डाक्टर ही नहीं, अस्पताल भी हो सकते हैं अवैध लिंग जांच स्कैनिंग में शामिल

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Tuesday, June 20, 2017-8:01 AM

लुधियाना (सहगल): घरों के अंदर अवैध रूप से चलाए जा रहे अल्ट्रासाऊंड स्कैनिंग सैंटरों के मामले में आज सेहत विभाग और पुलिस ने हैबोवाल स्थित बचन सिंह नगर में एक घर से अवैध अल्ट्रासाऊंड मशीन बरामद की है। 19 दिनों में महानगर में यह तीसरी अल्ट्रासाऊंड मशीन बरामद हुई है। पहली 2 मशीनों की तरह यह पोर्टेबल अल्ट्रासाऊंड मशीन भी नामी कम्पनी की है। छापामारी के दौरान यह मशीन घर की सीढिय़ों के नीचे पैक करके रखी हुई मिली।

मौके पर पुलिस ने घर के मालिक जतिंद्र अरोड़ा को भी गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस थाना मॉडल टाऊन के प्रभारी सुरिंद्र चोपड़ा के अनुसार आरोपी जतिंद्र फ्रीलॉसिंग के तौर पर पी.आर.ओ. का काम करता था तथा स्वयं घर पर महिलाओं की स्कैनिंग करता था। वह अढ़ाई वर्षों से अवैध लिंग जांच के काम में जुटा था। इस धंधे में जांच के बाद महिलाओं के गर्भ में पल रहे भ्रूण के ङ्क्षलग के बारे में बताया जाता था परंतु महिलाओं को किन अस्पतालों में अबॉर्शन के लिए रैफर किया जाता था, यह अभी सामने नहीं आया है, क्योंकि गर्भ में लड़की होने पर लोग अबॉर्शन के लिए तैयार हो जाते हैं।

सूत्रों के अनुसार इस धंधे में डाक्टरों के अलावा कुछ निजी अस्पतालों आदि की भागीदारी से भी इंकार नहीं किया जा सकता। पुलिस व सेहत अधिकारी अभी इसे जांच का विषय बताकर मौन धारण किए बैठे हैं। पुलिस अधिकारी के अनुसार आने वाले दिनों में कुछ और खुलासे हो सकते हैं। 

विशाल नैटवर्क की संभावना 
सेहत व पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आज पकड़ा गया आरोपी अन्य आरोपियों को भी जानता था। इससे महानगर में अवैध रूप से चल रहे स्कैनिंग सैंटरों के नैटवर्क से इंकार नहीं किया जा सकता। इस नैटवर्क में कौन-कौन से डाक्टर, रेडियोलॉजिस्ट व अस्पताल शामिल हैं। इससे पर्दा उठना शेष है। इससे पहले 7 जून को पक्खोवाल के गांव दाद में भूपिंद्र सिंह नामक व्यक्ति के घर से अल्ट्रासाऊंड मशीन बरामद हुई थी, जो छापामारी से पहले ही अपने घर से परिवार सहित फरार हो गया था।

एक जून को जम्मू कालोनी की गली नंबर-8 से छापामारी कर पुलिस ने मुल्खराज नामक व्यक्ति के घर से अल्ट्रासाऊंड मशीन बरामद की थी। बाद में मुल्खराज की धरपकड़ कर जब पूछताछ की गई तो उसने भूपिंद्र सिंह के बारे में जानकारी दी थी। 

अभी भी कई रहस्य सामने आने बाकी 
-ऐसे कई यक्ष प्रश्न हैं, जिनके जवाब सामने आने बाकी हैं। 
-इन तीनों मशीनों का खरीदार कौन है? क्या कम्पनी से इस बारे में पूछताछ की गई?
-स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार नामी कम्पनी सिर्फ डाक्टरों को ही अल्ट्रासाऊंड मशीनें बेचती है। अन्य कोई ऐसी मशीन नहीं खरीद सकता। 
-1 जून को पकड़ी गई मशीन को चलाने में जिस डाक्टर व उसके सहयोगी का नाम आया, उस मामले में क्या कार्रवाई हुई?
-आरोपी जतिंद्र अरोड़ा किन अस्पतालों के लिए पी.आर.ओ. का काम करता था और अस्पतालों को कैसे मरीज रैफर करता था। क्या उनका रिकॉर्ड तलब किया?
-अब तक लिंग जांच के बाद कितने लोग कन्या भू्रण हत्या के लिए गए। उनका अबॉर्शन किसने किया?

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