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पंजाब मंत्रिमंडल ने दी 1,647 सेवा केंद्रों को बंद करने की मंजूरी

  • पंजाब मंत्रिमंडल ने दी 1,647 सेवा केंद्रों को बंद करने की मंजूरी
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Thursday, January 25, 2018-5:31 AM

चंडीगढ़(रमनजीत): पंजाब मंत्रिमंडल ने राज्य में चल रहे 2,147 सेवा केंद्रों में से सिर्फ 500 सेवा केंद्रों को ही चालू रखने का फैसला लिया है। बाकी सभी 1,647 सेवा केंद्र बंद कर दिए जाएंगे। 

पिछली अकाली-भाजपा सरकार द्वारा शुरू किए गए इस बड़े प्रोजैक्ट को बंद करने के लिए पंजाब सरकार सेवा प्रदाता को 180 दिन का नोटिस भेजेगी ताकि कानूनी प्रक्रिया पूरी करके सेवा केंद्रों को बंद किया जाए। वहीं, सेवा केंद्रों में मौजूदा बुनियादी ढांचे को आंगनबाड़ी या पंचायत घरों के तौर पर इस्तेमाल करने की संभावनाएं तलाशने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। 

यह बड़ा फैसला बुधवार को पंजाब मंत्रिमंडल की मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। इस वर्ष की पहली मंत्रिमंडल बैठक में नवजोत सिंह सिद्धू समेत सभी मंत्री मौजूद रहे। कैबिनेट ने राज्य में चल रहे मौजूदा सेवा केन्द्रों का समझौता खत्म करने के लिए सेवा प्रदान करने वाले ठेकेदार को 180 दिनों का नोटिस जारी करने का फैसला लिया है। जिस ठेकेदार द्वारा ये सेवा केंद्र चलाए जा रहे हैं वह सरकार से सालाना 220 करोड़ रुपए ले रहा है और यह समझौता 5 सालों के लिए था। 

मीटिंग में इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए यह पाया गया कि राज्य में सेवा केंद्रों के निर्माण पर 200 करोड़ रुपए का खर्चा आया था और 5 साल इन्हें चलाने के लिए अंदाजन 1,400 करोड़ रुपए और खर्चे जाने थे। स्वास्थ्य मंत्री ब्रह्म महिंद्रा ने इसे सरकारी खजाने की आपराधिक लूट करार देते हुए पूरे मामले की जांच कराने को कहा। वित्त विभाग के पुनर्गठन को मिली मंजूरी, 6 डायरैक्टोरेट होंगे स्थापित: वित्त विभाग के कार्य में कुशलता लाने के उद्देश्य से पंजाब मंत्रिमंडल द्वारा विभाग को अलग-अलग डायरैक्टोरेटों के रूप में पुनर्गठित करने को मंजूरी दे दी गई है। इसके अलावा कराधान व आबकारी विभाग में कमिश्नरेटों के विभाजन को भी मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृति दे दी गई।

वित्त विभाग में 6 अलग-अलग डायरैक्टोरेटों की स्थापना को स्वीकृत करने के दौरान विभाग को वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार करने की जरूरत पर बल दिया गया। जिन 6 अलग-अलग डायरैक्टोरेटों की स्थापना को हरी झंडी दी गई है, उनमें डायरैक्टोरेट ऑफ एक्सपैंडीचर, डायरैक्टोरेट ऑफ बजट एंड ट्रैजरी एंड अकाऊंट्स, डायरैक्टोरेट ऑफ ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमैंट, डायरैक्टोरेट ऑफ परफॉर्मैंस, रिव्यू एंड ऑडिट, डायरैक्टोरेट ऑफ बैंकिंग एंड इक्नॉमिक इंटैलीजैंस और डायरैक्टोरेट ऑफ लॉटरीज एंड स्माल सेविंग्स शामिल हैं। 

एक अन्य अहम फैसले के अंतर्गत मंत्रिमंडल द्वारा कर व आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली में और सुधार के लिए 17 नई पोस्टों की सृजना को भी स्वीकृति दे दी गई है। इसके अलावा विभाग की पंजाब एक्साइज एंड पंजाब टैक्सेशन कमीश्नरेट्स में विभाजन करने को भी स्वीकृति दे दी गई है। कर व आबकारी विभाग की तरफ से वर्ष 2016-17 के दौरान कुल 23,784 करोड़ रुपए का राजस्व एकत्रित किया गया जो कि राज्य का सबसे अधिक राजस्व एकत्रित करने वाला विभाग है।

वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने कहा कि जी.एस.टी. लागू होने से पहले विभाग के पास 2.50 लाख रजिस्टर्ड डीलर थे परंतु जुलाई 2017 में जी.एस.टी. (वस्तु एवं सेवा कर) के लागू होने से विभाग के कार्य में कई गुणा विस्तार हो गया। जी.एस.टी. से विभाग के पास डीलरों की संख्या में बड़ा विस्तार हो जाएगा जिससे कार्य की मात्रा भी बढ़ जाएगी। मंत्रिमंडल सैंक्शन अफसरों में पेशेवर पहुंच को बढ़ाने के मकसद से पंजाब राज्य (वित्त व लेखा) ग्रुप-ए के सेवा नियमों-2012 में संशोधन को स्वीकृत किया गया है। इसके अंतर्गत सैंक्शन अफसरों की भर्ती के समय विभागीय परीक्षा लिए जाने को स्वीकृति दे दी गई है। 

राज्य की खरीद एजैंसियों को केंद्रीय पोर्टल से ऑनलाइन खरीद की मंजूरी: सरकारी खरीदारी में गति, पारदर्शिता और कुशलता को बढ़ावा देने के लिए पंजाब मंत्रिमंडल द्वारा वस्तुएं और सेवाओं की सीधी ऑनलाइन खरीद के लिए सरकारी खरीद एजैंसियों को केंद्र सरकार का पोर्टल, गवर्नमैंट ई-मार्कीटप्लेस (जी.ई.एम.) का प्रयोग करने के लिए मंजूरी दे दी गई है। कैबिनेट द्वारा इस नियम को भी मंजूरी दे दी गई है कि राज्य सरकार के अधीन तैनात आई.ए.एस., आई.पी.एस. व अन्य ग्रुप-ए के अधिकारियों को प्रति वर्ष अपनी संपत्ति घोषित करनी होगी। करीबन 26,000 ग्रुप-ए अधिकारियों द्वारा घोषित संपत्ति की जानकारी को विधानसभा में भेजा जाएगा ताकि इसे सार्वजनिक किया जा सके। इस कदम को सरकार पारदर्शिता बढ़ाने वाला करार दे रही है। 

‘रैंटल हाऊसिंग अकम्मोडेशन’ पॉलिसी को मंजूरी 
पंजाब के विभिन्न शहरों में अस्थायी तौर पर रिहायश चाहने वालों के लिए राज्य सरकार की नई पॉलिसी काम करेगी। विदेशों की तर्ज पर बनाई गई नीति के तहत स्टूडैंट्स, निजी व सरकारी क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों व बुजुर्गों के लिए ‘रैंटल हाऊसिंग अकम्मोडेशन’ उपलब्ध होगी। कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई पॉलिसी के तहत ऐसी कॉलोनियां निर्मित करने वाले डिवैल्परों को सरकारी फीस व ई.डी.सी. वगैरह में 50 फीसदी तक छूट हासिल होगी। भविष्य में पॉलिसी में कोई बदलाव करने का अधिकार भी कैबिनेट द्वारा मुख्यमंत्री को दे दिया गया है। 

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