हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, विवाहित बेटी भी अनुकम्पा के आधार पर नौकरी की हकदार

Edited By Vatika,Updated: 20 Jul, 2020 08:46 AM

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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने समानता के अधिकार का हवाला देते हुए अनुकम्पा की परिभाषा बदलते हुए कहा कि पिता की नौकरी के दौरान मौत हो जाती है तो

चंडीगढ़ (हांडा): पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने समानता के अधिकार का हवाला देते हुए अनुकम्पा की परिभाषा बदलते हुए कहा कि पिता की नौकरी के दौरान मौत हो जाती है तो बेटा नहीं होने की सूरत में विवाहित बेटी भी अनुकम्पा के आधार पर नौकरी की हकदार है। हाईकोर्ट के जस्टिस अगस्टीन जॉर्ज मसीह ने अमरजीत कौर नामक युवती की याचिका पर उक्त आदेश पारित किए हैं। पंजाब पुलिस में हैड कांस्टेबल कश्मीर सिंह की वर्ष 2008 में ड्यूटी के दौरान मौत हो गई थी।

इसके बाद उसकी बेटी का अमरजीत सिंह नामक युवक के साथ विवाह हो गया था। मां अकेली थी इसलिए बेटी शादी के बाद मां के साथ ही पिता के घर में रहने लगी थी। आमदनी का कोई साधन नहीं था जिसके बाद अमरजीत कौर ने वर्ष 2015 के दौरान पंजाब पुलिस प्रमुख को क्लर्क या कम्प्यूटर ऑप्रेटर की नौकरी अनुकम्पा के आधार पर देने के लिए अप्लाई किया था। डी.जी.पी. ने स्वीकार नहीं किया था, उनका मानना था कि विवाहित बेटी को अनुकम्पा का लाभ नहीं मिल सकता। अमरजीत कौर ने डी.जी.पी. के आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। बताया था कि वह अपने मां-बाप की इकलौती बेटी है और विवाह के बाद पति के साथ मां के साथ ही रह रही है। उनके परिवार में पिता ही एक मात्र जीविका के साधन थे जिनकी मौत के बाद अनुकम्पा का लाभ मिलना चाहिए। 


‘विवाहित पुत्री से भेदभाव नहीं किया जा सकता’
जस्टिस मसीह ने कहा कि हाईकोर्ट ने ही नारायण जाखड़ केस में आदेश पारित कर कहा था कि विवाहित पुत्र के पास रोजगार न हो तो आश्रित माना जाएगा। विवाहित बेटी पति पर आश्रित मानी जाती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवाहित बेटा या बेटी दोनों के पास स्वतंत्र रोजगार नहीं हो तो दोनों एक ही स्तर पर माने जाएंगे। ऐसे में विवाहित पुत्री से भेदभाव नहीं किया जा सकता जो संविधान के अनु‘छेद 14 में समानता के अधिकार का उल्लंघन होगा। कोर्ट ने कहा कि बेटे के मामले में आश्रित घोषित करते हुए उसकी पत्नी का रोजगार भी नहीं देखा जाता। कोर्ट ने उत्तराधिकार अधिनियम 1956 में संशोधन का भी जिक्र आदेशों में किया जिसमें संपत्ति में बेटियों के भी बराबर हिस्से की बात कही गई है। जायदाद में बेटी बराबर की हिस्सेदार है तो अनुकम्पा आधार पर पिता की जगह नौकरी की हकदार भी है।


कानून में संशोधन की जरूरत : हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकम्पा के लाभ के वर्ष 2001 में बने कानून में संशोधन की जरूरत है। कोर्ट ने आदेश पारित किए कि संबंधित विभाग याचिकाकत्र्ता को पिता पर आश्रित होने का प्रमाण-पत्र जारी करे। यही नहीं डी.जी.पी. को अमरजीत कौर के आवेदन पर विचार करने को भी कहा है। कोर्ट ने टिप्पणी की है कि अगर विवाह के पश्चात बेटा पिता पर आश्रित हो सकता है तो बेटी से विवाह उपरांत यह अधिकार नहीं छीना जाना चाहिए।

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