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संघ वाले शहादतें देते रहे, भाजपाई मनाते रहे जश्न

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Thursday, October 19, 2017-9:42 AM

लुधियाना: लुधियाना में मंगलवार को संघ शाखा प्रमुख रविन्द्र गोसाईं की गोलियां मार कर हत्या कर दी गई। उनकी हत्या को लेकर समस्त संघ परिवार में रोष की लहर दौड़ गई। रोष स्वरूप संघ नेताओं ने लुधियाना में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन भी किया। वहीं बाद दोपहर जब रविन्द्र गोसाईं के संस्कार की तैयारी चल रही थी तो ठीक उस समय जालंधर के एक होटल में पंजाब भाजपा के बड़े नेता दीवाली मिलन कार्यक्रम मना रहे थे।

 

इस कार्यक्रम में न केवल लंच दिया गया बल्कि मौके पर आए लोगों को महंगे गिफ्ट भी दिए गए। रोष से भरे लुधियाना के संघ कार्यकत्र्ता कातिलों को पकडऩे की मांग उठा रहे थे तो कुछ भाजपा नेता उस समय हंसते हुए ठहाके तक लगा रहे थे।इस बात की सूचना संघ कार्यकत्र्ताओं को मिली तो उनका गुस्सा और भड़क गया। इसको लेकर आज सारा दिन व्हाट्सएप पर मैसेज चलते रहे। ऐसा भी सुनने में आया है कि भाजपा के केन्द्रीय हाईकमान तक इसकी शिकायत भी भेजी है। यह भी उल्लेखनीय है कि श्मशानघाट में एक भाजपा नेता का कुछ कार्यकत्र्ताओं ने जमकर विरोध किया और श्मशानघाट में ही नारेबाजी तक की गई। इस कारण करीब डेढ़ घंटे तक गोसाईं का संस्कार नहीं हो पाया।

 

पंजाब में कमिश्नरेट सिस्टम फेल
जालंधर, लुधियाना और अमृतसर में कमिश्नरेट सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया लगता है। जब से कमिश्नरेट सिस्टम लागू हुआ है तब से वारदातों का ग्राफ भी लगातार बढ़ता रहा है। छीना-झपटी की वारदातें आम हुई हैं और पंजाब में कई गैंग भी पैदा हुए। यही नहीं, गैंगवार में कई लोगों की जान भी गई है। पिछले कुछ समय में इन बड़े शहरों में जितनी बड़ी दुर्घटनाएं हैं, इन घटनाओं को हल करने में कमिश्नरेट सिस्टम पूरी तरह फेल हुआ है। 

जालंधर का जगदीश गगनेजा हत्याकांड हो या बिल्ला हत्याकांड, उसी तरह लुधियाना का माता चंद कौर कत्लकांड और मास्टर सुल्तान मसीह हत्याकांड, इन सभी मामलों को सुलझाने में पुलिस प्रशासन पूरी तरह फेल रहा है। यही नहीं, गगनेजा हत्याकांड की जांच एक साल से सी.बी.आई. कर रही है मगर वह भी इस हत्याकांड को नहीं सुलझा पाई है। इससे आम आदमी का पुलिस प्रशासन पर से विश्वास उठता जा रहा है। इसी तरह अमृतसर में भी पिछले कुछ समय से गैंगवार की कई घटनाएं हुई हैं। अमृतसर स्थित गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के हिंदी प्रोफैसर सुखप्रीत सिंह की किडनैपिंग को 40 दिन बीत जाने के बाद भी आरोपी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। प्रो. सुखप्रीत सिंह को 11 सितम्बर को अगवा किया गया था।

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