संघ के कार्यक्रम में दिखी खटासः अकाली-भाजपा गठबंधन में बढ़ी दरार

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Thursday, October 26, 2017-3:05 PM

नई दिल्ली (सुनील पांडे): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस.) की सिख इकाई राष्ट्रीय सिख संगत द्वारा गुरु गोबिन्द सिंह का 350वां प्रकाश पर्व मनाने को लेकर भाजपा और अकाली दल की राहें जुदा-जुदा नजर आ रही हैं। 

 

इसका प्रमुख कारण 2004 में श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा संघ तथा राष्ट्रीय सिख संगत को सिख विरोधी जमात बताते हुए सिखों को इन संस्थाओं से दूर रहने की दी गई हिदायत है, जो आजकल सुॢखयों में है। राष्ट्रीय सिख संगत द्वारा बुधवार को आयोजित कार्यक्रम को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह की ओर से जारी नए आदेश में सिख कौम को अलग कौम बताते हुए संघ के खिलाफ जारी हुक्मनामे के जस का तस होने का हवाला सामने आया है। इसके बाद शिरोमणि कमेटी, दिल्ली कमेटी सहित सभी पंथक पाॢटयां अकाल तख्त के आदेश पर पहरा देने की दुहाई देने में लग गईं। नतीजतन, इस कार्यक्रम से जागरूक सिखों के द्वारा दूरी बनाने की संभावना पैदा हो गई है।

 

उधर, अकाली दल द्वारा पंजाब में सत्ता गंवाने के बाद पंथक एजैंडे से हाथ खींचने में भलाई न होने का संकेत देने के बाद दिल्ली में भाजपा की निगाहें अब परमजीत सिंह सरना की अगुवाई वाली पार्टी शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) की ओर हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक इसी हफ्ते भाजपा के राष्ट्रीय सचिव आर.पी. सिंह और सिख संगत के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरचरन सिंह गिल ने दिल्ली के एक होटल में सरना के छोटे भाई एवं पटना साहिब गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष हरविंद्र सिंह सरना से मुलाकात की थी लेकिन, सोशल मीडिया पर इस मुलाकात का खुलासा होने के बाद आज सफाई देने उतरे हरविंद्र सिंह सरना ने भी माना कि उनकी मुलाकात संघ नेताओं से हुई थी पर उन्होंने, प्रोग्राम में शामिल होने को लेकर 2 टूक मना कर दिया था। उधर, गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव हारने के बाद पंजाब भाजपा अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला के बयान में भी आज हैरानीजनक बदलाव सामने आया। हार के तुरंत बाद सांपला ने हार का ठीकरा भाजपा नेताओं पर फोड़ा था, लेकिन अकाल तख्त के आदेश और अकाली दल द्वारा उनके कार्यक्रम से दूरी बनाने के संकेत मिलने के बाद आज सांपला के सुर भी बदल गए। उन्होंने हार के लिए अकाली दल को जिम्मेदार ठहरा दिया। 

 

 

संघ से हुई थी मुलाकात : सरना 
श्री पटना साहिब गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष हरविंद्र सिंह सरना ने माना कि भाजपा और संघ के कुछ नेताओं ने उनसे मुलाकात की है। उन्होंने कहा कि वह बुधवार के इस कार्यक्रम के लिए मिले थे, लेकिन उन्होंने स्पष्ट मना कर दिया है। उन्होंने कहा कि सिख धर्म एक अलग धर्म है, यह किसी की शाखा नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा और अकाली टूट की कगार पर पहुंच चुके हैं। सरना ने कहा कि अकाल तख्त साहिब ने कल के कार्यक्रम को लेकर तो आदेश दे दिया है, लेकिन जो लोग अब तक अवज्ञा करते रहे हैं, उन पर क्यों नहीं कार्रवाई हुई?

 

सिख धर्म की विलक्षण पहचान को मानता है संघ : बजरंग लाल गुप्त

आर.एस.एस. के वरिष्ठ पदाधिकारी डा. बजरंग लाल गुप्त ने कहा कि आर.एस.एस. सिख धर्म की विलक्षण पहचान को मानता है। आर.एस.एस. से जुड़े राष्ट्रीय सिख संगत द्वारा बुधवार को तालकटोरा स्टेडियम में विशेष समागम के आयोजन पर मचे घमासान के मुद्दे पर उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह समागम श्री गुरु गोङ्क्षबद सिंह जी के 350वें प्रकाश वर्ष के निमित्त किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इसे लेकर सिख धर्म के प्रति संघ के दृष्टिकोण को गलत रूप में रखकर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है जबकि संघ की मान्यता है कि सिख धर्म भी जैन और बौद्ध धर्म की भांति ही एक सामाजिक-धार्मिक मान्यता प्राप्त स्वतंत्र धर्म है और सिखों की एक अलग पहचान है।  आर.एस.एस. हमेशा से ही सिख धर्म की अलग पहचान को मानता रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि सभी को यह पर्व मिल-जुलकर मनाना चाहिए। गुरु जी के गुणगान के अवसर पर ओछी राजनीति के कारण विवाद का विषय बनाने का पाप नहीं करना चाहिए। 

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