पंजाब में चल रहे 10 मैरीटोरियस स्कूल बंद होने के कगार पर

Edited By swetha,Updated: 12 Dec, 2018 09:37 AM

meritorious school

पंजाब में चल रहे 10 मैरीटोरियस स्कूलों को पंजाब सरकार बंद करने की योजना बना रही है, क्योंकि पंजाब सरकार का मानना है कि पंजाब के इन 10 स्कूलों मे प्रवेश लेने वाले बच्चों का रुझान कम होता जा रहा है और जिस प्रकार इन स्कूलों पर खर्च आ रहा है उसके...

गुरदासपुर (विनोद): पंजाब में चल रहे 10 मैरीटोरियस स्कूलों को पंजाब सरकार बंद करने की योजना बना रही है, क्योंकि पंजाब सरकार का मानना है कि पंजाब के इन 10 स्कूलों मे प्रवेश लेने वाले बच्चों का रुझान कम होता जा रहा है और जिस प्रकार इन स्कूलों पर खर्च आ रहा है उसके मुकाबले स्कूलों से परिणाम नहीं मिल रहे हैं।  

जानकारी के अनुसार पंजाब में चल रहे 10 मैरीटोरियस स्कूलों में कुल 4600 सीटें हैं जिसमें से केवल तलवाड़ा में 100 सीटें हैं, जबकि गुरदासपुर, फिरोजपुर, अमृतसर, संगरूर, पटियाला, मोहाली, जालंधर, बठिंडा तथा लुधियाना में चल रहे इन स्कूलों में 500-500 सीटें खाली हैं। जालंधर, लुधियाना, तलवाड़ा तथा बਠਿੰडा को छोड़ कर अन्य सभी मैरीटोरियस स्कूलों मे सीटें खाली हैं।  गुरदासपुर में खाली सीटों की संख्या 117 है जबकि फिरोजपुर में 40, अमृतसर में 27, संगरूर में 24, पटियाला में 5, मोहाली में 3, जालंधर में 3 सीटें खाली हैं। कुल खाली 219 सीटों मे से 200 सीटें मैड़ीकल विषय की है।

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इन स्कूलों का खर्च बर्दाश्त नहीं कर पा रही सरकार 
इन स्कूलों में होस्टल की सुविधा है तथा सभी छात्र होस्टल में रहते हैं जिस कारण रहना, शिक्षा, खाना, यूनिफार्म आदि का सारा खर्च सरकार उठाती है जिस पर सरकार का एक छात्र पर लगभग 2 लाख रुपए वार्षिक खर्च आता है। इन सभी स्कूलों में स्थाई एक भी प्रिंसीपल नहीं है तथा सभी स्कूलों का एडिशनल चार्ज अन्य सरकारी स्कूलों के प्रिंसीपलों को दिया हुआ है। सरकार का मानना है इन स्कूलों में एक छात्र पर लगभग 2 लाख रुपए खर्च करने के बावजूद यदि इन स्कूलों में छात्रों की सभी सीटें नहीं भर पाती हैं तो कहीं न कहीं कोई कमी जरूर है जिसके कारण 28 नवम्बर को शिक्षा विभाग की चंडीगढ़ में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक मं इन मैरीटोरियस स्कूलों को बंद करने पर विचार-विमर्श किया गया था, परंतु किसी नतीजे पर बात नहीं पहुंची है।

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क्या कहना है  पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन का
इस संबंधी  पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन मनोहर कांत लोहिया  ने कहा कि  एक तो इन स्कूलों में शिक्षा पूरी करने के बाद एक भी संस्था ऐसी नहीं है जो इन बच्चों को मुफ्त उच्च शिक्षा दिलाए, दूसरा इन स्कूलों में अध्यापकों की कमी के चलते भी कुछ समस्याएं आ रही हैं। इस संबंधी उच्च स्तरीय बैठक आयोजित कर सुधार करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। आगामी होने वाली वार्षिक परीक्षाओं में किसी भी हालत में नकल नहीं चलने दी जाएगी। 

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