दरियों और बोरियों पर बैठे ‘नन्हे मेहमान’

  • दरियों और बोरियों पर बैठे ‘नन्हे मेहमान’
You Are HerePunjab
Wednesday, November 15, 2017-3:20 PM

लुधियाना (विक्की): राज्य की कांग्रेस सरकार के ड्रीम प्रोजैक्ट सरकारी प्राइमरी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं की शुरूआत आज फीकी रही, क्योंकि सरकार द्वारा स्कूलों को तैयारियों के लिए भेजे जाने वाले फंड के लिए खजाने का मुंह नहीं खोला गया। यही वजह है कि अधिकतर स्कूलों ने प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आने वाले अपने नन्हे मेहमानों को जमीन पर बिठाकर उनका स्वागत किया। यही नहीं कई स्कूलों ने तो जहां इन नन्हे-मुन्नों को दरियों व गलीचों पर बिठाया, वहीं कई स्कूलों में इन्हें बोरियों पर ही बिठाकर प्री-प्राइमरी कक्षाओं की औपचारिक शुरूआत की गई।

हालांकि कई स्कूल ऐसे भी रहे, जिन्होंने सर्दी के इन मौसम में इन नौनिहालों को डैस्कों पर अन्य बच्चों के साथ बिठाया। पहला दिन होने के कारण विभाग को जिस गिनती की उम्मीद थी, उतनी संख्या में बच्चे स्कूलों में नहीं पहुंचे लेकिन इनरोलमैंट का आंकड़ा 6000 से 8500 से अधिक हो गया। एक अनुमान के मुताबिक प्रति स्कूल 8 बच्चे इनरोल होने की एवरेज आई है। आज पहले दिन शिक्षा विभाग एलीमैंटरी के अनुसार लुधियाना के 19 ब्लॉकों के 1002 स्कूलों में 8557 बच्चे इनरोल हो गए हैं। इनमें सबसे अधिक 634 स्टूडैंट्स क्रमश: जगराओं व सिधवां-1 ब्लॉक में इनरोल हुए। डिप्टी डी.ई.ओ. डिम्पल मदान ने बताया कि कल तक इनरोलमैंट का जो आंकड़ा 6000 के करीब था, वह आज कक्षाएं शुरू होने पर 8500 का आंकड़ा पार गया है। इसके अलावा लुधियाना-2, समराला, रायकोट, खन्ना-2, मांगट-1 व लुधियाना-1 में आते विभिन्न स्कूलों में प्रति ब्लॉक 500 के करीब बच्चे इनरोल हुए हैं। 

कमरों की कमी भी आई आड़े 
वहीं प्राइमरी स्कूल नूरपुर बेट में भी पहले दिन 3 बच्चे पहुंचे, जिन्हें स्कूल की ओर से बाकायदा सजाए गए कमरे में दरियों पर बिठाया गया। वहीं स्कूल में कमरों की कमी के चलते 2 कक्षाएं एक ही कमरे में एडजस्ट की गईं। इसके अलावा कुछ अन्य स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करने को लेकर कमरों की कमी भी सामने आई, जिसके चलते स्कूल हैड टीचर व इंचार्ज प्री-प्राइमरी कक्षाओं के लिए आने वाले बच्चों को बिठाने को लेकर असमंजस में दिखे। सरकारी प्राइमरी स्कूल खैहरा बेट में 11 बच्चे इनरोल हुए हैं, जिनमें से पहले दिन 3 स्टूडैंट ही इन कक्षाओं के लिए पहुंचे। स्कूल में कोई कमरा फालतू न होने के चलते इंचार्ज द्वारा पहली बार स्कूल आए इन बच्चों को पहली कक्षा के स्टूडैंट्स के साथ ही डैस्कों पर बिठाया गया। उन्होंने बताया कि भविष्य में भी बच्चों को डैस्क पर ही बिठाया जाएगा। 

कई स्कूलों में 11 बजे तक नहीं हुई शुरूआत
कई स्कूल ऐसे भी देखे गए, जहां पर सुबह 11 बजे तक भी प्री-प्राइमरी कक्षाओं की औपचारिक रूप से शुरूआत नहीं हो पाई थी। इनमें से प्राइमरी स्कूल मलकपुर एक है। उधर, विभाग की डिप्टी डी.ई.ओ. डिम्पल मदान ने भी हंबड़ा रोड पर पड़ते कई गांवों के प्राइमरी स्कूलों का दौरा करके वहां प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू होने की जांच की। डिप्टी डी.ई.ओ. ने बाकायदा बच्चों के अभिभावकों के साथ बात करते प्री-प्राइमरी कक्षाओं में स्टूडैंट्स की उपस्थिति यकीनी बनाने का सुझाव देते हुए सरकार के इस कदम के फायदे भी गिनाए। 


 

यहाँ आप निःशुल्क रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, भारत मॅट्रिमोनी के लिए!