विधानसभा हलका संगरूर-रियासती शहर जो अपनी होंद भी बरकरार न रख सका

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Saturday, December 31, 2016-10:33 AM

संगरूर:मुख्य शहर संगरूर जिसको किसी समय महाराजा जींद ने अपनी राजधानी के तौर पर विकसित करवाया था। जिसके चार मुख्य द्वार थे व 40-40 फुटी सड़कें थीं। यह शहर अब समय की मार झेलते अपनी रियासती दृश्य गवांता जा रहा है। बाजार तंग होकर रह गए हैं। दरवाजे सिर्फ कागजों में ही बोलते हैं, मौजूदा समय दौरान शहर का काफी विकास हुआ है परंतु यह विकास बिना किसी योजनाबंदी के होने के कारण शहर की हालत बद्तर है। इस शहर में जनतक पखानों की बड़ी कमी है, जिससे औरतों को काफी तंगी महसूस होती है।

इस शहर में पानी के निकास के लिए सीवरेज प्रणाली बुरी तरह फेल होने के कारण बरसातों के दिनों में शहर के विभिन्न भागों में पानी उच्च स्तर पर जमा हो जाता है व कई-कई दिन पानी खड़ा रहता है। शहर की सड़कों व गलियों में हर समय कूड़ा कर्कट से गंदगी पसरी रहती है।मुख्य मुद्दे-बरसाती पानी व सीवरेज की समस्या का हल-बस स्टैंड के नवीनीकरण का मुद्दा-शहर में आवाजाही की समस्या-रोजगार के साधन जरूरत की मात्रा में पैदा करने-नशे के कारोबार पर नकेल कसना-शहर में गंदे नाले की समस्या का स्थाई हल-शहर में फिरते आवारा पशुओं की समस्या को दूर करना।

मुख्य मुद्दे

*बरसाती पानी व सीवरेज की समस्या का हल

*बस स्टैंड के नवीनीकरण का मुद्दा-शहर में आवाजाही की समस्या

*रोजगार के साधन जरूरत की मात्रा में पैदा करने

*नशे के कारोबार पर नकेल कसना

*शहर में गंदे नाले की समस्या का स्थाई हल

*शहर में फिरते आवारा पशुओं की समस्या को दूर करना

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