इन अहम मुद्दों पर घिरेंगी पार्टियां,देखें किसके पाले में गिरेगी बॉल

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Friday, December 16, 2016-3:00 PM

जालंधर: पंजाब  विधानसभा 2017 चुनाव में कई रंग बदलते हुए नजर आएंगे क्योंकि पिछले समय दौरान पंजाब के हालात ही कुछ ऐसे बन गए हैं कि लोग कौन से मुद्दे पर पार्टियों को घेर लें , कुछ नहीं कहा जा सकता है। इन चुनाव दौरान पंजाब के 11 अहम मुद्दे राजनीतिक पार्टियों के लिए उथल -पुथल मचा सकते हैं।

ये मुद्दे रहेंगे अहम

1. नोटबंदी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबन्दी के ऐलान को एक महीना हो गया परन्तु हालात जैसे कि वैसे हैं। यहां तक कि लोगों को अपने रोज़मर्रा  के खर्चों के भी लाले पड़े हुए हैं, विवाहों में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है । कारोबारी परेशान हैं। नोटबन्दी के फैसले ने किसानों को मुसीबत में डाल रखा है। ऐसे में लोगों का गुस्सा चुनाव में साफ दिखाई देगा।

2. नशा: पंजाब में नशो का मुद्दा हमेशा से ही अहम रहा है। खास कर अकाली दल पर पंजाब में नशे को शह देने के अारोप लग रहे हैं। साल 2014  लोकसभा चुनाव दौरान भी पंजाब में नशों का मुद्दा अहम रहा था। पुलिस की तरफ से भी सिर्फ छोटे -छोटे नशेड़ी ही पकडे जा रहे हैं, जबकि बड़े मगरमच्छों को हाथ डालने के लिए कोई तैयार नहीं है। 
 
3. धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी: पंजाब में पिछले समय दौरान फरीदकोट में पवित्र धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी का मामला सामने आया था। इसके बाद बेअदबी की घटनाएं रोजमर्रा  सामने आने लगीं, जिस कारण पंजाब के लोगों की धार्मिक भावनाअों को गहरी चोट लगी।  

4. नहरों का पानी: नहरों का पानी पंजाब की राजनीति में नेताओं के लिए एक पुराना और कारगर हथियार माना जाता है। कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल इसे लेकर एक -दूसरे पर हमला करते रहते हैं। इस समय पानी का मुद्दा सब पार्टियों के लिए अहम बन चुका है। 

5. माफिया: पंजाब में रेत -बजरी माफिया एक बड़ी समस्या बन चुका है। इसके साथ ही ट्रांसपोर्ट माफिया को लेकर भी सरकार पर गंभीर अारोप लगे। विरोधी पक्ष का कहना है कि रेत-बजरी माइनिंग पर पूरी तरह से सत्ताधारी पक्ष का कब्ज़ा है और ट्रांसपोर्ट पर भी बादल परिवार का कब्ज़ा है। इस मामले को लेकर लोगों में काफ़ी गुस्सा पाया जा रहा है।

6. बेरोजगारी: पंजाब में बेरोजगारी का मुद्दा दूसरे मुद्दों के बीच दबा सा गया है। इस पर आम आदमी पार्टी ने सबसे पहले फोकस किया परन्तु कांग्रेस ने उससे एक कदम आगे निकलते हुए यूथ को ख़ुद के साथ जोड़ा। कैप्टन ने 50 लाख नौजवानों को स्मार्ट फ़ोन देने का ऐलान किया है और एक परिवार में से एक मैंबर को सरकारी नौकरी देने का भी ऐलान किया है परन्तु यह सिर्फ़ दावे ही हैं, हकीकत में कब बदलेंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता। 

7. दलित उत्पीड़न: देश में सबसे ज़्यादा 32 प्रतिशत दलित आबादी वाला मुद्दा अहम है। पिछले साल अबोहर में शराब माफिया की तरफ से दलित भीम टांक का कत्ल कर दिया गया था और उसके साथी गुरजंट सिंह को गंभीर रूप में घायल कर दिया था। इस के बाद भी दलितों पर अत्याचारों की कई घटनाएं सामने आईं हैं, जिस के बाद मौजूदा सरकार प्रति दलित भाईचारो में गुस्से लहर है। 

8. आर्थिक मंदहाली: सूबो में आर्थिक संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। पंजाब पर कर्ज का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। विरोधी पक्ष अारोप लगा रही है कि सरकार अपने राजनीतिक लाभ के लिए खजाने को पूरी तरह खाली कर रही है परन्तु मुलाजिमों को अपने ही प्रोविडेंट फंड में से विवाह या मकान बनाने के लिए पैसे निकलवाने की इजाज़त नहीं है, जिस कारण मुलाजिम वर्ग सरकार से नाराज़ चल रहा है।

9. खेती संकट: खेती प्रधान सूबो में खेती संकट जोरों पर  है। इस साल पहले गेहूं की फसल पर मौसम की मार पड़ी, उसके बाद नोटवंदी ने किसानों का काम खराब कर दिया। कैश की लिमट होने के कारण धान की फसल की अदायगी नहीं हुई। किसान न तो पुराने कर्ज समय पर वापस कर सके और न ही नए कर्ज ले सके।

10. विकास: उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल और प्रदेश भाजपा प्रधान यह स्पष्ट कर चुके हैं कि विकास साथ-साथ केंद्र सरकार की बढ़िया योजनाएं वोटरों तक पहुंचेंगी। सभी मुद्दों के बीच अकाली -भाजपा गठजोड विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगा। 

11. कानून-व्यवस्था: पंजाब में लगातार गिरती कानून -व्यवस्था को लेकर विरोधी पक्ष सरकार पर निशाना साध रही है। पिछले समय दौरान कई वारदातें हुई, जिनकी गुत्थी अब तक नहीं सुलझ सकी। नाभा की हाई सक्योरिटी जेल  से आतंकवादी और गैंग्स्टरों का भाग जाना कानून -व्यवस्था पर बड़ा प्रश्न चिह्न लगाता है। 

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