Edited By Urmila,Updated: 11 Oct, 2026 12:04 PM

बॉर्डर जिला गुरदासपुर और आस-पास के इलाकों में भारी बारिश की वजह से किसानों के चेहरों पर एक बार फिर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं।
दीनानगर (हरजिंदर सिंह गोराया) : बॉर्डर जिला गुरदासपुर और आस-पास के इलाकों में भारी बारिश की वजह से किसानों के चेहरों पर एक बार फिर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं। पहले से ही कई तरह की दिक्कतों से जूझ रहे किसानों के लिए खराब मौसम एक नई चिंता बन गया है। बारिश की वजह से जहां पकी और खड़ी धान की फसल पर असर पड़ने का डर है, वहीं खेतों में नमी और पानी भरने की वजह से पराली की गांठें बनाने का काम भी रुक गया है।
किसानों के मुताबिक, धान की कटाई के बाद खेतों में पड़ी पराली को इकट्ठा करके उसकी गांठें बनाने का काम जोरों पर चल रहा था। इस काम के जरिए किसान पराली का सही मैनेजमेंट करने के साथ-साथ गेहूं की बुआई के लिए खेतों को तैयार करने में भी लगे हुए थे। लेकिन लगातार हो रही बारिश ने इस काम की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। खेतों में नमी बढ़ने से पराली की गांठें बनाने वाली मशीनें चलाने में दिक्कतें आ रही हैं, जिससे किसानों के काम पर असर पड़ रहा है।
इसके अलावा, जिन खेतों में धान की फसल अभी कटाई के लिए तैयार है, वहां भी किसानों को नुकसान का डर है। बारिश और तेज हवाओं के कारण फसल के जमीन पर बिछने का डर है, जिससे कटाई का काम मुश्किल हो सकता है। अगर मौसम लंबे समय तक खराब रहा, तो धान की कटाई और अगली फसल की बुआई में भी देरी हो सकती है।
किसानों का कहना है कि बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितता के कारण खेती पहले से ही चुनौतियों से घिरी हुई है। ऐसे में बेमौसम बारिश किसानों की मुश्किलें और बढ़ा देती है। पराली की गांठें बनाने का काम रुकने से मशीनरी के इस्तेमाल और अगली फसल के लिए खेतों को तैयार करने की योजना पर भी असर पड़ रहा है।
किसान अब मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि खेतों से पानी निकल सके और फसल की कटाई और पराली के मैनेजमेंट का काम फिर से शुरू हो सके। किसानों का कहना है कि अगर मौसम जल्द साफ नहीं हुआ, तो उन्हें गेहूं की बुआई में देरी के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी हो सकता है। फिलहाल भारी बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है और सभी किसानों की निगाहें मौसम के आगे के रुख पर टिकी हैं।
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