मुख्यमंत्री अमरेंद्र ने जेतली को पत्र लिख उठाया ऋणों का मुद्दा

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Wednesday, October 11, 2017-5:23 PM

जालंधर (धवन): पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेतली को पत्र लिख कर मांग की है कि पंजाब के पुराने ऋण को सस्ते ऋणों में तबदील करने की अनुमति दी जाए जिससे राज्य सरकार पर वार्षिक ऋणों का बोझ कम हो सके। पंजाब सरकार ऐसा करके वार्षिक 2700 करोड़ रुपया बचाना चाहती है।

वित्त मंत्री को भेजे पत्र में कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार ने एन.एस.एस.एफ. तथा बाजार से 8.5 से लेकर 9.5 प्रतिशत की ब्याज दर से ऋण पिछले कुछ वर्षों में हासिल किया था। अब देश में ब्याज दरें कम हो चुकी हैं तथा अगर पुराने ऋण को नई कम ब्याज दरों में परिवर्तित करने की वित्त मंत्रालय अनुमति दे दे तो इससे पंजाब को लाभ होगा। अधिक ब्याज के कारण जाने वाला पैसा विकास कार्यों पर राज्य सरकार खर्च कर सकेगी।

2016-17 में पंजाब पर कुल ऋण की मात्रा 1.83 लाख करोड़ थी परंतु बाद में सत्ता परिवर्तन होने के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने विधानसभा में बयान दिया कि राज्य पर चढ़े ऋण की कुल मात्रा कहीं अधिक है। यह राशि सवा 2 लाख करोड़ होने की बात मुख्यमंत्री द्वारा कही गई। मुख्यमंत्री राज्य की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए कई और कदम उठाना चाहते हैं। इसके लिए अगली कैबिनेट बैठकों में मुख्यमंत्री द्वारा मंत्रियों के साथ चर्चा की जाएगी। पिछली बार भी जब कैप्टन 2002 में सत्ता में आए थे तो राज्य की आर्थिक स्थिति को काफी हद तक नियंत्रण में कर लिया था। मुख्यमंत्री लगातार अरुण जेतली व प्रधानमंत्री मोदी से राज्य को आर्थिक राहत दिलवाने के लिए बैठकें भी कर रहे हैं।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में अकाली-भाजपा सरकार के दौरान पंजाब पर चढ़े ऋण की मात्रा लगातार बढ़ती चली गई। 2006-07 में पंजाब में कुल ऋण की मात्रा 48,334 करोड़ थी जो अब बढ़ कर सवा 2 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी है। पंजाब पर पूर्व सरकार द्वारा 30 हजार करोड़ का अतिरिक्त बोझ भी खाद्यान घोटाले को लेकर डाला गया। केंद्र से मिली सी.सी.एल. की लिमिट गोदामों में पड़े अनाज से मेल नहीं खाती। इसे लेकर भी मुख्यमंत्री ने कई बार केंद्रीय वित्तमंत्री जेतली को उक्त विवादास्पद मसला हल करने के लिए कहा है।

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