोटे गांव की सड़कों से क्यों लाया जा रहा है।

इलाके के लोगों का आरोप है कि भारी गाड़ियों के लगातार आने-जाने से मगवाल मोड़ से रमकालमा और फतेहपुर जाने वाली सड़कों को काफी नुकसान पहुंचा है। उनके मुताबिक सड़कों की खराब हालत से आम राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए एक्सीडेंट का खतरा बढ़ गया है। लोगों ने यह भी दावा किया कि बीते दिन रमकालमा के पास लगातार दो-तीन सड़क हादसे हुए, जिसके बाद लोगों में गुस्सा और बढ़ गया।

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इस मौके पर ब्लॉक समिति के पूर्व चेयरमैन तरसेम सिंह ने कहा कि अगर ये गाड़ियां नियमों के मुताबिक चल रही हैं, तो उन्हें गांव की छोटी सड़कों के बजाय तय मेन सड़क से गुजरने दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इलाके की सड़कें जो करीब 12 से 20 फीट चौड़ी हैं, उन पर 18 टायर वाले भारी ट्रकों और ट्रॉलियों के लगातार आने-जाने से बुरा असर पड़ रहा है।

लोगों ने प्रशासन से मांग की कि भारी गाड़ियों के आने-जाने से जुड़े नियमों की जांच की जाए, गाड़ियों के कागजों और ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े परमिट की जांच की जाए और गांव की सड़कों को हो रहे नुकसान का भी आकलन किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करते, तब तक भारी वाहनों की आवाजाही नहीं होने दी जाएगी। इस दौरान लोगों ने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारे भी लगाए।

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