पंजाब पुलिस में सुलग सकती है बगावत की चिंगारी

Edited By Punjab Kesari,Updated: 11 May, 2018 11:24 AM

punjab police may get rid of rebellion

इंस्पैक्टर रैंक के कुछ अधिकारियों ने वीरवार को गुप्त स्थान पर मीटिंग कर अपने साथी थाना महितपुर के एस.एच.ओ. इंस्पैक्टर परमिन्द्र सिंह बाजवा का कुल का समर्थन करने का फैसला किया है

फिल्लौर (भाखड़ी): इंस्पैक्टर रैंक के कुछ अधिकारियों ने वीरवार को गुप्त स्थान पर मीटिंग कर अपने साथी थाना महितपुर के एस.एच.ओ. इंस्पैक्टर परमिन्द्र सिंह बाजवा का कुल का समर्थन करने का फैसला किया है, इसके साथ ही वह अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हाईकोर्ट में जाने की तैयारी कर रहे हैं। 


आज मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह अपने पार्टी उम्मदीवार लाडी शेरोवालिया के हक में शाहकोट आए थे। उनके 2 बजे जाते ही 3 बजे पंजाब पुलिस में इंस्पैक्टर रैंक के कुछ आला अधिकारियों ने गुप्त स्थान पर मीटिंग कर जहां अपने साथी इंस्पैक्टर बाजवा का खुल कर साथ देने का फैसला किया, वहीं अपने पुलिस विभाग से निराश चल रहे इन अधिकारियों ने खुलकर मोर्चा खोलने का फैसला लिया। सूत्रों के मुताबिक मीटिंग में इन अधिकारियों ने कहा कि वह अपने विभाग के उच्च अधिकारियों की अब और नजरअंदाजी व धक्केशाही बर्दाश्त नहीं करेंगे।


बाजवा के समर्थन में सोशल मीडिया पर छेड़ी जंग
एस.एच.ओ. बाजवा के समर्थन में छोटे पुलिस मुलाजिमों ने पुलिस विभाग के विरुद्ध खुल कर सोशल मीडिया में जंग छेड़ दी है। वह बाजवा की फोटो लगा सोशल मीडिया और हर किसी के फोन पर वायस एस.एम.एस. भेजकर बाजवा के साथ हो रही नाइंसाफी के विरुद्ध जनता और अपने साथ मुलाजिमों से खुल कर सामने आने का आग्रह कर रहे हैं। 


इंस्पैक्टर रैंक अधिकारी जा सकते हैं हाईकोर्ट 
सूत्रों के अनुसार अधिकारियों ने कहा कि हाईकोर्ट की रूलिंग के मुताबिक इंस्पैक्टर रैंक के अधिकारियों को पुलिस थानों में एस.एच.ओ. लगाया जाए जबकि ज्यादातर थानों में उच्च अधिकारियों ने अपने चहेतों या फिर राजनीतिकों के प्रभाव में आकर सब इंस्पैक्टरों को एस.एच.ओ. लगाया गया है और ज्यादातर उनको एस.एच.ओ. लगा दिया गया है जो या तो बिल्कुल नए है दूसरा उनके पास काम करने का तजुर्बा भी कम है। अपनी प्रमोशन को लेकर भी पुलिस अधिकारियों में रोष है। स्पोट्स कोटे में भर्ती हुए अधिकारी पिछले 10 वर्षों से डी.एस.पी. बनने के लिए इंतजार कर रहे हैं, जबकि यही हाल 50 के लगभग जनरल इंस्पैक्टरों का भी है जिन्हें अभी तक डी.एस.पी. प्रमोट नहीं किया गया। जबकि विभाग में 200 पद डी.एस.पी. के खाली पड़े हैं। मीटिंग में फैसला हुआ कि अगर बड़े अधिकारी इंस्पैक्टरों को लगातार नजर अंदाज करते रहे तो वह शीघ्र ही बगावत का बिगुल फूंक कर अदालत में जाएंगे। 

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