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पंजाब के बिगड़े वित्तीय हालात बादल सरकार की देन: मनप्रीत बादल

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Wednesday, January 24, 2018-4:27 AM

जालंधर(जतिंद्र चोपड़ा): पंजाब में मौजूदा गंभीर वित्तीय संकट अकाली-भाजपा गठबंधन की देन है। उक्त आरोप लगाते हुए पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने कहा कि बादल सरकार राज्य को गंभीर आर्थिक संकट में छोड़ गई। मनप्रीत ने कहा कि किसानों के कर्जे माफी को लेकर मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह पर तंज कसने वाले अकाली दल व भाजपा नेताओं को चाहिए कि किसानों को राहत दिलाने की खातिर वे बेबुनियाद आरोप लगाने की बजाय प्रधानमंत्री कार्यालय के समक्ष धरने-प्रदर्शन करें ताकि कर्जे में डूबे किसानों को केंद्र सरकार से कुछ राहत मिल सके। 

वित्त मंत्री ने अकाली दल के आरोपों कि कै. सरकार अब प्रदेश भर के किसानों के पूरे कर्जे माफ करने के बहाने ढंूढ रही है, पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले वर्ष विधानसभा चुनावों के परिणामों से एक दिन पहले अकालियों ने 31000 करोड़ रुपए के ऋण को कैश क्रैडिट लिमिट (सी.सी.एल) में डाइवर्ट किया था। वित्त मंत्री ने कहा कि उन्हें कैसे जाहिर होता कि राज्य को 13000 करोड़ की देनदारियां अदा करनी होंगी और अकाली दल ने 17000 करोड़ रुपए के यू.डी.ए.वाई. बांड जारी किए थे। मनप्रीत ने कहा कि केंद्रीय राज्य मंत्री हरसिमरत कौर बादल और पंजाब भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यालय के समक्ष धरना देकर कर्जे से सबंधित 31000 करोड़ रुपए की सी.सी.एल. को माफ करवाएं। 

उन्होंने कहा कि अगर अकाली दल व भाजपा नेताओं की यह मांग स्वीकार कर ली जाती है तो हम किसानों के समूचे 31000 करोड़ रुपए जारी कर देंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि कै. अमरेन्द्र सिंह स्पष्ट कर चुके हैं कि केंद्र सरकार से इस संदर्भ में कोई सहयोग नहीं मिल पाने के कारण उनकी सरकार किसानों के कर्जे माफ करने की योजना का विस्तार न करते हुए केवल 2 लाख रुपए तक कर्जा माफ कर सकती है। मनप्रीत ने दावा किया है कि पंजाब कर्ज संबंधित 31000 करोड़ रुपए की सी.सी.एल. से भी बंधा हुआ है और पंजाब सरकार को सी.सी.एल. पर 3240 करोड़ रुपए हरेक वर्ष ब्याज देना पड़ता है, जिसे अगले 20 वर्ष में अदा करना होगा। मनप्रीत ने कहा कि राज्य सरकार ने यह मामला सुलझाने के लिए केंद्र के समक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि 50000 करोड़ रुपए हरेक वर्ष वसूली के लिए लिया जाता है जिस पर सरकार को हरेक वर्ष 5500 करोड़ रुपए का नुक्सान हो रहा है, जिसमें सी.सी.सी.एल. पर कर्जे पर ब्याज और किस्तों के भुगतान का 3,200 करोड़ रुपया भी शामिल है। 

केंद्र सरकार को दिया बड़े किसानों पर आधा प्रतिशत टैक्स लगाने का सुझाव
अभी किसानों की कर्ज माफी का मुद्दा ठंडा नहीं पड़ा था कि अब प्रदेश सरकार आने वाले दिनों में प्रदेश के बड़े किसानों पर टैक्स लगाने के बारे में विचार कर सकती है। प्रदेश के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने 5 लाख से ज्यादा आमदन वाले किसानों पर आधा प्रतिशत टैक्स लगाने का सुझाव केंद्र सरकार को भेजा है। इसके पीछे मनप्रीत बादल का तर्क है कि बड़े किसानों पर टैक्स लगाकर छोटे किसानों को फायदा पहुंचाया जा सकता है। मनप्रीत बादल का कहना है कि उक्त वर्ग के किसानों पर आधा प्रतिशत टैक्स लगाए जाने से 50,000 करोड़ रुपए इकट्ठे किए जा सकते हैं। अगर इतनी बड़ी रकम एक झटके से इकट्ठी हो सकती है तो इससे जहां प्रदेश की आॢथक स्थिति दोबारा ढर्रे पर आ सकती है वहीं दूसरी तरफ छोटे किसानों का सारा कर्ज भी माफ किया जा सकता है। 

बड़े किसानों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहेगी कांग्रेस 
वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने बड़े किसानों पर टैक्स लगाने का सुझाव तो जरूर दिया है मगर इसे मंजूर करना पार्टी के लिए आसान नहीं होगा। राहुल गांधी का पंजाब को लेकर पूरा ध्यान मिशन 2019 पर लगा है और वह नहीं चाहेंगे कि किसानों पर टैक्स लगाकर किसानों का विरोध झेला जाए। इसलिए मनप्रीत बादल का यह सुझाव बीच अधर में लटक सकता है। 

जी.एस.टी. को बताया मोदी सरकार का गलत फैसला जी.डी.पी. ग्रोथ व राजस्व में 
नहीं हुई कोई बढ़ौतरी, न ही घटी महंगाई। मनप्रीत बादल ने कहा कि केंद्र सरकार को जी.एस.टी. की 28 प्रतिशत टैक्स स्लैब को खत्म कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी स्लैब किसी देश में नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जी.एस.टी. को लागू करना मोदी सरकार का एक गलत फैसला था, क्योंकि जी.एस.टी जहां जी.डी.पी. के ग्रोथ को बढ़ाने में विफल रहा वहीं इसके लागू होने के उपरांत न तो राजस्व बढ़ा है और न ही महंगाई की दर में कोई गिरावट आई है। मनप्रीत ने कहा कि केंद्र सरकार जी.एस.टी. में राज्य सरकार का बनता शेयर प्रत्येक महीने की बजाय 2 महीनों बाद आबंटित कर रही है इस कारण भी प्रदेश में वित्तीय हालात बिगड़ रहे हैं। 

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