मरे बेटे को चीख-चीखकर पुकारती रही मां, देख हर आंख हुर्इ नम

  • मरे बेटे को चीख-चीखकर पुकारती रही मां, देख हर आंख हुर्इ नम
You Are HerePunjab
Wednesday, November 29, 2017-9:31 AM

जालंधर (महेश): मां सुरजीत कौर, पिता बलविन्द्र सिंह व बहन शरणजीत कौर शैली की आंखों के आंसू अभी भी नहीं थम रहे। यह गमगीन माहौल भारतीय समय के अनुसार सोमवार को सुबह 10 बजे के करीब जैक्सन सिटी (अमरीका) में लुटेरों द्वारा कत्ल किए गए संदीप सिंह के जालंधर स्थित न्यू डिफैंस कालोनी फेज-1 (दीप नगर) बडिंग़ रोड में स्थित घर में मंगलवार को देखने को मिला। मां सुरजीत कौर ऊंचे स्वर में अपने बेटे को आवाजें मारते हुए कह रही थी, ‘‘मेरे जवान पुत दी जान लैण वालेयां नूं रब कदे भी माफ नहीं करेगा। उहनां दा कुझ नहीं रहणा, सब कुझ उजड़ जाएगा। उसदे पुत दा मोबाइल, पैसे खोहणे सी ते खो लैंदे पर उसदे पुत नंू उस कोलों खोहण दा उहनां नूं अधिकार किसे ने नहीं सी दित्ता।’’ 

PunjabKesari


अब कौन कहेगा शैली-शैली!
 अमरीका में नीग्रो लुटेरों द्वारा कत्ल किए गए संदीप सिंह की वूमैन खालसा कालेज में ग्रैजुएशन की पढ़ाई कर रही इकलौती बहन शरणजीत कौर शैली ने अपने इकलौते भाई के हमेशा के उसे छोड़ जाने पर कहा कि अब उसे कौन शैली-शैली कहकर बुलाएगा। उसने बताया कि उसका अपने भाई के साथ बहुत ही प्यार था। जब भी उसका अमरीका से फोन आता था तो वह काफी देर तक उससे बात करता रहता था। उसने अपने भाई के साथ कमरे में लगी हुई अपनी फोटो की तरफ देखते हुए कहा कि अब उसके पास यह फोटो ही रह गई है। उसने कहा कि उसका भाई लाखों में एक था। हर बहन को भाई तो ऐसा मिले लेकिन किसी भी बहन का भाई इस तरह उसे छोड़कर कभी न जाए। 

PunjabKesari


दोस्तों को नहीं हो रहा संदीप की मौत पर विश्वास
 दोस्त की मौत की खबर मिलते ही उसके निवास पर पहुंचे करीब आधा दर्जन दोस्तों को संदीप की मौत पर अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है। संदीप के दोस्तों नेर रंजन, राजन, मोहित, बाबू तथा साहिल सभी बङ्क्षडग़ निवासियों ने बताया कि वे संदीप के साथ बङ्क्षडग़ ग्राऊंड में वॉलीबाल खेला करते थे। वह आयु में उनसे कुछ बड़ा था लेकिन उन्हें प्यार दोस्त की तरह नहीं छोटे भाई की तरह करता था। उन्होंने संदीप के साथ बिताए अपने पलों के बारे में बताते हुए उन्हें ताजा किया और कहा कि उन्हें यकीन नहीं आ रहा है कि उनका दोस्त उन्हें हमेशा के लिए छोड़कर चला गया है। संदीप के पिता के पास खड़े सभी दोस्तों की आंखों से आंसू टपक रहे थे। उनसे संदीप की फोटो तक भी नहीं देखी जा रही थी। 


ग्रीन कार्ड लेकर संदीप ने जनवरी में आना था इंडिया
 4 साल पहले 2013 में संदीप उस समय अमरीका चला गया था जब उसने 12वीं कक्षा की परीक्षा दी थी लेकिन अभी परिणाम आना बाकी था। उसके परिजनों ने उसके अमरीका पहुंचने पर उसे बताया कि वह परीक्षा में पास हो गया है। उसने वहां पहुंचने के 6 माह बाद ही पी.आर. हासिल कर ली थी लेकिन ग्रीन कार्ड लेने को लेकर काफी समय लग जाता है जिसके वह इंतजार में था। उसने इस संबंधी सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली थीं। परिजनों के बताने के मुताबिक संदीप ने जनवरी, 2018 में ग्रीन कार्ड लेने के बाद इंडिया पहली बार आना था। उसने 10वीं तक की पढ़ाई सेंट सोल्जर डिवाइन पब्लिक स्कूल नंगल करार खां से और 11वीं व 12वीं शिवालिक हिल्ज स्कूल गढ़ा से की थी। पढ़ाई में वह काफी होशियार था लेकिन उसका सपना था कि वह छोटी आयु में ही अपने माता-पिता तथा बहन के लिए कुछ करके दिखाए। इसी उद्देश्य से वह विदेश चला गया था। 

 रविवार को शव पहुंचेगा इंडिया
 संदीप का शव रविवार को इंडिया पहुंचने की उम्मीद है। शव को विदेश से लाने के लिए वहां रहते उसके रिश्तेदारों द्वारा औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। पिता बलविन्द्र सिंह ने बताया कि बेटे के शव के घर पहुंचने पर ही उसके अंतिम संस्कार का समय तय किया जाएगा। अमरीका के कानून के मुताबिक औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है। सोमवार से लगातार संदीप के घर में उसकी मौत को लेकर संवेदना प्रकट करने वालों का तांता लगा है। क्षेत्र में रहते हर निवासी की आंख नम है और सन्नाटा पसरा हुआ है। मां-बाप और बहन घर में लगी हुई लोगों की भीड़ को देखकर बहुत हैरान हैं कि यह दुख का कैसा समय परमात्मा ने उन्हें दिखाया है। वे खुशी के  इंतजार में थे लेकिन सब कुछ मातम में बदल गया।

मृतक का पिता बोला, बेटे के आने की खुशी में सजा रहे थे घर
मृतक संदीप के पुलिस मुलाजिम पिता बलविन्द्र सिंह ने बताया कि वह मूल रूप से थाना भोगपुर (देहाती पुलिस) के गांव भटनूरा के निवासी हैं। वह आर्थिक तौर पर बहुत मजबूत नहीं थे। बतौर कांस्टेबल पंजाब पुलिस में भर्ती हुए और अब हैड कांस्टेबल के रूप में थाना रामा मंडी में नाइट मुंशी की ड्यूटी निभा रहे हैं। वह पहले बडिंग़ में किराए के मकान में रहते थे। उसके बाद उन्होंने न्यू डिफैंस कालोनी फेज-1 में जगह खरीदी और मकान बनाना शुरू किया। बेटे को 12वीं तक पढ़ाने के बाद अमरीका भेजा, बेटी की पढ़ाई को भी जारी रखा। बेटे के विदेश जाने के बाद उनके घर के हालात बदलते गए। बेटे ने अमरीका में जाकर कड़ी मेहनत की और उन्हें पैसे भी भेजने शुरू किए तथा नई गाड़ी लेने पर भी जोर देता रहा लेकिन उन्होंने अपना मोटरसाइकिल नहीं छोड़ा। संदीप पर उन्हें हमेशा नाज रहेगा, वह अपने मां-बाप का बहुत ही आज्ञाकारी बेटा था। संदीप के विदेश से आने की उन्हें बेहद खुशी थी इसलिए वह अपने नए घर को पूरी तरह से सजाने में लगे हुए थे। 

यहाँ आप निःशुल्क रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, भारत मॅट्रिमोनी के लिए!