दिल्ली वालों और नाराज वर्करों ने डुबोई ‘आप’ की लुटिया

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Tuesday, March 21, 2017-8:34 AM

जालंधर  (बुलंद): आम आदमी पार्टी के स्टेट कन्वीनर गुरप्रीत सिंह वड़ैच (घुग्गी) की अगुवाई में आज ‘आप’ की पंजाब में हुई हार के कारण जानने के लिए जालंधर कुंज में आत्म मंथन बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में पंजाब के सारे 117 हलकों के हारे व जीते उम्मीदवार शामिल हुए। 
इस मौके बैठक स्थल में न तो मीडिया की एंट्री होने दी गई और न ही पार्टी वालंटियरों को ही शामिल होने दिया गया। इससे पार्टी वर्करों में और मीडिया वर्करों में नाराजगी पाई गई। बैठक में 117 हलकों के उम्मीदवारों ने वैसे तो अपने-अपने हलके में पार्टी की हार के कारणों बारे मुख्य तौर पर यही बताया कि पार्टी ओवर कन्फीडैंस का शिकार हुई है। पार्टी नेताओं ने भगवंत मान और गुरप्रीत घुग्गी के सामने एक सुर होकर कहा कि पार्टी की हार का बड़ा कारण यह भी रहा कि पार्टी चुनाव पंजाब में लड़ रही थी पर 117 सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों के सिर पर दिल्ली से लाकर टीमें बिठाई हुई थी। 
पार्टी नेताओं ने कहा कि दुर्गेश पाठक और संजय सिंह जैसे नेताओं का पंजाब में कोई आधार नहीं था, इसके बावजूद उन्हें पंजाब में चुनावी बागडोर सौंपी गई। इतना ही नहीं दिल्ली से आए नेता अपनी मनमर्जी पंजाब के नेताओं पर थोपते रहे, जिसका नतीजा सबके सामने है। 

क्या कहा अंदरखाते
जानकारों के अनुसार पार्टी बैठक में उस समय हंगामा होते-होते बचा जब एक नेता ने भगवंत मान पर तंज कसते हुए कहा कि एक ओर पार्टी नशे के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने की बातें कर रही थी तो दूसरी ओर पार्टी के नेता ही शराब में ‘टुन्न’ सोशल मीडिया पर छाए रहते थे। इस नेता ने यहां तक कह दिया अगर भगवंत मान एक महीना शराब से परहेज कर लेते तो अच्छा होता। इसके बाद हंगामा होने लगा पर पार्टी नेताओं ने इसे तुरंत ठंडा करवा दिया। इसके अलावा पार्टी नेताओं को यह भी समझाया गया कि कांग्रेस अगर कोई पंजाब में अच्छा कदम उठाती है तो उसकी ज्यादा प्रशंसा नहीं करनी। ऐसा न लगे कि ‘आप’ वर्कर कांग्रेस के फैन हैं। इस मौके आप नेताओं एच.एस.फूलका, सुखपाल खैहरा सहित अन्य ने भी संबोधित किया।

मुख्यमंत्री चेहरा न होना और टिकटों की लारेबाजी भी बनी हार का कारण

‘आप’ नेताओं ने बताया कि पंजाब में सफलता न मिल पाने का कारण यह भी रहा कि पंजाब में पार्टी मुख्यमंत्री का चेहरा जनता के सामने नहीं ला सकी। ऐसे में अफवाहों का दौर भी गर्म रहा । कोई कहता रहा कि केजरीवाल खुद पंजाब के सी.एम बनेंगे। इसके अलावा एक कारण यह भी रहा कि पार्टी ने पारदर्शिता कायम नहीं रखी। एक-एक सीट से 20-20 लोगों को टिकट देने का वायदा किया गया और बाद में किसी और को टिकट दे दी गई। ऐसे में जो टिकट से वंचित रह गए उन्होंने अंदरखाते पार्टी के उम्मीदवारों का विरोध जारी रखा और सीट हराकर ही दम लिया। इस मौके भगवंत मान ने कहा कि पार्टी की चाहे पंजाब में सीटें कम आई हैं पर इसे पार्टी की हार नहीं कहा जा सकता, क्योंकि पार्टी ने अकाली दल-भाजपा जैसी पार्टियों को पराजित किया है।  कार्यक्रम के अंत में पत्रकारों के सवाल के जवाब में मान ने कहा कि वह अगर शराब पीते हैं तो यह उनकी निजी जिंदगी का हिस्सा है पर पार्टी के लिए उनकी मेहनत किसी तरह से कम नहीं रही। 
गुरप्रीत सिंह वड़ैच ने कहा कि पार्टी इन सारे कारणों की रिपोर्ट अरविंद केजरीवाल को भेजेगी और उसके बाद नई रणनीति बनाकर पंजाब निगम चुनावों और लोकसभा चुनावों में उतरेगी। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के 22 विधायक विधानसभा में कांग्रेस को पंजाब से किए वायदे याद करवाती रहेगी।

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