अधिकारी नहीं देते आर.टी.आई. का जवाब, गलियारे के इर्द-गिर्द हो रहा होटलों का अवैध निर्माण

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Wednesday, November 29, 2017-1:35 PM

अमृतसर(रमन): नगर निगम के एम.टी.पी. विभाग की कार्रवाइयां कागजों में सिमटी रही हैं, नतीजा अधिकारी बेलगाम हो गए हैं। इसको लेकर आर.टी.आई. एक्टीविस्ट जयगोपाल लाली ने बताया कि निगम के एम.टी.पी. विभाग से उन्होंने आर.टी.आई. द्वारा गलियारे के इर्द-गिर्द बन रहे होटलों को लेकर 2012 से 2017 तक का रिकार्ड मांगा था, लेकिन आर.टी.आई. का किसी भी अधिकारी ने उत्तर नहीं दिया। उन्होंने कहा कि 4 दिन पहले भले ही मंत्री सिद्धू ने गलियारे से जुड़े कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई की है लेकिन उनके कार्यकाल में भी मौजूदा अधिकारियों के मार्गदर्शन में अवैध होटल बन रहे हैं। 

लाली ने कहा कि एम.टी.पी. विभाग के सभी अधिकारियों के बैंक एकाऊंट एवं प्रॉपर्टी की जांच होनी चाहिए कि उनके पास इतना पैसा आया कहां से है। एक तरफ निगम में कर्मचारियों को देने के लिए वेतन नहीं है व निगम कंगाल हुआ पड़ा है लेकिन ये अधिकारी मालामाल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर.टी.आई. का उत्तर न मिलने पर उन्होंने कमिश्नर नगर निगम को अपील लगाई थी कि संबंधित विभाग आर.टी.आई. का उत्तर नहीं दे रहा है।

इस पर उन्हें निगम के कानून विभाग का एक पत्र मिला कि 9 नवम्बर को वह 3 बजे कमिश्नर के आफिस में आएं, लेकिन 9 नवम्बर से लेकर आज तक कोई भी अधिकारी इस पत्र के संबंध मे नहीं मिला। कई बार निगम कार्यालय में इस संबंध में जा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम किसी भी तरीके से कोई जानकारी नहीं दे रहा है जिससे वह स्टेट कमिश्नर को अपील लगाएंगे व संबंधित अधिकारियों के खिलाफ शिकायत करेंगे, जरूरत पडऩे पर हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे। 

लाली ने कहा कि पिछले दिनों कमिश्नर ने शहर में बन रहे भवनों के मालिकों को नोटिस निकाले व उनके बिजली मीटर काटने के लिए लिखा था लेकिन न तो किसी का सीवरेज-पानी का कनैक्शन कटा और न ही किसी का बिजली कनैक्शन कटा है। शहर में बिना अनुमति के हर रोज अवैध इमारतें बन रही हैं लेकिन एम.टी.पी. विभाग केवल खानापूॢत ही करता है। इन इमारतों के पर कार्रवाई न करने के लिए नेताओं का भी दबाव रहता है। सरकार बदलने के बाद भी अवैध निर्माण किए जा रहे हैं।  

गलियारा एवं श्री दरबार साहिब के आस-पास बने अवैध होटलों को लेकर पंजाब सरकार ने 2016 में एक नोटिस निकाला था जिसमें उन्हें नियमित करवाने के लिए कहा था। उस समय निगम के एम.टी.पी. विभाग में लगभग 216 होटलों को रैगुलर करने के लिए आवेदन आए थे जिनमें से कइयों ने गलत दस्तावेज दिए हैं व कइयों ने तो निगम की आंखों में मिट्टी डालने वाला काम किया है। सरकार ने नोटीफिकेशन अप्रैल 2016 में निकाला था। कई आवदेनकत्र्ता होटलों ने मई 2016 में इमारत खरीदी है जिसकी रजिस्ट्री भी मई माह में हुई है, पर निगम को अप्रैल माह में होटल बनने की जानकारी दी गई है। कई होटल मालिकों ने खाली प्लाट में ही होटल को दर्शाया है व कइयों ने घरेलू मकान में ही होटल को दर्शाया है, सिर्फ चंद स्थानों पर ही अधिकारी कार्रवाई कर रहे हैं बाकी सभी पर सैटिंग ही हो रही है। नेताओं का इमारतों पर कार्रवाई न करने को लेकर काफी दबाव चल रहा है। इनमें से कई इमारतें सत्ताधारी पार्षदों के रिश्तेदारों एवं चहेतों की हैं इसीलिए खानापूॢत के नाम पर केवल नोटिस ही निकाले जा रहे हैं लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही है। 

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