नोटबंदी ने हिला दी मार्कीट, राशन की तरह दवाइयां खरीदने लगे लोग

Edited By Updated: 25 Nov, 2016 12:14 PM

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अस्पतालों में आज मध्यरात्रि से 1000 और 500 के नोट बंद होने के समाचार से लोगों में अफरा-तफरी का आलम बना रहा। ऐसे मरीज, जिनकी लंबे समय तक दवाइयां चलनी हैं

लुधियाना (सहगल): अस्पतालों में आज मध्यरात्रि से 1000 और 500 के नोट बंद होने के समाचार से लोगों में अफरा-तफरी का आलम बना रहा। ऐसे मरीज, जिनकी लंबे समय तक दवाइयां चलनी हैं, तीन से चार महीने की दवा राशन की तरह लेते दिखे। शहर के बड़े अस्पतालों दयानंद मैडीकल कालेज व सी.एम.सी. में यही आलम शाम तक रहा। दयानंद अस्पताल की फॉर्मैसी से दवा लेने आए एक मरीज रविंद्र ने बताया कि वह शूगर और ब्लड प्रैशर की दवा नियमित रूप से खा रहा है। आज से पुराने नोट अस्पतालों में चलने बंद होने की खबर सुनकर वह 3 महीने की दवा लेने आया है। इसके अलावा वह अपने पिता जो दिल के मरीज हैं, की भी 3 महीने की दवा ले रहा है। साथ में रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली बुखार, पेट दर्द आदि की दवाई भी ले रहा है। एक अन्य व्यक्ति सुरिंद्र सिंह ने बताया कि घर में 3 सदस्यों की दवाइयां नियमित रूप से चलती हैं। वह 3 से 4 महीने की दवाइयां ले रहा है, जो कई हजार रुपए की बैठेगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि जब तक दवाइयां खत्म होंगी, हालात भी सामान्य हो चुके होंगे। 

 

नोटबंदी ने हिला दी मार्कीट
नोटबंदी से होलसेल दवा बाजार बुरी तरह हिलकर रह गया है। पुरानी करंसी का चलन बंद होने से होलसेल दवा में बिक्री 10 प्रतिशत रह गई है। होलसेल कैमिस्ट एसोसिएशन के वरिष्ठ उपप्रधान हरीश कपिला ने बताया कि रोज 2000 रुपए की करंसी निकालने की सुविधा देने से मानों सारा देश बैंकों और ए.टी.एम्ज तक ही सीमित हो गया है। बाजारों में रौनक कम हो गई है। रिटेल कैमिस्ट अगर पुरानी करंसी लेकर आते हैं तो होलसेल दवा बाजार से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है, जिस पर रिटेल कैमिस्ट भी अब बंद हो चुके नोट लेने से इंकार करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को दवा बाजार को छूट देनी चाहिए थी, ताकि लोगों को जीवन रक्षक दवाइयां आसानी से उपलब्ध रहतीं और ऐसे लोगों को भी राहत मिलती, जो नियमित रूप से किसी न किसी तरह की दवाइयां खा रहे हैं। 

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