भ्रष्टाचारों के आरोपों से घिरे केजरीवाल क्या रूठों को मनाने पंजाब आएंगे?

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Saturday, May 20, 2017-1:38 PM

जालंधर (बुलंद): पंजाब में लगातार गिरते आम आदमी पार्टी के ग्राफ को ऊपर उठाने के लिए पार्टी के पंजाब नेताओं की सारी भाग-दौड़ बेकार नजर आ रही है। पार्टी के जमीनी स्तर पर काम करने वाले वालंटियर घरों में जा बैठे हैं।


मान को कमान सौंपने के बाद कठिनाइयां पैदा हुर्इ
पंजाब के तकरीबन सारे शहरों-गांवों में पार्टी वर्कर ‘आप’ पार्टी की नीतियों से खफा होकर या तो पार्टी छोड़ रहे हैं या फिर कांग्रेस औरअन्य पार्टियों में अपना राजनीतिक भविष्य तलाशने में लगे हैं। जालंधर से कभी युवाओं को ‘आप’ पार्टी से जोडऩे वाले सन्नी खुराना, हिमांशु पाठक जैसे युवा पार्टी को छोड़ कर दूसरी पार्टियों का दामन थाम चुके हैं। पंजाब कन्वीनर गुरप्रीत घुग्गी पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं। ऐसे में भगवंत मान को पंजाब की कमान सौंपने के बाद से पार्टी के लिए और कठिनाइयां पैदा हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार मान ने अपने सारे विरोधियों और उनके सहयोगियों को पार्टी में जीरो करने की योजनाएं बनानी शुरू की हुई हैं जिससे पार्टी के भीतर ही कई गुट बनते जा रहे हैं। ऐसे हालात में अब बड़ा सवाल यह पैदा हो गया है कि क्या पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल पंजाब आएंगे और पंजाब में पार्टी की हालत को एक बार फिर सुधारने का यत्न करेंगे। वैसे फिलहाल इस बात की सारी जिम्मेदारी पार्टी ने फूलका और अमन अरोड़ा के कंधों पर लाद दी है कि पंजाब में हर जिले में जाओ और वालंटियरों को हौसला दो कि पार्टी एक बार फिर से अपने पैरों पर खड़ी होगी पर इसका कोई असर नजर नहीं आ रहा है।


निगम चुनावों से पहले ‘आप’ में होंगे कई धमाके
 ऐसे में वालंटियरों की ओर से लगातार एक ही आवाज सामने आ रही है कि केजरीवाल पंजाब आकर खुद पार्टी वर्करों से मिलें और जमीनी समस्याएं सुनें ताकि पार्टी में पंजाब निगम चुनाव से पहले जान फूंकी जा सके। उधर केजरीवाल के करीबी सूत्रों की मानें तो दिल्ली में बद से बदतर होते पार्टी के हालात ने केजरीवाल की नींद हराम की हुई है। कपिल मिश्रा के बाद पंकज पुष्कर विरोधी सुरों ने केजरीवाल को मीडिया से दूरी बनाने को मजबूर कर दिया है। ऐसे में पंजाब के नेताओं द्वारा लाख बुलाने पर भी केजरीवाल पंजाब की ओर मुंह नहीं कर रहे पर जिस प्रकार पंजाब में निगम चुनाव और गुरदासपुर उप-चुनाव सिर पर आते जा रहे हैं, ऐसे में अगर पार्टी का मनोबल उठाने के लिए केजरीवाल ने पंजाब का रुख न किया तो हो सकता है कि जल्द ही फूलका और अमन अरोड़ा भी थक-हार कर बैठ जाएं और भगवंत मान अकेले कितना पार्टी प्रचार का काम संभाल सकते हैं यह सब जानते हैं। ऐसे में पार्टी निगम चुनावों में क्या प्रदर्शन करेगी इस बारे कुछ बताने की जरूरत नहीं है। उधर गुरप्रीत घुग्गी इशारा दे चुके हैं कि निगम चुनावों से पहले ‘आप’ पार्टी में कई धमाके होंगे। इससे लगता है कि पार्टी में कांग्रेस और अकाली-भाजपा कहीं सेंध लगाने में कामयाब हो गए तो पार्टी का निगम चुनावों से पहले जलूस निकल सकता है। देखना होगा कि पार्टी संयोजक केजरीवाल पंजाब में ‘आप’ को बचाने के लिए पंजाब का रुख करते हैं या पंजाब को मान, खैहरा और फूलका पर छोड़कर दिल्ली में अपने नेताओं के विरोधों में ही घिरे रहते हैं।


 

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