गौवंश की समस्या गंभीर पर फिर भी कर दिया जाता है अनदेखा

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Sunday, April 16, 2017-10:01 AM

अबोहर(भारद्वाज): एक तरफ जहां स्वयंभू गौरक्षक गौवंश को अपनी आस्था का प्रश्र बनाकर गौ तस्करी व गौ मांस खाने के शक में राजस्थान के अलवर में पहलूखान तथा दादरी में अखलाक जैसे लोगों को सरेआम मौत के घाट उतारने से भी पीछे नहीं हटते। वहीं देश के लगभग प्रत्येक शहर में यही गौवंश भूख की वजह से कूड़ा-कर्कट व प्लास्टिक आदि खाते सरेआम दिखते हैं तब इन्हीं स्वयंभू गौरक्षकों की आस्था पर कथित रूप से प्रश्र खड़े हो जाते हैं।   

गौरतलब है कि गौवंश की मौत का एक बड़ा कारण उनका प्लास्टिक व कूड़ा कर्कट खाना भी है, जिसकी वजह से प्रत्येक वर्ष सैंकड़ों गौवंश मौत के आगोश में जाते हैं लेकिन स्वयंभू गौरक्षकों को गौवंश की यह गंदी व शर्मसार करने वाली मौत कथित रूप से शायद नहीं चुभती क्योंकि अगर कथित गौरक्षकों को इससे कोई फर्क पड़ता होता तो वह भूख की वजह से कूड़ा-कर्कट खाने को मजबूर गौवंश की देखभाल व उसके खाने-पीने का इंतजाम करने हेतु आंदोलन स्तर पर बड़े कदम उठाते और गौवंश की दुर्दशा को ठीक करते हुए उन्हें मरने से बचाते। मामला बेहद गंभीर है लेकिन हर कोई इसे देखकर अनदेखा कर देता है। 

यहां तक कि स्वयंभू सर्टीफाइड गौरक्षक भी गौवंश के कूड़ा-कर्कट खाने के नजारों को देखते तो रोज हैं लेकिन संभवत: यह मामला उनके लिए राजनीति का नहीं बल्कि गौवंश के प्रति जिम्मेदारी का हो जाता है इसलिए वे इस बारे में चुप रहना व चर्चा तक न करना ही पसंद करते हैं। गौवंश को बचाना निश्चित तौर पर सरकार व समाज की जिम्मेदारी है और सभी को इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा, मेहनत व ईमानदारी से और बिना किसी राजनीतिक लाभ की सोच लिए निभाना चाहिए। 

क्या कहना है गौशाला मैनेजिंग कमेटी के प्रधान का
इस संबंधी गौशाला मैनेजिंग कमेटी के प्रधान फकीर चंद गोयल बेहद गंभीर विषय मानते हुए कहते हैं कि वह इस संबंध में प्रयास कर रहे हैं लेकिन इसके लिए सरकार व समाज का पूरा सहयोग अत्यावश्यक है। नशे के कारोबार में प्रसिद गांव दौल्ले वाला में सुबह करीब 4 बजे पुलिस ने करीब 300 पुलिस कर्मियो के साथ रेड की । गांव वालों के मुताबिक पुलिस करीब 100 मोटर साइकिल ले गए

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