पंजाब को दोबारा आतंक की भट्ठी में झोंकने का प्रयास

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Thursday, October 19, 2017-8:58 AM

लुधियाना(कुलवंत): पंजाब में पिछले करीब 3 सालों से ऐसी साजिशें रची जा रही हैं कि पंजाब के खुशनुमा माहौल को एक बार फिर से आतंक की भट्ठी में झोंका जा सके। अगर कड़ी दर कड़ी वारदातों पर गहन नजर दौड़ाई जाए तो साजिशकत्र्ताओं ने जहां हिन्दू संगठनों के नेताओं की हत्याएं कीं, वहीं सिखों की धार्मिक पुस्तकों की बेअदबी की, वहीं मालेरकोटला में एक जैन समाज से संबंधित बालक को जिंदा जलाया गया, जिसके आरोप मुस्लिम समुदाय के लोगों पर लगे। 

पंजाब पुलिस ऐसी वारदातों को हल करने में नाकाम साबित 
ये वारदातें साबित करती हैं कि पंजाब को आग लगाने के लिए इन वारदातों के मन्सूबे कहीं और तैयार कर हर समुदाय को लड़ाकर पंजाब के अमन कानून से खिलवाड़ करने का प्रयास किया गया है। दूसरी ओर पंजाब पुलिस ऐसी किसी भी वारदात को हल करने में नाकाम साबित हुई है जिस कारण लोगों का विश्वास भी पुलिस से उठा है। पुलिस ने बेशक ऐसे हाईप्रोफाइल मामलों को हल करने के लिए आई.पी.एस. अधिकारियों पर आधारित एस.आई.टी. टीमें गठित कीं लेकिन एक भी केस पुलिस हल नहीं कर पाई जिस कारण कुछ मामले तो सी.बी.आई. के हवाले करने की बात भी की जा रही है। 

पुलिस की सतर्कता की भी खुली पोल 
बेशक पुलिस खुद को इक्का-दुक्का वारदातें हल कर अपनी पीठ थपथपा लेती है लेकिन जिस प्रकार ये वारदातें हुई हैं, उससे पुलिस की सतर्कता की भी पोल खुल गई है कि शातिर अपराधी पुलिस से कहीं आगे हैं और वारदात कर फरार होने में उन्हें काफी मुहारत हासिल है। पुलिस का काम मात्र लकीर पीटना तथा बाद में एस.आई.टी. गठित करना ही रह गया है जबकि पुलिस द्वारा गठित गठजोड़ एस.आई.टी. (स्पैशल इन्वैस्टीगेशन टीमें न होकर बल्कि साइलैंट इन्वैस्टीगेशन टीमें) बनकर रह गई हैं। इन टीमों द्वारा जांच की रफ्तार इस कदर है कि ऐसे मामलों में जांच आगे ही नहीं बढ़ पाई। 

 एक नजर पूर्व की वादाताओं पर 
16 जून, 2017 : पास्टर सुल्तान मसीह की लुधियाना में पीरू बंदा सलेम टाबरी एरिया में उनके निवास के बाहर ही हत्या कर दी गई। केस अभी भी पुलिस हल नहीं कर पाई और इस मामले में भी एक आई.पी.एस. सहित ए.डी.सी.पी. रत्न बराड़ की अगुवाई में एस.आई.टी. टीम गठित है जबकि पास्टर के परिजन कई बार आलाधिकारियों को आरोपियों को काबू करने की गुहार लगा चुके हैं।

25 फरवरी 2017 : डेरा सच्चा सौदा के प्रेमी सतपाल शर्मा (70) व उसके बेटे रमेश (40) की लुधियाना-मालेरकोटला रोड गांव जगेड़ा नाम चर्चा केंद्र के बाहर हत्या कर दी गई। इस मामले में भी पुलिस ने एस.आई.टी. गठित कर मामले की जांच सौंपी थी लेकिन जांच वहीं पर रुकी है है जहां से शुरू हुई थी। 

14 जनवरी, 2017 : लुधियाना में ङ्क्षहदू तख्त के जिला प्रधान अमित शर्मा की श्री दुर्गा माता मंदिर के बाहर सरेआम मोटरसाइकिल सवारों ने गोलियां मार कर हत्या कर दी। उस समय वह मंदिर में माथा टेकने आया था। इस मामले में भी एस.आई.टी. कुछ नहीं कर पाई।  

6 अगस्त, 2016 : आर.एस.एस. नेता ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा को जालंधर में गोली मारी गई। उनकी कुछ दिनों बाद डी.एम.सी. में मौत हुई। उस समय आर.एस.एस. ने काफी रोष जताया था और पुलिस ने तुरंत इस वारदात को हल करने के लिए पुलिस कमिश्नर जालंधर पर एक एस.आई.टी. टीम गठित की थी जिसकी जांच अभी भी चल रही है जो किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंची।

23 अप्रैल 2016 : खन्ना के ललहेड़ी चौक में शिवसेना नेता दुर्गा दास गुप्ता की 2 अज्ञात बाइक सवारों ने हत्या कर दी। पुलिस ने जांच के लिए एस.आई.टी. गठित की लेकिन आज तक इस वारदात को पुलिस सुलझा नहीं पाई कि हत्या के पीछे किसका हाथ था और किस मकसद के लिए दुर्गा प्रसाद को मौत के घाट उतारा गया। 

3 अप्रैल 2016 : भैणी साहिब स्थित सत्गुरु जगजीत सिंह की धर्मपत्नी माता चंद कौर की अज्ञात बाइक सवार युवकों ने हत्या कर दी और फरार हो गए जबकि इससे पहले नामधारी अवतार सिंह को भी मोटरसाइकिल सवारों ने मौत के घाट उतारा था। इन वारदातों में आरोपी न पकड़े जाने के कारण इन मामलों की जांच सी.बी.आई. से करवाने की बात भी चर्चा में थी जबकि इससे पहले एस.आई.टी. टीमें आरोपियों को पकडऩे व इन वारदातों को हल करने में नाकाम रही थी। 

19 जनवरी 2016 : किदवई नगर के शहीदी पार्क में जारी आर.एस.एस. शाखा में अज्ञात बाइक सवार हथियारबंद लोगों ने स्वयंसेवक नरेश कुमार की ओर गोली चलाई लेकिन वह बाल-बाल बच गया था। पुलिस अभी तक गोली चलाने वालों का पता नहीं लगा पाई जबकि हर बार पुलिस सी.सी.टी.वी. की फुटेज मिलने का दावा कर आरोपी काबू करने की बात करती रही है।

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