निगमों में इंस्पैक्टरों के मुकाबले बढ़ गई सुपरिंटैंडैंटों की फौज

Edited By Punjab Kesari,Updated: 23 Oct, 2017 04:28 PM

municipal corporation

लोकल बॉडीज विभाग में नवजोत सिद्धू के मंत्री बनने के बाद पहली बार हुई प्रमोशनों के चलते नगर निगमों में इंस्पैक्टरों के मुकाबले सुपरिंटैंडैंटों की फौज बढ़ गई है। अगर निगम में इंस्पैक्टरों व सुपरिंटैंडैंटों की वर्किंग की बात करें तो हाऊस टैक्स, वाटर...

लुधियाना(हितेश): लोकल बॉडीज विभाग में नवजोत सिद्धू के मंत्री बनने के बाद पहली बार हुई प्रमोशनों के चलते नगर निगमों में इंस्पैक्टरों के मुकाबले सुपरिंटैंडैंटों की फौज बढ़ गई है। अगर निगम में इंस्पैक्टरों व सुपरिंटैंडैंटों की वर्किंग की बात करें तो हाऊस टैक्स, वाटर रेट, विज्ञापन व तहबाजारी ब्रांच में ही उनकी तैनाती होती है, जिनमें से हाऊस टैक्स इंस्पैक्टरों को बकाया राजस्व की वसूली के लिए डिफाल्टरों पर कार्रवाई तथा प्रापर्टी की मलकीयत बदलने या नया नंबर लगाने के केसों में मौके की रिपोर्ट करने का जिम्मा मिला हुआ है। जबकि तहबाजारी शाखा के इंस्पैक्टरों द्वारा अतिक्रमणों पर कार्रवाई के अलावा जुर्माना वसूलने की ड्यूटी निभाई जा रही है। 

दूसरी तरफ सुपरिंटैंडैंटों द्वारा प्रापर्टी टैक्स व पानी-सीवरेज के बिलों की रिकवरी की मोनीटरिंग के अलावा प्रापर्टी की मलकीयत बदलने या नया नंबर लगाने सहित टी.एस. वन जारी करने संबंधी इंस्पैक्टरोंद्वारा तैयार किए जाते केसों को मंजूरी दी जाती है। ऐसे में सुपरिंटैंडैंटों से ज्यादा इंस्पैक्टरों की जरूरत है। लेकिन यहां हालात बिल्कुल उल्ट हैं। जिस कारण एक-एक जोन में हाऊस टैक्स के ब्लाक बांटकर कई सुपरिंटैंडैंटों को लगाया गया है और कई सुपरिंटैंडैंट तो बिना काम के बैठे हुए हैं। अब सरकार ने जो 21 इंस्पैक्टरों को सुपरिंटैंडैंट बनाने का फैसला किया है, उससे निगम में इंस्पैक्टरों के मुकाबले सुपरिंटैंडैंटों की फौज बढ़ गई है। क्योंकि 20 सुपरिंटैंडैंट तो पहले से ही काम कर रहे थे और अब 9 नए सुपरिंटैंडैंट बनाकर लुधियाना भेज दिए गए हैं। इनके मुकाबले पूरी निगम में इंस्पैक्टरों की संख्या सिर्फ 25 बताई जाती है। जिस कारण कई जगह तो क्लर्कों से इंस्पैक्टर का काम लिया जा रहा है। लेकिन क्लर्कों व इंस्पैक्टरों की कमी पूरी करने की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। 

चुंगी खत्म होने के 11 साल बाद भी चल रही पोस्टें
निगम में थोक के भाव सुपरिंटैंडैंटों की तैनाती होने की वजह है कि चुंगी खत्म होने के 11 साल बाद भी 12 पोस्टें चल रही हैं, जिनको खत्म नहीं किया गया और उन पोस्टों के बदले अधिकारी यहां पोसिं्टग पाने में कामयाब हो रहे हैं। जो प्रोमोशन के बाद भी लुधियाना नहीं छोडऩा चाहते। जबकि जी.एस.टी. लागू होने के चलते बिजली पर चुंगी खत्म होने के चलते वैसे ही स्टाफ की जरूरत नहीं रही, क्योंकि पैट्रोल-डीजल पर चुंगी की वसूली सरकार के जरिए हो रही है।

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