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पंजाब में हो रही खालिस्तान की वापसी,कनाडा में तैयार हो रहा प्लान

  • पंजाब में हो रही खालिस्तान की वापसी,कनाडा में तैयार हो रहा प्लान
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Saturday, February 10, 2018-10:56 AM

जालंधर (राकेश बहल, सोमनाथ कैंथ): पंजाब में खालिस्तान की वापसी का प्लान कनाडा में तैयार हो रहा है। खुफिया एजैंसियों से मिली जानकारी के अनुसार कनाडा में कई ऐसे मॉड्यूल काम कर रहे हैं जो पाक खुफिया एजैंसी आई.एस.आई. के साथ मिलकर पंजाब में दोबारा आतंकवाद की वापसी करना चाहते हैं। पंजाब केसरी की तरफ से की गई इंवैस्टीगेशन के मुताबिक कनाडा में इस समय 12 कुख्यात आतंकी पंजाब में आतंकवाद की वापसी का तानाबाना बुन रहे हैं। इसका खुलासा बीते साल अमृतसर में 2 आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद हुआ था। इन आतंकियों से पूछताछ के हवाले से 4 कनाडाई नागरिकों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। खुफिया एजैंसियों के मुताबिक कनाडा में बैठे खालिस्तानी समर्थकों की तरफ से पंजाब में आतंक फैलाने और हत्याओं के लिए अब गैंगस्टरों और शार्प शूटरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन्हें फंडिंग खालिस्तानी समर्थकों द्वारा की जाती है। साथ ही पूर्व में मारे गए खालिस्तानी आतंकियों के परिवारों की मदद के लिए भी 
विदेश में बैठे कई खालिस्तानी समर्थक संगठन काम कर रहे हैं। 

 

इन 4 कनाडियनों पर दर्ज हो चुका केस
पिछले साल 2 आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद 4 कनाडाई नागरिकों पर केस दर्ज हुआ था। इनमें से एक गुरजीत सिंह चीमा कादियां के पास जग्गी चीमा गांव का रहने वाला है। चीमा 2016 में कनाडा से पंजाब आया था और फरवरी, 2017 में वापस कनाडा चला गया। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक पंजाब में प्रवास के दौरान चीमा ने कई गैंगस्टरों व आतंकियों से बात की थी। वहीं गुरप्रीत सिंह मोगा का रहना वाला है।  


कनाडा के एक बड़े पंजाबी समुदाय से संबंधित प्रतिष्ठित नेता के मुताबिक कनाडा में इस समय खालिस्तान को लेकर बड़ा अभियान चल रहा है, जो भारत की शांति के लिए बहुत खतरा है। इन्होंने इसके लिए पांच कारण बताए हैं। 1 कनाडा में ऐसे कई परिवार हैं जो कई साल पहले वहां जाकर सैटल हो गए थे। ऐसे परिवारों की दूसरी पीढ़ी अब जवान हो गई है। इस पीढ़ी को इनके माता-पिता ने यह बताया है कि पंजाब में सिखों पर अत्याचार होता है। मानवाधिकारों का हनन होता है। इस पीढ़ी को भारत से कोई लगाव नहीं है और न ही ये लोग कभी भारत गए हैं। 1984 के दंगों की कहानियां सुनाकर इनका माइंडवाश कर दिया गया है। इसलिए अब यह पीढ़ी भारत की सबसे बड़ी दुश्मन बन गई है। यही पीढ़ी अब कनाडा में खालिस्तान के लिए सोशल मीडिया पर प्रचार कर रही है। इनके दिमाग में केवल खालिस्तान चल रहा है। कनाडा में खालिस्तान के लिए यही पीढ़ी जमीन तैयार कर रही है। भारत विरोधी  प्रदर्शनों मे सबसे ज्यादा युवा इसी पीढ़ी के होते हैं। 

 

पिछले 3-4 सालों में भारतीय अधिकारियों के कार्यक्रमों में खालिस्तान समर्थकों को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है जिस कारण वहां धर्मनिरपेक्ष लॉबी कमजोर हुई है। धर्मनिरपेक्ष लॉबी को भारतीय अधिकारी मोदी विरोधी मानते हैं। यह एक बड़ा कारण है खालिस्तानी समर्थकों के हौसले बढ़ाने का।   भारतीय अधिकारियों की तरफ  से पंजाबी समुदाय को अपने साथ जोडऩे के कोई सकारात्मक प्रयास नहीं किए गए हैं। यहां हो रहे भारत विरोधी प्रचार को रोकने या उसका जवाब देने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। भारतीय अधिकारी केवल बड़ी-छोटी पार्टियों का आयोजन ही करते हैं। यहां रह रहे लोगों को पेश आ रही मुश्किलों जहां तक कि भारत जाने के लिए वीजा लेने की समस्या तक को यह हल नहीं करते। यह एक बड़ा कारण है पंजाबी समुदाय की भारतीय अधिकारियों से दूरियां बढऩे का। कनाडा के राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के लिए खालिस्तानी समर्थकों को संरक्षण देते हैं। इसके एवज में उनको वोटें भी मिलती हैं। इसके साथ-साथ खालिस्तानी समर्थक इन्हें चुनावों में फंड भी देते हैं। वर्तमान सरकार में खालिस्तान के कई समर्थक हैं। राजनीतिक दलों के इस रवैए के कारण ही यहां भारत विरोधी तत्वों के हौसले बुलंद हो गए हैं।  कनाडा में आई.एस.आई. ने अपना बड़ा बेस बनाया हुआ है। आई.एस.आई. के लोग खुलेआम खालिस्तानी संगठनों की मदद करते हैं। यहां तक कि मीटिंगों में भी आई.एस.आई. के लोग रहते हैं।


पी.एम. जस्टिन ट्रूडो 17 फरवरी को भारत आएंगे


कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो 17 फरवरी को एक सप्ताह की भारत यात्रा पर आ रहे हैं। उनकी यह यात्रा कनाडा में खालिस्तान समर्थक संगठनों के मुखर होने के आरोपों के बीच हो रही है। यह भी कहा जाता रहा है कि ट्रूडो सरकार उनके प्रति नरम है। टोरंटो में पिछले साल ‘खालिस्तान इवैंट’ में ट्रूडो की उपस्थिति पर भारत में आपत्ति जताई गई थी। हाल में कनाडा के ओंटारियो में कई गुरुद्वारों में भारतीय अधिकारियों के प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया गया था। 
समझा जा रहा है कि कनाडाई प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उनसे आतंकवाद का मुद्दा उठा सकते हैं। दरअसल, कनाडा में इन दिनों न्यू डैमोक्रेटिक पार्टी के नेता जगमीत सिंह का जनाधार बढऩे लगा है। न्यू डैमोक्रेटिक पार्टी कनाडा में 3 बड़ी पार्टियों में से एक है। जगमीत सिंह 1984 के सिख दंगों का मसला उठाते रहे हैं। अपनी भारत यात्रा के दौरान ट्रूडो के राजधानी दिल्ली के अलावा हरमंदिर साहिब आने की भी संभावना है। 


18 महीनों में ट्रूडो सरकार के 11 मंत्री भारत आए


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अप्रैल, 2015 में कनाडा की आधिकारिक यात्रा पर गए थे तब ट्रूडो ने उनसे लिबरल पार्टी के नेता के तौर पर मुलाकात की थी। ट्रूडो नवम्बर, 2015 में सत्ता में आए थे। इसके बाद वाशिंगटन, हैम्बर्ग और मनीला में विभिन्न सम्मेलनों के दौरान भी दोनों प्रधानमंत्री मिल चुके हैं। पिछले 18 महीने में ट्रूडो सरकार के 11 मंत्री भारत आ चुके हैं। ट्रूडो राजनेताओं और बिजनैस लीडर्स से मिलने के अलावा महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रमों को बढ़ावा देंगे और स्टूडैंट्स से भी बात करेंगे। भारतीय स्टूडैंट्स के लिए कनाडा पसंदीदा डैस्टीनेशन बन रहा है। पिछले साल करीब सवा लाख भारतीयों के पास कनाडा का स्टडी परमिट था। 

कनाडा में सक्रिय गैंग भी खालिस्तानी 
कनाडा में इस समय ड्रग की तस्करी करने वाले कई गैंग सक्रिय हैं। खुफिया एजैंसियों के पास ऐसी पुख्ता जानकारी है कि इन गैंगों की भी आई.एस.आई. मदद करती है। इसके एवज में ये गैंग खालिस्तानी मॉड्यूल के लिए युवकों को तैयार करते हैं। वहीं कनाडा में इस समय खालिस्तानी समर्थक संगठन सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं। यह संगठन पंजाब पुलिस के खिलाफ  झूठा प्रचार कर यहां के लोगों को अपने साथ जोडऩे की कोशिश करते हैं।

 

 2 सालों में इन हिंन्दू नेताओं को बनाया गया निशाना
  23 अप्रैल 2016 को खन्ना में शिवसेना नेता दुर्गा गुप्ता की हत्या
  6 अगस्त 2016 को जालंधर में आर.एस.एस. प्रमुख जगदीश गगनेजा की हत्या
 14 जनवरी 2017 को लुधियाना स्थित दुर्गा माता मंदिर के पास हिन्दू नेता अमित शर्मा की हत्या
  25 फरवरी 2017 को गांव जगेड़ा के नाम चर्चा घर में डेरा प्रेमी सतपाल शर्मा और बेटा रमेश शर्मा 
  16 जून 2017 को लुधियाना के पीरु बंदा मोहल्ला में पास्टर सुलतान का मर्डर 
  17 अक्तूबर 2017 को आर.एस.एस. शाखा प्रमुख रविंदर गोसाईं की घर के बाहर हत्या

 

आई.एस.आई. को भी फंङ्क्षडग 
खुफिया एजैंसियों के मुताबिक खालिस्तान के लिए सबसे ज्यादा फंड कनाडा में ही जमा किया जाता है। यही नहीं कनाडा में बैठे कुछ खालिस्तानी समर्थकों की तरफ से आई.एस.आई. को भी पंजाब में आतंक फैलाने के लिए फंङ्क्षडग की जाती है।
केन्द्रीय खुफिया एजैंसियों की रिपोर्ट के अनुसार कनाडा में इस समय बब्बर खालसा इंटरनैशनल, इंटरनैशनल सिख यूथ फैडरेशन, खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स सक्रिय हैं। इन संगठनों की तरफ से कनाडा में खुलेआम खालिस्तान का प्रचार किया जाता है। इसके साथ-साथ खुलेआम मीटिंगें करके फंड इक_ा किया जाता है। भारत सरकार ने कुछ समय पहले कनाडा सरकार से 4 खालिस्तानी आतंकियों के भारत प्रत्यर्पण की भी मांग की थी। पंजाब पुलिस ने बीते दिनों हिन्दू नेताओं की हत्या करने वाले जिन आतंकियों को पकड़ा था उससे की गई जांच में भी यह बात सामने आई थी कि इसके पीछे कनाडा और यू.के. में चल रहे खालिस्तानी मॉड्यूल का हाथ है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि इस समय कनाडा में ऐसे 8 मॉड्यूल काम कर रहे हैं, जो पाक खुफिया एजैंसी आई.एस.आई. के साथ मिलकर पंजाब में दोबारा आतंकवाद की 
वापसी करना चाहते हैं। 

 

12 कुख्यात आतंकी चला रहे नैटवर्क
खुफिया विभाग के पास जानकारी है कि 12 कुख्यात आतंकी कनाडा में आई.एस.आई. की मदद से पंजाब में आतंकवाद की वापसी के लिए नैटवर्क चला रहे हैं। नैटवर्क बनाने और उसे चलाने में आई.एस.आई. सहयोग कर रही है। खुफिया एजैंसियों के मुताबिक कई ऐसे कट्टरपंथी सिख हैं जो आतंकवाद के समय पंजाब से कनाडा जाकर सैटल हो गए थे। यह लोग अब आॢथक तौर पर सम्पन्न हो गए हैं। इनमें से कइयों को भारत में काली सूची में डाला गया है। यह अमीर खालिस्तानी समर्थक कनाडा में हर जगह खालिस्तान को प्रमोट कर रहे हैं। इसके लिए फंङ्क्षडग भी यही खालिस्तानी समर्थक कर रहे हैं। इंटैलीजैंस के पास ऐसी सूचना है कि पंजाब में सक्रिय कुछ कट्टरपंथी नेताओं को भी खालिस्तान का प्रचार करने के लिए पैसा कनाडा से आ रहा है। 


एक आला अधिकारी का कहना है कि पाकिस्तानी खुफिया एजैंसी आई.एस.आई. जाली दस्तावेजों के आधार पर पाकिस्तान में रह रहे बब्बर खालसा के आतंकी वधावा सिंह, खालिस्तान कमांडो फोर्स के चीफ परमजीत सिंह पंजवड़ और इंटरनैशनल सिख यूथ फैडरेशन के चीफ लखबीर सिंह रोडे का कनाडा दौरा अक्सर करवाती रहती है। पिछले दिनों इन खालिस्तानी आतंकियों की काफी मीटिंगें वेंकूवर, ओंटारियो आदि शहरों में हो चुकी हैं। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय एजैंसियों ने कनाडा में हो रही भारत विरोधी गतिविधियों की जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को भी दी है। 

 

ब्रिटिश कोलम्बिया के मिशन सिटी में ट्रेनिंग कैंप

पठानकोट हमले के 6 महीने बाद इंटैलीजैंस एजैंसियों ने कनाडा की जस्टिन ट्रूडो सरकार को खालिस्तानी आतंकवादियों द्वारा पंजाब विरोधी गतिविधियों के लिए कनाडा में चलाए जा रहे ट्रेनिंग कैंप बारे अलर्ट किया था। इंटैलीजैंस अधिकारियों की रिपोर्टों के मुताबिक कनाडाई सिख नागरिक हरदीप निझर खालिस्तान टैरर फोर्स(के.टी.एफ.) का हैड बना है। उसने हमलों के लिए युवाओं का एक मॉड्यूल तैयार किया है। रिपोर्ट में पठानकोट हमले का संदर्भ देते हुए कहा गया है कि निझर पाकिस्तान से हथियार हासिल करना चाह रहा है लेकिन पठानकोट हमले के कारण सीमा पर जारी अलर्ट से उसके मंसूबे पूरे नहीं हो रहे। पंजाब सरकार हरदीप निझर के प्रत्यर्पण के लिए विदेश मंत्रालय सहित गृह मंत्रालय को भी रिपोर्ट सबमिट कर चुकी है। निझर पंजाब में घोषित आतंकवादी है और 1995 से कनाडाई पासपोर्ट पर कनाडा में रह रहा है। वह लुधियाना के शिंगार सिनेमा में 2007 में हुए विस्फोट में वांछित है। इस विस्फोट में 6 लोग मारे गए थे। यह खुलासा के.टी.एफ. सदस्य मनदीप सिंह की लुधियाना के गांव चक्क कलां में गिरफ्तारी के बाद हुआ था। 

 


रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल थाइलैंड में के.टी.एफ . के पूर्व प्रमुख जगतार तारा की गिरफ्तारी के बाद से निझर कनाडा में अपने समूह के सदस्यों को हथियारों का प्रशिक्षण दे रहा है। हाल ही में वह मनदीप सिंह के अलावा 3 और सिख युवकों को ए.के. 47 चलाने का प्रशिक्षण देने के लिए ब्रिटिश कोलम्बिया के  मिशन सिटी के पास एक रेंज में ले गया था, जहां पर उनको प्रतिदिन 4 घंटे राइफल चलानी होती थी। 

 


पत्रिका में खालिस्तान की वापसी का इशारा


इन दिनों चर्चा में चल रही एक पत्रिका में भी पंजाब में खालिस्तान की वापसी की तरफ इशारा किया गया है। समझा जा रहा है कि अब खालिस्तानी समर्थकों का केंद्रबिंदु कनाडा बन गया है और पंजाब के खिलाफ आतंकवाद का खेल विदेशी हाथों में खेला जा रहा है। 1970 के दशक की सुनी-सुनाई कहावत है ‘दलदल और छाया’ रियलिटी बन गई है। क्या आतंकवाद नए अवतार के रूप में वापस आ रहा है। विदेशी गुरुद्वारों में भारतीय अफसरों के प्रवेश पर पाबंदी क्यों लगाई जा रही है। यह पाबंदी केवल भारतीय अफसरों पर ही नहीं कूटनीतिज्ञों पर भी है। यह वास्तव में क्यों हो रहा है। भारत के बाद कनाडा और अमरीका ही दो देश ऐसे हैं जहां सबसे ज्यादा सिख समुदाय के लोग रहते हैं। 

 


गुरुद्वारों में भारतीय अफसरों के प्रवेश पर पाबंदी दिसम्बर, 2017 में कनाडा स्थित 14 गुरुद्वारों की मैनेजमैंट द्वारा जारी बयान के बाद लगाई गई थी। यह पाबंदी ब्रिटिश नागरिक जगतार सिंह जौहल की गिरफ्तारी के तुरंत बाद लगाई गई थी। जौहल अक्तूबर, 2017 में शादी करवाने के लिए पंजाब आया था। पंजाब पुलिस द्वारा पिछले 2 सालों में पंजाब में हुई संघ नेताओं की हत्याओं में हाथ होने के शक के आधार पर जग्गी जौहल को गिरफ्तार किया गया था।  जौहल की गिरफ्तारी का यू.के. स्थित कुछ संस्थाओं द्वारा विरोध किया गया था। जग्गी जौहल की गिरफ्तारी के तुरंत बाद भारतीय अफसरों के गुरुद्वारों में प्रवेश पर पाबंदी का केस सबसे पहले मेलबोर्न में सामने आया था। उसके पश्चात कनाडा स्थित गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों के फैसला लेने के बाद यू.एस. के 96 गुरुद्वारों में भी भारतीय अधिकारियों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई थी। यह पाबंदी आर.एस.एस. और शिवसेना सदस्यों के प्रवेश पर भी लगाई गई थी। साथ में जग्गी जौहल की रिहाई की मांग भी विश्व स्तर पर उठाई गई थी। 

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