पंजाब चुनाव में सबसे बड़े ड्रग्स के ‘सिरदर्द’ की ढूंढी जा रही ‘दवा’

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Thursday, January 12, 2017-1:51 AM

चंडीगढ़ (अश्वनी कुमार/रमनजीत सिंह): बेशक पंजाब के माथे पर ड्रग्स का दाग लग चुका हो लेकिन निर्वाचन आयोग की पूरी कोशिश है कि पंजाब चुनाव का दामन इससे पूरी तरह पाक-साफ रहे। इसी कोशिश का नतीजा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव में पहली दफा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एन.सी.बी.) योजनाबद्ध तरीके से पूरे दल-बल के साथ मैदान में उतर चुका है। खास बात यह है कि पुलिस के अलावा पहली बार एन.सी.बी. ने प्रत्येक पुलिस जिले में अलग से अपने स्टाफ की तैनाती की है। 

 

ब्यूरो के अनुसार प्रदेश के करीब 25 पुलिस जिलों में अलग से एन.सी.बी. इंस्पैक्टर के नेतृत्व में टीमों को तैनात किया गया है जो दिन-रात ड्रग्स के खिलाफ निगाहें तरेरे हुए हैं। ड्रग्स के खिलाफ मुहिम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद से एन.सी.बी. ने प्रदेश में विभिन्न जगह 15 बार सर्च ऑप्रेशन या ज्वाइंट रेड की और बड़ी मात्रा में नशे के तौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाएं पकड़ीं। निर्वाचन आयोग ने भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चुनाव के दौरान किसी भी सूरत में ड्रग्स का इस्तेमाल न हो। दरअसल, पंजाब चुनाव में ड्रग्स के इस्तेमाल का मुद्दा लोकसभा में भी गूंजा था। कानून एवं न्याय मंत्रालय ने भी कबूल किया था कि पंजाब में चुनाव के दौरान ड्रग्स के इस्तेमाल का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। 

 

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों को पेश करते हुए मंत्रालय की तरफ से कहा गया था कि 2012 के विधानसभा चुनाव के बाद 2014 में लोकसभा चुनाव तक महज दो साल में पंजाब के भीतर चुनाव के दौरान ड्रग्स और शराब बांटने के ग्राफ में काफी उछाल आया है। 2012 विधानसभा चुनाव में जहां करीब 54 करोड़ रुपए की ड्रग्स पकड़ी गई वहीं 2014 में यह आंकड़ा बढ़कर 783.44 करोड़ तक पहुंच गया।


इसी तरह, 2012 में जहां करीब 2.59 करोड़ रुपए की कीमत वाली शराब पकड़ी गई वहीं 2014 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 22.18 करोड़ रुपए हो गया। हालांकि नकदी के मामले में थोड़ी कमी आई है। 2012 में जहां 11.51 करोड़ रुपए की नकदी पकड़ी गई थी वहीं 2014 में महज 1.04 करोड़ रुपए ही पकड़े गए। इसीलिए आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए निर्वाचन आयोग इस बार कई ठोस कदम उठाने की तैयारी में है। 


आयोग ने स्पष्ट किया था कि चुनाव में ड्रग्स, शराब और पैसे की शक्ति के बढ़ते इस्तेमाल से निपटने के लिए निर्वाचन आयोग ने चीफ इलैक्टोरल आफिसर को इलैक्शन एक्सपैंडीचर मॉनीटरिंग के लिए सख्त कदम उठाने को कहा है। इसके तहत इलैक्शन एक्सपैंडीचर मॉनीटरिंग के लिए नोडल ऑफिसर्स की तैनाती अनिवार्य तौर पर की गई है। चीफ इलैक्टोरल ऑफिस में जहां कम से कम एडीशनल/ज्वाइंट सी.ई.ओ. को नोडल ऑफिसर तैनात करना सुनिश्चित किया गया है वहीं पुलिस डिपार्टमैंट में इंस्पैक्टर जनरल ऑफ पुलिस या इसके बराबर रैंक वाले आफिसर को नोडल आफिसर लगाने के निर्देश हैं।


एक्साइज डिपार्टमैंट में एक्साइज कमिश्नर स्तर के अधिकारी को तैनात किया जाना है जबकि डायरैक्टर जनरल ऑफ इन्कम टैक्स को भी अनुरोध किया गया है कि वह डी.आई.टी. स्तर के अधिकारी को नोडल ऑफिसर तैनात करें। ये सभी नोडल ऑफिसर्स एन्फोर्समैंट एजैंसीज, निर्वाचन अधिकारियों, एक्सपैंडेचर ऑब्जर्वर्स, असिस्टैंट एक्सपैंडीचर ऑब्जर्वर फ्लाइंग स्क्वायड व स्टैटिक सर्वेलांस टीम के साथ तालमेल रखेंगे ताकि नारकोटिक्स/ड्रग्स, शराब सहित मनी पावर पर शिकंजा कसा जा सके। वहीं, निर्वाचन आयोग ने चीफ इलैक्टोरल ऑफिसर को ये भी निर्देश दिए हैं कि वह एक्सपैंडीचर सैंसटिव विधानसभा क्षेत्र, एक्सपैंडीचर सैंसेटिव पॉकेट्स भी चिन्हित करें।

 

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने तैयार किया प्लान 
यह पहली दफा है कि ड्रग्स के खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने एक व्यवस्थित एक्शन प्लान तैयार किया है। इस एक्शन प्लान की कॉपी निर्वाचन आयोग को भी भेजी गई थी, जिसमें कुछ काट-छांट के बाद आयोग ने ब्यूरो की योजना को हरी झंडी दे दी है। मौजूदा समय में ब्यूरो स्टाफ इसी प्लान को आधार बनाकर पंजाब के पुलिस जिलों में सक्रिय है। 


आचार संहिता के बाद ब्यूरो इन एक्शन
बरनाला-ड्रग इंस्पैक्टर के साथ मिलकर ब्यूरो की टीम ने कलोरडाइजेपॉक्साइड की 10000 टैबलेट्स बरामद कीं

भटिंडा-ड्रग इंस्पैक्टर के साथ मिलकर ब्यूरो ने ट्रेमाडॉल और एलप्राजोलम 1600 टैबलेट्स पकड़ीं

फतेहगढ़ साहिब-ड्रग इंस्पैक्टर के साथ ब्यूरो की टीम ने मिलकर 95 टैबलेट्स ट्रेमाडॉल व एलप्राजोलम पकडीं

फिरोजपुर-ड्रग इंस्पैक्टर के साथ ब्यूरो की टीम ने मिलकर 18,677 हैबिट फार्मिंग ड्रग्स पकड़ीं

जालंधर-ड्रग इंस्पैक्टर के साथ ब्यूरो ने 7221 हैबिट फार्मिंग ड्रग्स पकड़ीं

मानसा-ड्रग इंस्पैक्टर के साथ मिलकर 510 टैबलेट्स ट्रेमाडॉल व एलप्राजोलम पकड़ीं

मोगा-ड्रग इंस्पैक्टर के साथ मिलकर 11700 हैबिट फार्मिंग ड्रग्स पकड़ी

लुधियाना-सी.आई.ए. के साथ मिलकर ब्यूरो ने 28 बोतल शराब व 9.5 ग्राम हैरोइन पकड़ी

अमृतसर-ब्यूरो की टीम ने एक्साइज व पुलिस विभाग के साथ मिलकर 40 बोतल कच्ची शराब बरामद की

 

इन रूट्स पर सबसे पैनी निगाहें
- अंबाला-पटियाला वाया राजपुरा
- पिहोवा-पटियाला
- समाना-गूहला चीका
- नरवाना-पातड़ां
- सिरसा-सरदूलगढ़
- मंडी डबवाली-मलोट
- मंडी डबवाली-अबोहर
- गंगानगर-अबोहर वाया सीतो-गुन्नो
- जम्मू-पठानकोट


फस्र्ट पार्ट : रेल-रोड नैटवर्क की इंटैलीजैंस
ब्यूरो के एक्शन प्लान का सबसे अहम पार्ट रेल-रोड नैटवर्क की इंटैलीजैंस है। इनमें मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित बंगाल, बिहार के जरिए पंजाब तक आने -वाली गाडिय़ों की सबसे ज्यादा मॉनीटरिंग की जा रही है। ऐसा इसलिए भी है कि पठानकोट हमले के बाद पंजाब के साथ सटे पाकिस्तान बॉर्डर पर अतिरिक्त सीमा सुरक्षा बल की तैनाती के चलते बॉर्डर के जरिए तस्करी की संभावना में काफी कमी आई है। 

 

इसीलिए खुफिया एजैंसियों की रिपोर्ट है कि ड्रग तस्कर पंजाब चुनाव में हैरोइन, अफीम की सप्लाई के लिए इन राज्यों के रेल-रोड नैटवर्क का पंजाब तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। यह इसलिए भी अहम है कि अफीम उत्पादक राज्यों में पिछले कुछ सालों के दौरान इसकी पैदावार में बढ़ौतरी हुई है, इसलिए इन राज्यों से अफीम पंजाब तक पहुंचाई जा सकती है। पाकिस्तान बॉर्डर के जरिए अफगानिस्तान की हैरोइन सप्लाई पर अंकुश लगने से खुफिया एजैंसियों को प्रबल आशंका है कि भारत में निर्मित हैरोइन को पंजाब चुनाव में इस्तेमाल के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है। हालांकि अभी तक भारत निर्मित हैरोइन के मामले उतने सामने नहीं आए हैं लेकिन इस आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।

 

सैकेंड: बॉर्डर से सटे गांवों पर नजर रखना
सैकेंड पार्ट ऑफ एक्शन प्लान उन गांवों की निगहबानी करना है, जहां ड्रग सप्लाई होती है। खासतौर पर बॉर्डर के साथ सटे गांवों सहित लुधियाना, अमृतसर और जालंधर जिले में आने वाले कई ऐसे गांव हैं, जहां ड्रग का कारोबार होता है। अधिकारियों की मानें तो ब्यूरो स्टाफ उन गांवों की भी सूची तैयार कर चुका है, जहां कभी किसी स्तर पर ड्रग तस्करी या किसी व्यक्ति के लिप्त होने का मामला सामने आया है। 


इसी कड़ी में उन प्रमुख अपराधियों की भी सूची को सभी पुलिस थानों में भेज दिया गया है, जो नशे के कारोबार में सक्रिय हैं या नशे के मामलों में वांछित हैं। वैसे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की सूची में पंजाब में महज आधा दर्जन शातिर अपराधियों के नाम दर्ज हैं। इनमें सबसे प्रमुख अबाद अली को हैरोइन के मामले में बॉर्डर से पकड़ा गया था जिसे बॉर्डर पर गोली भी लगी थी लेकिन कोर्ट से बेल मिलने के बाद वह गुपचुप तरीके से फरार होकर पाकिस्तान पहुंच गया। दूसरा प्रमुख चेहरा मिलस्टीम का है जो हैरोइन मामले में लिप्त था लेकिन कोर्ट से बेल मिलने के बाद कनाडा फरार होने में कामयाब हो गया। 

 

आशंका जताई जा रही है कि अबाद अली अभी भी पाकिस्तान से पंजाब तक हैरोइन पहुंचाने की जुगत भिड़ा रहा है इसलिए ब्यूरो उसके नैटवर्क को तोडऩे की हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। वहीं, ब्यूरो ने पंजाब के गृह विभाग को भी पत्र लिखा है कि जो तस्कर पैरोल मांग रहे हैं, उन्हें किसी भी सूरत में चुनाव के दौरान पैरोल पर बाहर न आने दिया जाए।

 

थर्ड: सभी दलों के नेताओं से मिले स्टाफ
मैडीकल स्टोर्स के जरिए नशे की खेप पर अंकुश लगाने के लिए ही ब्यूरो ने सूचनाओं के आदान-प्रदान पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित किया है। ब्यूरो अधिकारियों ने तमाम स्टाफ को सख्त हिदायत दी है कि वह जिस इलाके में भी तैनात है, उस इलाके की सभी पार्टियों के उम्मीदवारों व वर्कर्स से रू-ब-रू हों ताकि अगर नशे की बिक्री की कोई खबर मिलती है तो तुरंत एक्शन की मुद्रा में आया जा सके।
 

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