दागी नंबरदारों पर गिर सकती है गाज, हो सकती है कड़ी कार्रवाई

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Wednesday, November 29, 2017-9:57 AM

जालंधर (अमित): तहसीलों में पैसे लेकर गवाही डालना एक आम बात बन चुकी है और शायद इसीलिए 1000 से 2000 रुपए लेकर रजिस्ट्री के लिए गवाही डालने का गोरखधंधा बदस्तूर जारी है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है और आने वाले समय में दागी व आपराधिक रिकार्ड वाले नंबरदारों पर गाज गिर सकती है तथा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। डी.सी. द्वारा लगभग 15 नंबरदारों को इस संबंधी नोटिस जारी किया गया था जिसको लेकर डी.सी. अदालत में कार्रवाई शुरू हो गई है। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई तय थी जिसमें नंबरदारों की तरफ से अपना पक्ष रखने के लिए कुछ समय की मांग की गई जिसके बाद इस मामले की सुनवाई 12 दिसम्बर, 2017 तक टल गई। गौर हो कि पिछले कुछ समय के दौरान ठगी के सामने आए कई मामलों को देखते हुए तत्कालीन डी.सी. कमल किशोर यादव द्वारा लगभग जारी एक आदेश जिसमें जिले के सारे दागी और आपराधिक रिकार्ड वाले नंबरदारों की एक लिस्ट तैयार करने के लिए कहा गया था, को कुछ अधिकारियों ने तो काफी गंभीरता से लेते हुए पूरी तनदेही के साथ इसे अंजाम दिया लेकिन कहीं-कहीं ढील भी बरती गई। 

किस-किस नंबरदार को जारी हुए हैं नोटिस
डी.सी. दफ्तर से प्राप्त जानकारी के अनुसार गोङ्क्षबद राय (जालंधर), चमन लाल (जालंधर), प्रीतम दास (जालंधर), मंगा सिंह (जालंधर), भूपिंद्र सिंह (फिल्लौर), मङ्क्षहद्र सिंह (फिल्लौर), अवतार सिंह विर्क (फिल्लौर), बहादुर सिंह (फिल्लौर), हरजिंद्र सिंह (समराय), मक्खन सिंह (नकोदर), गुरबचन लाल (नकोदर), मेजर सिंह (नकोदर), कुंदन सिंह (फतेहगढ़), गुरमेल सिंह (भोगपुर), कृपाल सिंह (मूसापुर) को नोटिस जारी हैं और उक्त सभी द्वारा अपना-अपना पक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। 

जिले में 1946 नंबरदरों को हर साल मिलता है साढ़े 3 करोड़ मान-भत्ता
माल व पुनर्वास विभाग द्वारा साल 2015-16 के संशोधित बजट के अनुसार जालंधर जिले में कुल 1946 नंबरदार हैं जिसमें तहसील जालंधर-1 में कुल &&0, तहसील जालंधर-2 में कुल 421, तहसील फिल्लौर में कुल 550, तहसील नकोदर में कुल &&0 और तहसील शाहकोट में कुल &15 नंबरदारों को हर साल 1500 रुपए मासिक के हिसाब से कुल & करोड़ 50 लाख 28 हजार रुपए का सालाना मान-भत्ता सरकार की तरफ से अदा किया जाता है। 

जेल में रह चुके नंबरदार मान-भत्ते के हकदार नहीं
प्रदेश सरकार के माल, पुनर्वास और डिजास्टर मैनेजमैंट विभाग (भूमि राजस्व शाखा) द्वारा जारी एक पत्र के अनुसार कोई भी नंबरदार जो जेल में रह चुके हैं या फिर जिन्होंने अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया हुआ है, वे मान-भत्ते के हकदार नहीं हैं क्योंकि पंजाब लैंड रैवेन्यू रूल्ज, 1909 के अनुसार ऐसे नंबरदारों द्वारा अपना फर्ज नहीं निभाया गया माना जाता है। तहसीलदार-2 द्वारा डी.सी. को सौंपी गई रिपोर्ट में एस.एस.पी. (देहाती) से कुल 375 नंबरदार, कानूनगो हलका नंगलफीदां के 82, पचरंगा के 66 और भोगपुर के 76 नंबरदारों की लिस्ट सौंपी गई थी। इसके साथ ही कमिश्नरेट पुलिस के अंतर्गत आने वाले थाना नं. 1 और थाना नं. 8 की रिपोर्ट भी सौंपी गई थी। पुलिस से आई रिपोर्ट को मानें तो 8 नंबरदारों के बारे में बताया गया है कि उक्त नाम का कोई व्यक्ति नंबरदार है ही नहीं, इसके साथ ही 28 नंबरदारों का निधन हो चुका है, 4 नंबरदार किसी कारण से डिसमिस हो चुके हैं, 18 नंबरदार थोड़े समय के लिए या स्थायी तौर पर विदेश में रह रहे हैं, 16 नंबरदारों के खिलाफ किसी न किसी मामले में एक या एक से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं जिनमें से कुछ मामलों में वे बरी भी हो चुके हैं। 

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