Edited By Kamini,Updated: 23 Oct, 2026 04:01 PM

डिप्टी कमिश्नर गुरदासपुर के दिशा-निर्देशों के तहत जिले में पराली नहीं जलाने को लेकर अभियान तेज कर दिया गया है।
गुरदासपुर (हरमन) : डिप्टी कमिश्नर गुरदासपुर के दिशा-निर्देशों के तहत जिले में पराली नहीं जलाने को लेकर अभियान तेज कर दिया गया है। पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए जिला प्रशासन तथा कृषि विभाग की ओर से सख्त रुख अपनाते हुए विशेष मुहिम चलाई जा रही है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. शाहबाज सिंह चीमा ने बताया कि डिप्टी कमिश्नर के निर्देशों के तहत जिले में पराली प्रबंधन को लेकर जागरूकता गतिविधियों के साथ-साथ पराली जलाने वालों पर निगरानी रखी जा रही है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की टीमें किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए प्रेरित कर रही हैं। इसके साथ ही हॉटस्पॉट गांवों में विशेष निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि हॉटस्पॉट गांव काहनूवान में ड्रोन के माध्यम से भी नजर रखी जा रही है, ताकि फसल अवशेषों को जलाने की घटनाओं को रोका जा सके।
डॉ. चीमा ने किसानों से अपील की कि वे पराली को आग लगाने के बजाय बेलर तथा अन्य कृषि मशीनरी का इस्तेमाल कर इसका उचित प्रबंधन करें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की ओर से पर्यावरण संरक्षण और पराली जलाने पर रोक लगाने संबंधी कानूनी प्रावधानों एवं निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। इसी तरह, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने भी पराली जलाने की घटनाओं को रोकने, फसल अवशेषों का उचित निपटान करने और वायु प्रदूषण कम करने के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने पर जोर दिया है।
इस मौके पर एडीओ भवजीत सिंह ने कहा कि पराली जलाने से हवा प्रदूषित होती है, जिसका मानव स्वास्थ्य, पशु-पक्षियों और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा आग लगाने से मिट्टी में मौजूद लाभदायक सूक्ष्म जीवों और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को भी नुकसान पहुंचता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली को खेत में जोतने, मल्चिंग करने या बेलर के माध्यम से गांठें बनाने जैसे उपलब्ध और उपयुक्त तरीकों को अपनाकर फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करें।
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