सियासत-ए-कांग्रेस: राहुल के पार्टी प्रधान बनते ही बदलेगा कांग्रेस का चेहरा

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Wednesday, November 29, 2017-11:40 AM

जालंधर (रविंदर शर्मा) : कांग्रेस कार्यसमिति में प्रस्ताव पास होने के बाद अब राहुल गांधी के राष्ट्रीय प्रधान बनने का रास्ता साफ हो गया है। अगले कुछ दिनों में ही कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रधान की कमान राहुल गांधी के हाथ में आ जाएगी। ऐसे में राहुल गांधी के प्रधान बनते ही कांग्रेस का पूरा चेहरा बदलने की तैयारी भी पार्टी ने कर ली है। राहुल गांधी खुद चाहते हैं कि पार्टी को पुराने बुजुर्ग चेहरों से निजात दिलाई जाए और नई पीढ़ी को पार्टी के अहम पदों पर बिठाया जाए ताकि इस युवा शक्ति के बल पर कांग्रेस 2019 में मोदी को टक्कर दे सके। कांग्रेस के थिंक टैंक व युवा शक्ति मानती है कि राहुल गांधी के पास वह सोच, नजर व समझ है, जिससे वह 133 साल पुरानी पार्टी को दोबारा शीर्ष पर ला सकते हैं। पार्टी नेता मानते हैं कि राहुल के प्रधान बनने के बाद एक बड़ा अंतर यह आएगा कि कार्यकत्र्ताओं के मन में पार्टी के डबल नेतृत्व को लेकर जो भ्रम था, वह खत्म हो जाएगा। 

नोटबंदी, जी.एस.टी. व अर्थव्यवस्था को लेकर होगा भाजपा पर आक्रामक प्रहार
 उनके पद संभालते ही कुछ पुराने नेता असहज दिखाई देंगे और कुछ नए नेताओं को ज्यादा खुलकर काम करने को मिलेगा। उनके नेतृत्व में पार्टी के अंदर नए नेता उभरेंगे यह भी लाजिमी है। राहुल के उपाध्यक्ष रहते पहले ही सचिन पायलट, जितिन प्रसाद और ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे युवा नेताओं को काम करने का खुला मौका मिला था। पार्टी के अंदर यह भी चर्चा बनी हुई है कि जिस तरह से पिछले कुछ दिनों से राहुल ने अपनी छवि को बेहद अच्छे ढंग से निखारा है, उससे आने वाले दिनों में पार्टी को खासा फायदा होने की संभावना है। राहुल गांधी के प्रधान बनते ही कांग्रेस आने वाले दिनों में नोटबंदी, जी.एस.टी. और अर्थव्यवस्था की गिरावट को लेकर भाजपा पर आक्रामक तरीके से प्रहार करने जा रही है। राहुल के प्रधान बनते ही पार्टी के भीतर बुजुर्गों की दखलअंदाजी कम होगी तो सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया, के.सी. वेणुगोपाल, दिव्य स्पंदना, आर.पी.एन. सिंह, जितेंद्र सिंह, रणदीप सुर्जेवाला, जितिन प्रसाद, गौरव गोगोई और सुष्मिता देव जैसे चेहरे हैं जिन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अहम स्थान मिल सकते हैं। 

भ्रष्टाचार से घिरे नेताओं को दरकिनार कर राहुल बना सकते हैं नई छवि
पार्टी के ङ्क्षथक टैंक सोचते हैं कि इंदिरा गांधी की तरह राहुल करिश्माई नेता नहीं है और न ही पार्टी के पास गरीबी हटाओ जैसा कोई जादुई नारा है, मगर मोदी सरकार की लगातार विफलता पर आक्रामक तरीके से प्रहार कर जनता का साथ पाया जा सकता है। वहीं, पार्टी के भीतर ही भ्रष्टाचार से घिरे नेताओं को दरकिनार कर राहुल गांधी पार्टी की नई छवि पेश कर सकते हैं। हालांकि 2019 का टास्क राहुल गांधी के लिए बेहद मुश्किल होगा क्योंकि ऐसा पहली बार है जब देश के साथ-साथ कांग्रेस अधिकांश प्रदेश भी गंवा चुकी है और उसका राज इक्का-दुक्का राज्यों में ही रह गया है। वहीं पार्टी के अंदर कई बेसुरे नेताओं के बेसुरे बोल भी पार्टी को लगातार बैकफुट पर ले जाते हैं। ऐसे नेताओं पर भी राहुल गांधी लगाम कस सकते हैं और प्रवक्ताओं की नई फौज को पार्टी के भीतर आगे ला सकते हैं। 

वरुण गांधी भी थाम सकते हैं कांग्रेस का हाथ
राहुल गांधी के प्रधान बनते ही पार्टी खुद के स्ट्रक्चर में हर तरह का बदलाव करने जा रही है। इसके लिए पहले सशक्त चेहरों को पार्टी के साथ जोडऩे की योजना पर भी काम चल रहा है। वहीं भाजपा से नाराज कई बड़े नेताओं को भी पार्टी में शामिल करने की योजना है। ऐसे में पहला दाव कांग्रेस वरुण गांधी पर खेल सकती है। पार्टी सूत्रों का मानना है कि राहुल गांधी के अध्यक्ष बनते ही वरुण गांधी कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं। कारण साफ है कि कद के हिसाब से भाजपा वरुण गांधी को अहमियत नहीं दे रही है, जिससे वह नाराज चल रहे हैं। गौर हो कि राहुल गांधी हो या फिर वरुण गांधी दोनों ने कभी भी सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी नहीं की है। वरुण गांधी अगर कांग्रेस में आते हैं तो गांधी परिवार तकरीबन 35 साल के बाद एक बार फिर साथ होगा। 


 

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