Edited By Urmila,Updated: 09 Jun, 2026 12:04 PM

एनफोर्समैंट डायरैक्टोरेट (ई.डी.) ने साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े मामले में पंजाब के लुधियाना सहित राजस्थान के विभिन्न शहरों में व्यापक कार्रवाई करते हुए कई ठिकानों पर छापेमारी की है।
लुधियाना (सेठी): एनफोर्समैंट डायरैक्टोरेट (ई.डी.) ने साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े मामले में पंजाब के लुधियाना सहित राजस्थान के विभिन्न शहरों में व्यापक कार्रवाई करते हुए कई ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पी.एम.एल.ए.) के तहत की गई।
ईडी अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 5 जून को लुधियाना, किशनगढ़ (अजमेर), नागौर और जोधपुर में कुल 7 परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया गया। जांच एक ऐसे साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़ी है, जिसमें भारतीय मोबाइल नंबरों को फर्जी तरीके से सक्रिय कर मलेशियाई नागरिकों को उपलब्ध कराया गया था। बाद में इन नंबरों का इस्तेमाल कंबोडिया से संचालित साइबर ठगी के लिए किया गया।
ई.डी. की जांच में सामने आया कि पॉइंट ऑफ सेल (पी.ओ.एस.) संचालकों द्वारा बड़ी संख्या में सिम कार्डों का दुरुपयोग किया गया। जांच एजैंसी के अनुसार हजारों भारतीय मोबाइल नंबरों को सक्रिय कर विदेश भेजा गया जिनका उपयोग देश के विभिन्न राज्यों में साइबर अपराधों को अंजाम देने के लिए किया गया।
जांच के दौरान लगभग 2.30 लाख मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया गया। इनमें से करीब 36 हजार सिम कार्ड कंबोडिया में सक्रिय पाए गए, जबकि लगभग 5,300 नंबर विभिन्न साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल होने के संकेत मिले। एजैंसी का अनुमान है कि इस नेटवर्क के कारण देशभर में सैकड़ों करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई है।
ई.डी. ने अपनी जांच में राहुल कुमार झा, मोहम्मद शरीफ और संदीप भट्ट सहित अन्य सिम विक्रेताओं की भूमिका की जांच की है। आरोप है कि इन लोगों ने कुछ अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर बड़ी संख्या में सिम कार्ड मलेशियाई नागरिकों को उपलब्ध कराए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित व्यक्तियों के पास एयरटैल, जियो और वी.आई. जैसी टैलीकॉम कंपनियों के प्वाइंट ऑफ सेल (पी.ओ.एस.) आई.डी थे, जिनका उपयोग सिम कार्ड जारी करने और सक्रिय करने के लिए किया जाता था। आरोप है कि लोगों को नए सिम जारी करने या पुराने सिम पोर्ट करने का झांसा देकर उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और बाद में वे सिम विदेश भेज दिए गए। छापेमारी के दौरान ई.डी. ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य सामग्री जब्त की है। इसके अलावा लगभग 30 बैंक खातों की पहचान की गई है। जांच एजैंसी ने आरोपियों से संबंधित चल-अचल संपत्तियों की भी जानकारी जुटाई है।
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