नाबालिग को बालिग साबित करने के लिए बनवाया वोटर कार्ड,कोर्ट ने किया रिजैक्ट

  • नाबालिग को बालिग साबित करने के लिए बनवाया वोटर कार्ड,कोर्ट ने किया रिजैक्ट
You Are HerePunjab
Thursday, September 14, 2017-12:55 PM

अमृतसर (महेन्द्र): नाबालिगा के यौन शोषण के मामले में कथित आरोपी युवक को उसके मां-बाप नाबालिग बताने का प्रयास कर रहे थे, जबकि पीड़ित परिवार उसे बालिग बता रहा था। 
हालांकि दर्ज किए गए मामले में आरोपी युवक को पुलिस ने बालिग आरोपी के तौर पर ही नामजद कर रखा था लेकिन पीड़ित परिवार ने आरोपी को बालिग साबित करने के लिए उसका कोई वोटर कार्ड पेश कर दिया जो अदालत में जाली साबित हुआ। 

आखिर स्थानीय अतिरिक्त जिला एवं सैशन जज एस.एस. धालीवाल ने सभी पहलुओं पर गौर करने के पश्चात आरोपी को नाबालिग घोषित करने का फैसला सुनाया व मामले को जुवेनाइल कोर्ट में भेजते हुए जुवेनाइल कोर्ट के जज गगनदीप सिंह गर्ग की अदालत में 19 सितम्बर को पेश होने के आदेश जारी किए हैं। यू.पी. से संबंधित एवं किंग एवेन्यू, जी.टी. रोड क्षेत्र में रह रहे प्रवासी मजदूर ने 18-12-2015 को थाना मकबूलपुरा में शिकायत दर्ज करवाई थी कि यू.पी. के जिला प्रतापगढ़ का निवासी युवक उसकी नाबालिग लड़की को बहला-फुसला कर भगा ले गया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार करते हुए पीड़िता का मैडीकल करवाने के पश्चात आरोपी के मां-बाप को भी सह-आरोपियों के तौर पर नामजद कर लिया था। 

डिफैंस कौंसिल सीता राम चौधरी ने बताया कि इस मामले में आरोपी युवक के मां-बाप को भी सह-आरोपियों के तौर पर नामजद किए जाने के कारण एक महीना जेल में रहने के पश्चात उनकी जमानत पर रिहाई हुई थी। उन्होंने अपने बेटे की जन्म तिथि 10-3-2001 बताते हुए उसे नाबालिग बताया था व अदालत में जन्म व स्कूल के सर्टीफिकेट तक पेश किए थे।

दूसरी तरफ पीड़ित परिवार ने आरोपी का वोटर कार्ड नंबर जैडयूके 1888890 पेश करते हुए उसका जन्म वर्ष 1995 में होने का दावा करते हुए आरोपी को बालिग बताने का प्रयास किया था। मामले की तस्दीक करवाने के लिए थाना मकबूलपुरा पुलिस को स्कूल की तस्दीक करने के लिए यू.पी. भी भेजा गया था जहां के प्रिंसीपल तथा क्लर्क को भी रिकार्ड पेश करने के लिए तलब किया गया था।

पीड़ित परिवार ने आरोपी युवक का जो वोटर कार्ड पेश कर उसे बालिग साबित करने का असफल प्रयास किया था, उसे लेकर यू.पी. के गांव गोपालपुर की वोटर सूची अदालत में पेश की गई थी, जिसमें आरोपी की वोट ही नहीं बनी हुई थी, जिसे देख पीड़ित पक्ष द्वारा आरोपी का पेश किया गया वोटर कार्ड खुद-ब-खुद जाली साबित हो रहा था।
 

विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में निःशुल्क  रजिस्टर  करें !