Edited By Subhash Kapoor,Updated: 02 Oct, 2026 09:15 PM

जगराओं पुलिस विभाग में खाकी को शर्मसार और कानून की रखवाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस द्वारा विभिन्न मामलों व चेकिंग के दौरान जब्त कर मालखाने में रखे गए दोपहिया वाहनों को थाने के ही एक ए.एस.आई. ने बिचौलिए...
लुधियाना/जगराओं (राज): जगराओं पुलिस विभाग में खाकी को शर्मसार और कानून की रखवाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस द्वारा विभिन्न मामलों व चेकिंग के दौरान जब्त कर मालखाने में रखे गए दोपहिया वाहनों को थाने के ही एक ए.एस.आई. ने बिचौलिए के जरिए कबाडिय़ों को औने-पौने दाम पर बेच डाला। मामले की भनक लगते ही पुलिस महकमे में हडक़ंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए लुधियाना देहात के एसएसपी डॉ. अंकुर गुप्ता के निर्देशों पर आरोपी एएसआई को तुरंत प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी एएसआई, मुख्य बिचौलिए और दो कबाड़ी सगे भाइयों सहित कुल चार आरोपियों पर केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस द्वारा की गई इस बड़ी कार्रवाई में चार आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा गया है जिनमें मनजिंदर सिंह (निलंबित असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर), बलविंदर सिंह उर्फ बग्गड़ (मुख्य दलाल व बिचौलिया), रमणदीप सिंह (कबाड़ी, मनी कबाड़ी का संचालक) और रणजीत सिंह (कबाड़ी, रमणदीप सिंह का सगा भाई) शामिल है।
मनी कबाड़ी की दुकान पर रेड, 12 गाडिय़ों के कटे हुए पाट्र्स बरामद
थाना सिटी जगराओं के प्रभारी इंस्पेक्टर परमिंदर सिंह ने बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि मालखाने में सुरक्षित रखे गए लावारिस व जब्त वाहन रहस्यमयी तरीके से गायब हो रहे हैं। सूचना को पुख्ता करते हुए पुलिस टीम ने तुरंत डॉ. गालिब वाली गली में स्थित मनी कबाड़ी की दुकान पर सुनियोजित छापेमारी की। मौके से कबाड़ी भाई रमणदीप सिंह और रणजीत सिंह को रंगे हाथों काबू किया गया। दुकान की गहन तलाशी लेने पर पुलिस दंग रह गई वहां से करीब 12 मोटरसाइकिलों और स्कूटरों के कटे हुए पुर्जे बरामद किए गए।
वीआईपी ड्यूटी का उठाता था फायदा, दलाल के जरिए बेचता था गाडिय़ां
शुरुआती पूछताछ में इस काले खेल की खौफनाक और शातिराना कार्यप्रणाली का पर्दाफाश हुआ है। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी एएसआई मनजिंदर सिंह बड़ी चालाकी से वारदात को अंजाम देता था। जब भी थाने या जिले के अन्य पुलिस मुलाजिमों की ड्यूटी किसी वीआईपी मूवमेंट, बड़े धार्मिक समागम या धरने-प्रदर्शनों में लगती थी और थाने में भीड़भाड़ कम होती थी, तब वह मालखाने से धीरे-धीरे दोपहिया वाहनों को बाहर निकाल लेता था। इसके बाद वह दलाल बलविंदर सिंह उर्फ बग्गड़ से संपर्क साधता था। दलाल बग्गड़ कबाड़ी भाइयों से मोलभाव कर गाडिय़ों का सौदा तय करवाता था और वाहन सीधे कबाड़ी की दुकान पर कटने के लिए पहुंचा दिए जाते थे।
असली मालिकों को तलाश रही पुलिस, सिंडिकेट की गहराई से जांच जारी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद किए गए इंजनों और चेसिस नंबरों के आधार पर सबसे पहले इन वाहनों के असली मालिकों का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह भी जांच की जा रही है कि वाहन चालकों से गाडिय़ां किस आधार पर जब्त की गई थीं। एसएसपी डॉ. अंकुर गुप्ता के स्पष्ट निर्देश हैं कि भ्रष्टाचार और विभागीय अमानत में खयानत करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अब आरोपियों का रिमांड हासिल कर यह पता लगाने में जुटी है कि अब तक मालखाने से कुल कितने वाहन बेचे जा चुके हैं और इस अवैध धंधे से कितनी काली कमाई जुटाई गई है। मामले में कई और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।