म्यांमार में मुस्लिम  नरसंहार के विरोध में उतरे मेलबोर्न में रहने वाले सिख

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Friday, September 08, 2017-3:26 PM

जालंधरः ऑस्ट्रेलियाई मेलबोर्न में रहने वाले सिख गुरुवार को म्यांमार में अपने मुस्लिम भाइयों के नरसंहार के विरोध में स्थानीय रोहिंग्या समुदाय द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन में शामिल हुए। दोनों समुदायों ने ऑस्ट्रेलियाई सरकार से भी म्यांमार सरकार पर दबाव डालने का आग्रह किया ताकि वे रोहंग्या मुसलमानों के उत्पीड़न को रोक सकें।

 

स्थानीय सिख प्रतिभागियों ने कहा कि वे शनिवार को एक और विरोध में शामिल होंगे, जो कि अल्पसंख्यकों के समर्थन में मुस्लिम रोहिंगयाओं को समर्थन देने के लिए मेलबर्न शहर में राज्य पुस्तकालय के सामने आयोजित होने होगा। प्रदर्शन दौरान मनवीर सिंह खालसा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार को म्यांमार में हस्तक्षेप करना चाहिए जहां रोहनिया मुसलमानों को भागने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में मिरी पिरी गुरुद्वारा प्रबंध समिति के सदस्य रवि इंदर सिंह ने कहा कि समुदाय के सदस्य भविष्य के विरोध में भाग लेंगे।


बता दें म्यांमार का रखाइन प्रांत रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर हमेशा से चर्चा में रहा है क्योंकि यहीं इनकी अधिक संख्या है। साल 2012 में पश्चिमी रखाइन प्रांत में हिंसा हुई। इसके बाद मध्य म्यांमार और मांडले तक हिंसा फैल चुकी थी।


यौन उत्पीड़न और स्थानीय विवादों ने रोहिंग्या और दूसरे बहुसंख्यक समुदाय के बीच हिंसा की शुरुआत की थी जिसके बाद इन संघर्षों ने सांप्रदायिकता का रूप ले लिया।
सबसे बड़ी और पहली हिंसा जून 2012 में हुई थी जिसमें रखाइन के बौद्धों और मुस्लिमों के बीच दंगे हुए। यह अनुमान लगाया जाता है कि इस हिंसा के कारण 200 रोहिंग्या मुसलमानों की मौत हुई और हजारों को दरबदर होना पड़ा।

 

इस घातक घटना की शुरुआत एक युवा बौद्ध महिला के बलात्कार और हत्या के बाद शुरू हुई थी। इसके बाद मार्च 2013 में मध्य म्यांमार में एक सोने की दुकान पर विवाद के बाद सांप्रदायिक हिंसा में 40 लोग मारे गए थे जिसके बाद रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार का मामला तूल पकड़ गया।

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