अलग लड़ो चुनाव या फिर विधानसभा क्षेत्रों के आधार पर हो सीटों की शेयरिंग

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Wednesday, November 29, 2017-11:24 AM

जालंधर(पाहवा): निगम चुनावों को लेकर भाजपा-अकाली दल की अगली योजना को लेकर भारतीय जनता पार्टी में नई आवाज आरंभ हो गई है। अभी तक भाजपा में निगम चुनावों को लेकर अकाली दल के साथ 80:20 सीट शेयरिंग पर चर्चा चल रही थी लेकिन अब अकाली दल से अलग होकर चुनाव लडऩे को लेकर भी चर्चा आरंभ हो गई है। इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने हाईकमान को पत्र लिख कर इस संबंध में अलग-अलग 3 फार्मूले दिए हैं तथा पार्टी से इन पर विचार करने को कहा है। भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष व प्रदेश भाजपा व्यापार सैल के अध्यक्ष शिव दयाल चुघ ने पार्टी को कुछ सुझाव दिए हैं। 

फार्मूला-1 अलग-अलग लड़ें भाजपा-अकाली दल : सुझाव देते हुए शिव दयाल चुघ ने कहा है कि जिस फार्मूले पर भाजपा-अकाली दल चुनाव लड़ रहा है, वह बेहद पुराना है। 20 वर्ष पहले से चल रहे इस फार्मूले के समय भाजपा एक छोटी पार्टी थी लेकिन आज भाजपा केंद्र में सत्ता में है और दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक दल है, ऐसे में भाजपा को अकाली दल से अलग होकर लडऩा चाहिए। उन्होंने कहा कि वैसे भी निकाय चुनाव एक स्थानीय चुनाव व्यवस्था है जिसमें ट्रायल के तौर पर भी भाजपा अलग से लड़ सकती है। नई वार्डबंदी के तहत 80 वार्डों में भाजपा अपने और अकाली दल जहां चाहे वहां अपने उम्मीदवार अपने-अपने स्तर पर खड़े करें। 

फार्मूला-2 विधानसभा क्षेत्र के अनुसार हो सीट शेयरिंग : एक अन्य फार्मूला देते हुए चुघ ने कहा  है कि अगर वार्डों को लेकर बंटवारा नहीं करना चाहते तो यह बंटवारा अकाली दल व भाजपा की विधानसभा सीटों के अनुसार भी हो सकता है। इसके तहत अकाली दल के हिस्से वाले विधानसभा क्षेत्र जालंधर छावनी में अकाली दल तथा भाजपा के हिस्से वाले 3 विधानसभा क्षेत्रों जालंधर केंद्रीय, नॉर्थ व वैस्ट में भाजपा सभी वार्डों में अपने उम्मीदवार खड़े करे। इससे एक दूसरे के क्षेत्र में न तो दखलअंदाजी होगी तथा न ही एक-दूसरे पर खींचतान का आरोप लगेगा। फार्मूला-3, अनुपात 80:20 हो लागू : चुघ ने लिखा है कि अगर उक्त दोनों फार्मूला ठीक नहीं लगते तो फिर कम से कम 80:20 अनुपात का फार्मूला जरूर अपनाया जाए। अभी तक जो 65:35 फार्मूला चल रहा है वह शहरी क्षेत्र तथा भाजपा की शहरी क्षेत्र में पकड़ के आधार पर पुराना फार्मूला है, इसलिए भाजपा की सीटें बढऩी चाहिएं जबकि अकाली दल की सीटों में कटौती की जानी चाहिए। 

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