हर साल सड़क हादसों की भेंट चढ़ते हैं 4500 से अधिक लोग,कई बार तो पूरा परिवार हो जाता है खत्म

  • हर साल सड़क हादसों की भेंट चढ़ते हैं 4500 से अधिक लोग,कई बार तो पूरा परिवार हो जाता है खत्म
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Monday, September 11, 2017-11:11 AM

श्री मुक्तसर साहिब(तनेजा): वर्तमान में सड़कों में वाहनों की आवाजाही बहुत ज्यादा बढ़ गई है। कुछ अति गरीब परिवारों को छोड़कर हर घर में कई-कई वाहन हैं। सूर्य उदय होने से पूर्व ही अंधेरे में बसों, कारों, ट्रकों, मोटरसाइकिलों व अन्य वाहनों की गूंज शुरू हो जाती है तथा सड़कों पर वाहन ही वाहन दिखाई देते हैं। एक सर्वे के अनुसार 1990 के मुकाबले अब वाहनों की संख्या 3 गुना बढ़ गई है, परंतु उस हिसाब से सड़कों में बढ़ौतरी नहीं हुई जिस कारण कई जगहों पर अभी भी ट्रैफिक  जाम हो जाता है। 

अपनी मंजिल पर जल्द पहुंचने के लिए लोग वाहनों को तेज गति से चलाते हैं जिस कारण सड़कों पर हो रहे हादसों की संख्या में दिन-प्रतिदिन बढ़ौतरी हो रही है तथा इन सड़क दुर्घटनाओं में प्रतिदिन मानव रक्त बहता है, कई मौतें होती हैं और अनेकों लोग घायल हो जाते हैं। प्रत्येक वर्ष सड़क हादसों में करोड़ों रुपए की मशीनरी बर्बाद हो जाती है। घायल हुए लोगों के उपचार पर भी लाखों रुपए खर्च होते हैं। इस अति गंभीर मामले के संबंध में पंजाब केसरी द्वारा यह विशेष रिपोर्ट तैयार की गई है, जिस दौरान पता चला है कि राज्य भर में प्रत्येक वर्ष सड़क हादसों दौरान 4500 से अधिक मौतें होती हैं। 

अगर देखा जाए तो हर माह करीब 360 व प्रतिदिन 10 से 12 मौतें औसतन हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त राज्य के 22 जिलों मे 20 हजार से अधिक लोग सड़क हादसों में घायल हो जाते हैं। इनमें 2,000 लोग ऐसे भी होते हैं जो इन हादसों के दौरान अपने शरीर के अंग गंवा कर हमेशा के लिए अपाहिज होकर रह जाते हैं जबकि कई बार सिर की चोटों के कारण मानसिक रोगी भी बन जाते हैं। ऐसे हादसों के कारण कई लोगों का आर्थिक संतुलन भी बिगड़ जाता है। उनके सिर कर्जा चढ़ जाता है व जमीनों, घर सहित अन्य सामान बिक जाता है। इन सड़क दुर्घटनाओं में कहीं तो पूरे परिवार ही खत्म हो गए हैं जबकि कई घरों के चिराग बुझ गए। इन सड़क दुर्घाटनाओं में नवयुवकों व बच्चों की मौतों के आंकड़े अधिक बताए जा रहे हैं, वैसे महिलाओं की बढ़ी गिनती भी मरने वालों में शामिल है। 

नशे व मोबाइल फोन बढ़ाते हैं हादसे
शराब पीकर या अन्य नशों का उपयोग करके गाड़ी चलाने से सड़कों व वाहनों की टक्कर होती है व कई बेकसूर लोग भी मारे जाते हैं। इसके अतिरिक्त वाहन चलते समय मोबाइल फोन का किया जा रहा उपयोग भी सड़क हादसे बढ़ाता है।

हर वर्ष होते हैं 12 हजार हादसे
जो आंकड़े मिले हं, उनके अनुसार पंजाब में प्रत्येक वर्ष 12 हजार के लगभग सड़क हादसे होते हैं। सभी हादसे पुलिस थानों में दर्ज नहीं होते तथा कइयों का तो बाहर ही बाहर निपटारा हो जाता है। अगर देखा जाए तो वर्ष 1997 से लेकर इन 2 दशकों के दौरान सड़क हादसों की संख्या में काफी बढ़ौतरी हुई है परंतु इसके बावजूद लोग कानून के अनुसार ट्रैफिक नियमों की पालना नहीं करते।  

लोग ट्रैफिक नियमों का करते हैं उल्लंघन 
अगर सभी लोग सड़कों पर वाहन चलाते समय ट्रैफिक नियमों का पालन करें तो सड़कों पर हो रहे हादसों की संख्या कम हो सकती है व अनेकों कीमती जानें बच सकती हैं परंतु बहुत से लोग ट्रैफिक  नियमों की उल्लंघना करते हैं। पुलिस विभाग के ट्रैफिक सैल की भी लोग प्रवाह नहीं करते। हालांकि ट्रैफिक पुलिस व प्रशासन द्वारा ट्रैफिक नियमों से लोगों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर सैमीनार लगाए जाते हैं। 

वाहनों की चैकिंग तो की जाती है व हर वर्ष चालान काटकर लाखों रुपए इकट्ठा करके सरकार का खजाना भरा जाता है परंतु लोग फिर भी नहीं सुधरते व कई-कई चालान कटवा लेते हैं। सरकार को सख्त कानून बनाने की जरूरत है व ट्रैफिक पुलिस भी अपना अक्स सुधार कर ईमानदारी से कार्य करे। 

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